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मोहम्मद रिजवान को कोर्ट से बड़ा झटका, याचिका खारिज; क्या बर्बाद होगा करियर?

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 24 सितंबर 2026 👁️ 1 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
मोहम्मद रिजवान को कोर्ट से बड़ा झटका, याचिका खारिज; क्या बर्बाद होगा करियर?

मोहम्मद रिजवान की पाकिस्तान की राष्ट्रीय साइबर अपराध जांच एजेंसी (NCCIA) के नोटिस के खिलाफ याचिका लाहौर हाई कोर्ट ने खारिज कर दी.

एनसीसीआईए इस समय रिजवान और इमाम के मोबाइल की फोरेंसिक जांच करा रही है. अगले हफ्ते तक ये रिपोर्ट पीसीबी को सौंपी जाएगी. बता दें कि एजेंसी ने रिजवान और इमाम उल हक के खिलाफ नोटिस जारी किया था.

दोनों उन 7 खिलाड़ियों में शामिल थे, जिन्हें इंग्लैंड दौरे के बीच पीसीबी ने टीम से बाहर कर वापस घर भेज दिया था.

गुरुवार को हुई सुनवाई के बाद लाहौर हाई कोर्ट ने मोहम्मद रिजवान की याचिका खारिज कर दी.

वकील काजी उमैर अली रिजवान के वकील थे, जिनकी दलील सुनने के बाद चीफ जस्टिस आलिया नीलम ने फैसला सुनाया. उन्होंने कहा कि, "आपको जाकर नोटिस का जवाब देना चाहिए."

मोहम्मद रिजवान को ये नोटिस कब जारी हुए?

इसका जवाब देते हुए रिजवान के वकील ने बताया कि लॉर्ड्स टेस्ट के बाद उन्हें होटल की लॉबी में बुलाया गया. उनसे पूछताछ हुई और फिर फोन ले लिया गया. बताया गया था कि 3 घंटे बाद फोन वापस मिल जाएगा, लेकिन फोन नहीं दिया गया.

रिजवान के वकील ने तर्क दिया कि आईसीसी की एंटी करप्शन यूनिट को शामिल करना चाहिए था. उन्होंने नोटिस पर सवाल उठाते हुए कहा कि ये एनसीसीआईए का मामला नहीं है.

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अभी जो खबर है उसके अनुसार एनसीसीआईए मोबाइल की फोरेंसिक जांच करके अगले हफ्ते तक पीसीबी को रिपोर्ट भेज सकता है. इसके बाद ही तय होगा कि रिजवान और इमाम को राहत दी जाए या सजा.

पाकिस्तान ने हाल ही में इंग्लैंड के हाथों टेस्ट सीरीज 0-3 से गंवाई.

लॉर्ड्स में हुए दूसरे टेस्ट के बाद पीसीबी ने मोहम्मद रिजवान समेत 7 खिलाड़ियों को टीम से बाहर कर दिया था.

इमाम उल हक पर भी सवाल उठे, जो मामूली चोट के कारण लॉर्ड्स की दोनों पारियों में बल्लेबा

📡 स्रोत: ABP Live Khel

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💡 पृष्ठभूमि (Background)

मोहम्मद रिजवान पर पाकिस्तान की राष्ट्रीय साइबर अपराध जांच एजेंसी (NCCIA) द्वारा मोबाइल फोरेंसिक जांच के बाद नोटिस जारी किया गया था, जिसे उन्होंने अदालत में चुनौती दी। लाहौर हाई कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी, जिससे उनके करियर पर गहरा असर पड़ सकता है। यह मामला खेल और कानून के बीच टकराव को दर्शाता है, जहां खिलाड़ी की व्यक्तिगत गोपनीयता और सार्वजनिक हित दोनों का सवाल उठता है। यदि रिजवान को दंडित किया जाता है तो यह क्रिकेट जगत में अनुशासन और नैतिकता पर प्रकाश डालेगा, और आम जनता को डिजिटल साक्ष्य क

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