विदेश

मोरबी में प्राचीन परंपरा और आधुनिकता का संगम: शक्तिचौक गरबी मंडल का प्रसिद्ध 'अंगारा रास' बना मुख्य आकर्षण

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 13 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
मोरबी में प्राचीन परंपरा और आधुनिकता का संगम: शक्तिचौक गरबी मंडल का प्रसिद्ध 'अंगारा रास' बना मुख्य आकर्षण

Date- 13 octomber 2026

नवरात्रि के दौरान आधुनिक उत्सवों के बीच मोरबी के शक्तिचौक सहित अन्य गरबी मंडलों ने आज भी प्राचीन पारंपरिक रासोत्सव को जीवित रखा है। यहाँ बेटियाँ और कुमारिकाएँ महीनों के प्रशिक्षण के बाद विभिन्न लोकरास प्रस्तुत करती हैं। शक्तिचौक गरबी मंडल में सौराष्ट्र-कच्छ में सबसे पहले शुरू हुआ अंगारा रास विशेष आकर्षण बना हुआ है, जिसमें बालिकाएँ जलते हुए अंगारों पर मशाल के साथ रास प्रस्तुत करके शक्ति, भक्ति और संस्कृति का अनोखा संगम दर्शाती हैं।

M
Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।