MDR के बाद अब TMR, मेडिकल डिवाइस के अंधाधुंध मुनाफे पर कैसे लगेगी रोक?
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अगर कोई मरीज अस्पताल में अपना इलाज करवाने गया है तो इलाज के दौरान कई बार दवाइयों के अलावा भी दूसरे मेडिकल सामान का भी इस्तेमाल होता है, जिसकी वजह से आखिरी में आया बिल काफी ज्यादा बढ़ जाता है.
लेकिन क्या आपने कभी ये सोचा है कि मेडिकल डिवाइस की खरीद कीमत कितनी होती है और अस्पताल आपसे उसके कितने पैसे वसूल करता है?
अगर खरीद कीमत और मरीज से ली गई रकम में काफी ज्यादा अंतर हो तो ऐसे में कई सवाल उठ सकते हैं. इसी बात को लेकर इस समय चर्चा की जा रही है.
दरअसल, इसकी चर्चा तब तेज हुई जब मेडिकल डिवाइस की खरीद कीमत और जो पैसे मरीजों से लिए जा रहे थे उनमें अंतर मिला, जिसके बाद ही TMR यानी Trade Margin Rationalisation पर चर्चा शुरू हुई.
ऐसे में हो सकता है कि कई लोगों को TMR के बारे में जानकारी न हो कि आखिर ये होता क्या है तो सबसे पहले इसके बारे में जानते हैं.
क्या होता है TMR?
सबसे पहले बात करते हैं TMR की आखिर ये होता क्या है तो TMR के तहत एक ऐसी प्राइसिंग व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है, जिसमें मेडिकल डिवाइस की खरीद कीमत और मरीज से उसके बदले में ली गई रकम के बीच के बड़े अंतर को कम करना है.
मान लीजिए, अगर अस्पताल को कोई मेडिकल सामान 100 रुपये का मिल रहा है और वे मरीज से उसके लिए 400 रुपये ले रहे हैं तो TMR में इसी अंतर को कम करने पर ध्यान दिया जाता है. इस को लेकर फिलहाल चर्चा जारी है.
जांच में मिला बड़ा अंतर
बता दें कि महाराष्ट्र FDA की जांच के दौरान कुछ हैरान करने वाले खुलासे हुए.
जांच में कुछ मेडिकल डिवाइस की खरीद कीमत और MRP के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला है.
कितना मार्जिन तय होगा?
जानने वाली बात ये है कि आखिर सरकार मेडिकल डिवाइस पर कितना मार्जिन तय करने वाली है?
सरकार कितना मार्जिन तय करेगी फिलहाल इस पर कोई फैसला नहीं किया गया है इसपर चर्चा की जा रही है.
सर्वे में ओर क्या खुलासे हुए?</stron
📡 स्रोत: ABP Live Vyapar