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'मेरे दो बेटों को 20 गोलियां मारकर की थी हत्या:मां बोली- 23 साल से गिरफ्तारी का कर रही थी इंतजार; अब पुलिस को खुली नींद

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 28 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
'मेरे दो बेटों को 20 गोलियां मारकर की थी हत्या:मां बोली- 23 साल से गिरफ्तारी का कर रही थी इंतजार; अब पुलिस को खुली नींद

“हमारे दोनों बेटों को 23 साल पहले घर के दरवाजे पर 20 गोलियां मारकर हत्या कर दी थी। इसमें गनौरी यादव तो अरेस्ट हो गया है, लेकिन बाकी बचे 3 आरोपियों को पुलिस कब तक पकड़ेगी? 23 साल से हम यही इंतजार कर रहे हैं। अब भगवान से ही न्याय की उम्मीद है।” यह कहना है मृतक पूना यादव और डीपी यादव के मां संसार देवी की।

इस डबल मर्डर केस में पुलिस ने 23 साल बाद गनौरी को गिरफ्तार किया है। लेकिन परिवार का सवाल है- तीन नामजद और आरोपी- मकेश्वर यादव, महेश यादव और बंदा यादव अब भी फरार है। बता दें कि जमुई में 19 सितंबर को नाबालिग छात्रा से छेड़खानी हुई थी। इस मामले में मुख्य आरोपी ननंद यादव था। इसको 22 सिंतबर को पुलिस ने एनकाउंटर के बाद अरेस्ट किया था।

इस दौरान पुलिस को सूचना मिली कि नंनद के पिता गनौरी पर भी हत्या का केस दर्ज है। इसके बाद पुलिस ने गनौरी की तलाश शुरू की और 10 घंटे के अंदर उसे भी अरेस्ट किया। गांव की तस्वीरें देखिए….

अब सिलसिलेवार तरीके से पढ़िए पूरी खबर… अपनी आंखों के सामने जवान बेटों को मरते देखा दैनिक भास्कर की टीम जमुई छेड़खानी कांड के बाद लगातार आरोपियों के गांव पहुंच रही है। यहां ग्रामीण से बात करने के दौरान अलग-अलग कहानियां मिली। गांव में घूमते हुए हमारी टीम एक झुग्गी झोपड़ी में पहुंची, जहां 70-80 साल के बुजुर्ग पति-पत्नी बैठे थे। हमारे पहुंचते ही उन्होंने कहा कौन है- आपलोगों को क्या चाहिए?

इसपर हमने कहा- आपके मृत बेटों की कहानी जानने आए हैं। इतना सुनते ही संसार देवी रोना शुरू कर दीं। संसार देवी कहती हैं, 'साल 2003 की घटना है। मेरे पति दूध-दही बेचने के लिए बाहर गए थे। मैं गोहाल में काम कर रही थी। वहीं, मेरे दोनों बेटे घर के पास ही अपने काम में लगे थे। एक बेटा दूध दुह रहा था, दूसरा भैंस को चारा दे रहा था।

तभी अचानक से तड़-तड़-तड़ गोलियां चलने की आवाज आई। मैं जब तक गोहाल के बाहर निकली, तब तक मेरे दोनों बेटे खून से लथपथ जमीन पर गिरे थे। मुझे समझ नहीं आ रहा था, मैं क्या करूं। उस जमाने में फोन भी नहीं होता था, जैसे-तैसे लोगों की मदद से अपने पति को घटना की सूचना दी। वो भागे-भागे घर पहुंचे, तब तक दोनों जवान बेटे की मौत हो चुकी थी।

20 गोलियां का दाग पूरे शरीर पर था मुझे आज भी याद है। दोनों बेटों के शरीर पर गोलियों के निशान थे। आरोपियों ने 20 गोलियां चलाई थीं। इसके बाद से मैं और मेरे पति अजीत यादव लगातार अपने बेटों को न्याय दिलाने के लिए थाने-थाने भटक रहे थे। आरोपियों की गिफ्तारी के आस में साल गुजरते गए। लोग बदले, पुलिस बदली, लेकिन परिवार का इंतजार खत्म नहीं हुआ।

उसके बाद से हमलोग अकेले जिंदगी गुजार रहे हैं। हमें बुढ़ापे में भी देखने वाला कोई नहीं है। ‘पोते का चेहरा तक नहीं देख सकी’ दो बेटों को खोने का दर्द सिर्फ संसार देवी तक सीमित नहीं रहा। इस घटना ने आने वाली पीढ़ी को भी प्रभावित किया। संसार देवी बताती हैं, मेरे दोनों बेटों की शादी हो चुकी थी।

एक बेटे की पत्नी घटना के समय गर्भवती थी, लेकिन घटना के बाद से हमारे परिवार में डर था कि वो लोग इस वंश को भी न खत्म कर दें। इसी वजह से हमारी बड़ी बहू कभी घर लौटी ही नहीं। संसार देवी कहती हैं कि मैं आज तक अपने पोते का चेहरा नहीं देख पाई हूं। एक दादी के लिए इससे बड़ा दर्द और क्या होगा? 23 साल तक एक सवाल साथ रहा- बेटों के हत्यारे कब पकड़े जाएंगे?

