मेरठ का सलमान दो माह के लिए जिला बदर:गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई, पुलिस ने मुनादी कराकर चेतावनी दी
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →मेरठ के परीक्षितगढ़ थाना पुलिस ने गुंडा नियंत्रण अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को दो माह के लिए जिला बदर करा दिया। डीएम और न्यायालय के आदेश के बाद पुलिस ने गुरुवार को यह कार्रवाई की। जिला बदर किए गए आरोपी की पहचान सलमान पुत्र अली हसन, निवासी ग्राम आसिफाबाद के रूप में हुई है।
पुलिस ने गांव में मुनादी भी कराई। जिला नहीं छोड़ने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी। पुलिस के अनुसार सलमान के खिलाफ गुंडा नियंत्रण अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई थी। मामले में न्यायालय और डीएम के आदेश के बाद उसे दो माह की अवधि के लिए मेरठ जिले की सीमा से बाहर रहने का आदेश जारी किया गया।
आदेश मिलने के बाद परीक्षितगढ़ थाना पुलिस ने गुरुवार को आरोपी के खिलाफ जिला बदर की कार्रवाई को अमल में लाया। पुलिस टीम ने आरोपी को आदेश की जानकारी देते हुए निर्धारित अवधि तक जिले की सीमा में प्रवेश नहीं करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही जिला बदर की कार्रवाई की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने के लिए ग्राम आसिफाबाद में मुनादी भी कराई गई।
पुलिस ने ग्रामीणों को बताया कि संबंधित आरोपी को दो माह के लिए जिले से जिला बदर किया गया है और आदेश का उल्लंघन करने पर उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और आपराधिक गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए ऐसे अभियुक्तों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस ने ग्रामीणों से भी अपील की कि जिला बदर आरोपी के संबंध में किसी प्रकार की जानकारी मिलने पर तत्काल पुलिस को सूचना दें। जिला बदर की कार्रवाई थाना प्रभारी केदार सिंह के नेतृत्व में उपनिरीक्षक यशपाल सिंह, उपनिरीक्षक दीपक वर्मा, कांस्टेबल भूपेंद्र यादव और कांस्टेबल मानवेन्द्र सिंह की टीम ने की।
सलमान को कुल दो माह के लिए जिला बदर किया गया है।
📡 स्रोत: NewsData.io
🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत
गुंडा नियंत्रण अधिनियम के तहत कार्रवाई से यह स्पष्ट होता है कि अपराध का सामना कानून से करना समाज के लिए सबसे सुरक्षित रास्ता है। जब भी किसी विवाद का सामना हो, तो कानूनी मार्ग अपनाना, साक्ष्य जमा करना और अदालत में मामला दर्ज करना बेहतर विकल्प है। इससे न केवल अपराधी को जवाबदेह ठहराया जाता है, बल्कि पीड़ित को भी न्याय और शांति मिलती है। समाज को चाहिए कि वह कानून के प्रति जागरूक रहे और शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में कदम बढ़ाए।