मेडिकल यूनिवर्सिटी में 7 दिन की दवा से मरीज परेशान:इटावा में काउंटरों पर लंबी कतार, हर सप्ताह पर्चा-डॉक्टर-दवा की प्रक्रिया
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →इटावा सैफई स्थित उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय में दवा मिलने की अवधि घटाकर सात दिन किए जाने से लंबे समय से उपचार करा रहे मरीजों की मुश्किल बढ़ गई है। पहले मरीजों को 15 दिन की दवा एक साथ मिल जाती थी।
अब सात दिन की दवा मिलने के बाद उन्हें दोबारा सैफई आकर पर्चा नवीनीकरण, चिकित्सक से परामर्श और दवा लेने की प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है। बुधवार को विश्वविद्यालय की ओपीडी और 500 बेड के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की ओपीडी में दवा काउंटरों पर मरीजों की लंबी कतारें दिखाई दीं।
इनमें गंभीर बीमारियों का लंबे समय से इलाज करा रहे मरीज भी शामिल थे। मरीजों का कहना था कि बीमारी और उपचार में कोई बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन दवा की अवधि कम होने से अस्पताल के चक्कर बढ़ गए हैं। जमीन पर बैठे वृद्ध रमेश सिंह ने बताया कि पहले शुरुआत में एक महीने की दवा मिलती थी।
इसके बाद अवधि घटाकर 15 दिन कर दी गई और अब केवल सात दिन की दवा दी जा रही है। उनका कहना था कि गंभीर और बुजुर्ग मरीजों के लिए बार-बार सैफई आना काफी मुश्किल है। विनोद कुमार ने बताया कि 15 दिन की दवा मिलने से काफी सुविधा रहती थी। अब सात दिन बाद फिर पर्चा बनवाने और चिकित्सक को दिखाने के बाद दवा लेनी पड़ती है।
उन्होंने कहा कि जब दवा में कोई बदलाव नहीं होता तो हर सप्ताह अस्पताल आने की व्यवस्था मरीजों के लिए परेशानी बढ़ाने वाली है। न्यूरो सर्जरी विभाग में उपचार करा रहे सुखदेव सिंह ने बताया कि उनकी दवा लंबे समय तक चलनी है, लेकिन चिकित्सक की ओर से सात दिन की दवा लिखी गई है।
उन्होंने कहा कि गंभीर मरीजों को बार-बार दवा लेने के लिए बुलाने के बजाय उपचार की जरूरत के अनुसार अधिक अवधि की दवा उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
📡 स्रोत: NewsData.io