संसार देवी की जिंदगी में पिछले 23 साल सिर्फ समय गुजरने के साल नहीं थे। हर साल उनके लिए एक ही सवाल लेकर आया- क्या मेरे बेटों की हत्या में शामिल लोग कभी पकड़े जाएंगे?

परिवार के मुताबिक, इस मामले में छह लोगों को नामजद किया आरोपी बनाया था। इनमें गनौरी यादव भी शामिल था, लेकिन मामला आगे बढ़ता रहा और आरोपी एक-एक करके अलग-अलग स्थिति में पहुंचते गए। दशरथ यादव को अदालत से सजा हुई और वह अपनी सजा पूरी कर चुका है। गुलेश्वर यादव की मौत हो चुकी है। अब गनौरी यादव की गिरफ्तारी हुई है। संसार देवी ने बताया कि हमें इस बात की तसल्ली है कि इतने साल बाद कम से कम एक आरोपी पुलिस की गिरफ्त में आया है, लेकिन मैं इसे अंतिम न्याय नहीं मानती हूं। मेरी मांग है कि मकेश्वर यादव उर्फ माको, महेश यादव और बंदा यादव को भी गिरफ्तार किया जाए। 23 साल से फरार तीनों आरोपी कहां हैं?

गनौरी की गिरफ्तारी के बाद सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि माको, महेश और बंदा पिछले 23 साल से कहां है?

स्थानीय स्तर पर इन आरोपियों के अलग-अलग जगहों पर रहने की चर्चाएं हैं। कुछ ग्रामीणों के बीच यह भी चर्चा है कि वे झारखंड और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाकों में पहचान बदलकर रह रहे हैं। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि लंबे समय से फरार रहने वाले आरोपी स्थानीय स्तर पर किसी के संरक्षण में रहे होंगे।

हालांकि, पुलिस की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि ये तीनों कहां हैं, किन लोगों के संपर्क में है और इतने सालों तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर कैसे रहे। परिवार के मुताबिक, दोनों भाइयों की हत्या के पीछे जमीन विवाद था। बता दें कि इस मामले में नंदन की मां ने कहा था, “मेरे बेटे ने गलती की है तो कानून के मुताबिक सजा दें, मुझे मंजूर है।

उसे जेल में रखें, लेकिन उसकी जान नहीं जानी चाहिए। सरकार से मेरी यही मांग है कि मेरे बेटे की जिंदगी बचाई जाए और मुझे उसकी हालत और इलाज की जानकारी दी जाए।” नंदन यादव की मां ने बताया, अपने बेटे से एक बार मिलना चाह रही है, लेकिन उनका आरोप है कि पुलिस उन्हें अपने बेटे से न मिलने दे रही है, न ही उसकी तस्वीर दिखा रही है।

‘मेरे बेटे के साथ कुछ हुआ तो पुलिस जिम्मेदार होगी’ नंदन की मां से जब भास्कर की टीम ने बात की तो उनकी सबसे पहली चिंता बेटे की सुरक्षा को लेकर थी। उन्होंने कहा, हमें अपने बेटे से मिलना है। उसकी हालत जाननी है। उसे देखना चाहते हैं कि उसका इलाज हो रहा है या नहीं। चोट कहां लगी है, यह भी देखना चाहते हैं।

वहीं, मां ने पुलिस के गांव पहुंचने की पूरी घटना भी बताई। कहा- 21 सितंबर की दोपहर पुलिस हमारे गांव पहुंची थी। इस दौरान अपने घर में कमरे में सो रही थी। पुलिस आई और अचानक से पूछना शुरू कर दिया, आपका बेटा नंदन कहां है?

जब मैंने उनसे पूछा- क्यों क्या हुआ है?

इसके बाद मैंने पुलिस को बताया कि वह गांव में कहीं गया होगा। दोस्तों के साथ घूम रहा होगा। इसके बाद पुलिस ने कथित तौर पर कहा कि बेटे को जल्दी बुलाओ, नहीं तो परिवार के लोगों को थाने ले जाया जाएगा। जब मैंने पुलिस से पूछा कि आखिर मामला क्या है, तब पुलिस ने मुझे घटना से जुड़ा वीडियो दिखाया। इस दौरान मैं कुछ बोलने लायक नहीं रही। मैं फोन नहीं चलाती हूं, इसी वजह से मुझे घटना के बारे नहीं पता चल सका। करीब आधे घंटे तक पुलिस मेरे घर पर मौजूद रही। फिर उनलोगों ने मेरी प्रेग्नेंट बहू और मुझे अपने साथ थाना ले गई। हम दोनों को करीब 10 घंटे से ज्यादा समय तक पुलिस थाने में रखा गया।

📡 स्रोत: NewsData.io

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