मोदी सरकार ने कैंसर की दवाएं सस्ती कर मरीजों को दी राहत, सुक्खू सरकार के कुप्रबंधन से हिमाचल के रोगी आहत: राकेश शर्मा
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नवंबर 03, कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश): भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता राकेश शर्मा ने हिमाचल प्रदेश में कैंसर मरीजों को समय पर दवाएं और उपचार सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने की शिकायतों को लेकर प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार जीवनरक्षक दवाओं की कीमतें कम करके कैंसर रोगियों को आर्थिक राहत पहुंचाने का प्रयास कर रही है, वहीं दूसरी ओर हिमाचल प्रदेश में मरीजों को दवाओं की अनुपलब्धता, उपचार में देरी और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
राकेश शर्मा ने कहा कि कैंसर के मरीज पहले ही गंभीर बीमारी से लड़ रहे हैं, ऐसे में उन्हें दवाओं और उपचार की व्यवस्था के लिए भी संघर्ष करना पड़े, यह अत्यंत चिंताजनक है। सरकार का पहला दायित्व है कि गंभीर रोगियों को समय पर उपचार और आवश्यक दवाएं उपलब्ध हों। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा कैंसर की दवाओं की कीमतों में की गई कटौती से मरीजों को महत्वपूर्ण आर्थिक राहत मिलने की जानकारी सामने आई है।
उपलब्ध विवरण के अनुसार 543 में से 397 कैंसर दवाओं के दामों में कटौती दर्ज की गई है, जिनमें कुछ दवाओं की कीमतें 93 प्रतिशत तक कम होने का दावा किया गया है। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि पाल्बोसिक्लिब (125 एमजी) की कीमत ₹40,421 से घटकर ₹2,730 और थायोटेपा (100 एमजी) की कीमत ₹80,072 से घटकर ₹7,150 होने का विवरण सामने आया है।
उन्होंने कहा कि इन मूल्य कटौतियों का वास्तविक लाभ प्रत्येक पात्र मरीज तक पहुंचना चाहिए। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि केंद्र सरकार के स्तर पर दवाओं को सस्ता करने का उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में वे दवाएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हों। उन्होंने आरोप लगाया कि हिमाचल प्रदेश में कई कैंसर मरीजों को आयुष्मान भारत और हिमकेयर जैसे स्वास्थ्य कार्ड होने के बावजूद कीमोथेरेपी तथा महंगी दवाओं की उपलब्धता को लेकर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
मरीजों को बाहर के निजी मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदने की नौबत आने की शिकायतें गंभीर हैं और इनकी तत्काल जांच होनी चाहिए। राकेश शर्मा ने कहा कि गंभीर बीमारी का उपचार केवल चिकित्सा संबंधी चुनौती नहीं, बल्कि पूरे परिवार के लिए आर्थिक और मानसिक संघर्ष भी होता है। कैंसर जैसी बीमारी में दवाओं की नियमित उपलब्धता और उपचार की निरंतरता अत्यंत आवश्यक है।
यदि किसी मरीज को दवा नहीं मिलने के कारण उपचार टालना पड़े या परिवार को निजी बाजार से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ें, तो इसका सीधा असर उसकी आर्थिक स्थिति पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार को अस्पतालवार यह जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए कि कैंसर उपचार के लिए कौन-कौन सी दवाएं उपलब्ध हैं, किन दवाओं की आपूर्ति लंबित है, कितने मरीजों को स्वास्थ्य योजनाओं के अंतर्गत उपचार दिया जा रहा है और दवाओं की खरीद तथा भुगतान की वर्तमान स्थिति क्या है।
राकेश शर्मा ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में सामने आ रही अन्य समस्याओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकारी अस्पतालों में जांच सेवाओं के प्रभावित होने तथा सेवा प्रदाताओं के भुगतान लंबित होने की खबरें भी चिंता का विषय हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वित्तीय अथवा प्रशासनिक विवादों का बोझ मरीजों पर न पड़े।
उन्होंने आपदा पुनर्निर्माण के लिए केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत लगभग ₹2,006.40 करोड़ की सहायता का उल्लेख करते हुए कहा कि भाजपा पहले भी इन संसाधनों के उपयोग में पारदर्शिता की मांग करती रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुनर्निर्माण कार्यों और ठेकों के आवंटन से संबंधित शिकायतों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि आपदा पुनर्निर्माण सहायता का उपयोग स्वीकृत मदों और निर्धारित वित्तीय नियमों के अनुसार ही किया जाना चाहिए। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में सरकार की प्राथमिकता दवाओं की उपलब्धता, समयबद्ध भुगतान, अस्पतालों में पर्याप्त सुविधाएं और गंभीर रोगियों के उपचार की निरंतरता होनी चाहिए।
उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से मांग की कि कैंसर मरीजों को आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए तत्काल विशेष समीक्षा की जाए और जिन अस्पतालों में आपूर्ति अथवा भुगतान संबंधी समस्याएं हैं, उनका समयबद्ध समाधान किया जाए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा दवाओं की कीमतों में दी गई राहत का पूरा लाभ हिमाचल प्रदेश के कैंसर मरीजों तक पहुंचाना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है।
मरीजों को उपचार के लिए भटकना न पड़े, दवाओं की कमी के कारण इलाज प्रभावित न हो और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को अतिरिक्त बोझ न उठाना पड़े, इसके लिए सरकार को तत्काल प्रभावी कदम उठाने चाहिए।