महिलाओं के साथ छलावा, महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने पर महिलाओं में नाराज़गी, बिल गिरने के बाद सोशल मीडिया पर सरकार के खिलाफ फूटा गुस्सा
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131वें संविधान संशोधन विधेयक, 2026 और उससे जुड़े परिसीमन के मुद्दे के बीच महिला आरक्षण को जोड़ने को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। इस फैसले को लेकर कई वर्गों में नाराज़गी देखी जा रही है, खासकर महिलाओं के बीच इसे लेकर असंतोष खुलकर सामने आया है।
सरकार की ओर से यह कहा गया था कि महिला आरक्षण लागू करने से पहले सीटों का पुनर्निर्धारण यानी परिसीमन जरूरी है। लेकिन आलोचकों का कहना है कि इससे महिला आरक्षण को सीधे लागू करने के बजाय उसे भविष्य की प्रक्रिया से जोड़ दिया गया। विधेयक के पारित न हो पाने के बाद यह मुद्दा और ज्यादा चर्चा में आ गया है।
सोशल मीडिया पर भी इसको लेकर प्रतिक्रिया तेज रही। नीलम ने X पर लिखा कि “महिलाओं के अधिकार को फिर टाल दिया गया है, जबकि इसे तुरंत लागू किया जा सकता था।” कविता ने फेसबुक पर अपनी पोस्ट में कहा कि “आरक्षण को शर्तों में बांधना सही नहीं है।” वहीं रचना ने लिखा कि “सरकार की नीयत पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि जो अधिकार अभी मिल सकता था, उसे भविष्य से जोड़ दिया गया।”
विशेषज्ञों का मानना है कि महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ना एक जटिल प्रक्रिया बना देता है, क्योंकि परिसीमन खुद जनगणना और अन्य संवैधानिक प्रक्रियाओं पर निर्भर करता है। ऐसे में इसके लागू होने में देरी की आशंका बनी रहती है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या महिला आरक्षण को सीधे लागू करने का कोई विकल्प नहीं था, या फिर इसे जानबूझकर लंबी प्रक्रिया से जोड़ा गया।
फिलहाल, विधेयक के गिरने के बाद यह मुद्दा फिर से बहस के केंद्र में आ गया है और आने वाले समय में इस पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा जारी रहने की संभावना है।