मेडिकल रिपोर्ट में चोट न होने पर भी पॉक्सो पीड़ित मुआवजे से वंचित नहीं किए जा सकते: इलाहाबाद उच्च न्यायालय
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इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने व्यवस्था दी है कि पोक्सो अधिनियम के अंतर्गत यौन उत्पीड़न के पीडि़तों को केवल इस आधार पर मुआवजे से वंचित नहीं किया जा सकता कि उसकी मेडिकल रिपोर्ट में किसी शारीरिक चोट का उल्लेख नहीं है। न्यायमूर्ति शेखर बी सराफ और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय ने प्रशासन को उत्तर प्रदेश रानी लक्ष्मीबाई सम्मान कोष योजना के अंतर्गत आदेश की सत्यापित प्रति जमा करने के दस दिन के भीतर नाबालिग को तीन लाख रूपये देने का निर्देश दिया है।
न्यायालय ने जिला संचालन समिति के मुआवजा रोकने के फैसले को रद्द कर दिया। न्यायालय ने कहा कि पॉक्सो अधिनियम की धारा 3 के तहत यौन उत्पीड़न को साबित करने के लिए शारीरिक चोट होना जरूरी नहीं है। पीठ ने कहा कि जब प्राथमिकी और आरोपपत्र में अधिनियम की धारा 4 के तहत अपराध का उल्लेख हो, तो केवल ऐसी मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर मुआवजा देने से इनकार नहीं किया जा सकता, जिसमें किसी चोट का उल्लेख न हो। अदालत ने यह भी कहा कि मुआवजा योजना पीड़ितों के सदमे और पीड़ा को कम करने के उद्देश्य से बनाई गई है। इसलिए इसकी व्याख्या उदारतापूर्वक की जानी चाहिए।