मोहल्ले से कॉलेज तक नशे का जाल?
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गांजे के कथित कारोबारियों पर पुलिस का शिकंजा, सवाल—कौन पहुंचा रहा युवाओं तक नशा? भोपाल।
नशे के खिलाफ कार्रवाई के बीच सामने आई गांजा तस्करी की यह कहानी सिर्फ डेढ़ किलो गांजे की बरामदगी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस नेटवर्क पर गंभीर सवाल खड़े करती है जो कथित तौर पर मोहल्लों से लेकर कॉलेज परिसरों के आसपास तक नशे की पहुंच बना रहा है।
रातीबड़ पुलिस ने मुगालिया छाप रोड स्थित नीलजी नदी के पास घेराबंदी कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक आरोपियों के कब्जे से 1.5 किलो गांजा, मोटरसाइकिल और मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। जब्त सामान की कीमत करीब 1.50 लाख रुपए बताई गई है। ओडिशा से भोपाल तक सप्लाई का दावा
पुलिस के अनुसार पूछताछ में आरोपियों से गांजा ओडिशा से लाकर भोपाल में सप्लाई किए जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस का यह भी दावा है कि आरोपी कॉलेज छात्रों को गांजा बेचते थे।
यदि जांच में यह बात साबित होती है तो मामला महज अवैध नशे की बिक्री का नहीं, बल्कि युवा पीढ़ी को नशे की गिरफ्त में धकेलने वाले पूरे सप्लाई नेटवर्क का है। सबसे बड़ा सवाल—पीछे कौन? दो आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब असली सवाल यह है कि गांजा भोपाल तक कौन पहुंचाता था? सप्लाई का नेटवर्क कितना बड़ा है?
इसके खरीदार कौन हैं और किन इलाकों में नशे की सप्लाई की जा रही थी? पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ धारा 8/20 एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब निगाह इस बात पर है कि पूछताछ के बाद पुलिस इस कथित नेटवर्क की अगली कड़ी तक पहुंच पाती है या नहीं।
डेढ़ किलो गांजा बरामद होना कार्रवाई की शुरुआत है—असली काम उस नेटवर्क तक पहुंचना है, जो युवाओं तक नशा पहुंचाने की कोशिश कर रहा है।
🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत
नशे की लहर मोहल्लों से कॉलेजों तक पहुँच रही है, परंतु यह केवल अपराध नहीं, बल्कि समाज की अनदेखी का भी प्रतिबिंब है। हमें युवाओं को जागरूक करने के लिए शिक्षा, खेल और कला के माध्यम से सकारात्मक विकल्प उपलब्ध कराने चाहिए। परिवार और शिक्षकों को मिलकर सहानुभूति और संवाद बढ़ाना चाहिए, ताकि नशे की जड़ को मिटाया जा सके। इस संघर्ष में पीड़ितों के प्रति संवेदना और उनके लिए पुनर्वास के रास्ते बनाना अनिवार्य है।