मृतक कर रहे मजदूरी!:मुरैना की इमलिया पंचायत में जॉब कार्ड, भुगतान रिकॉर्ड और निर्माण कार्यों की ग्राउंड पड़ताल में खुलीं गड़बड़ी की परतें
मौत के बाद इंसान लौटकर नहीं आता, लेकिन मुरैना की इमलिया ग्राम पंचायत में कुछ लोग मृत्यू के बाद भी मनरेगा अब विकसित भारत- गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण (वीबी-जीरामजी) में मजदूरी कर रहे हैं। सरकारी रिकॉर्ड में वे आज भी मजदूरी से ‘मुक्त’ नहीं हो पाए हैं।
इनमें कुछ 15 साल पहले दुनिया छोड़ चुके तो कुछ 3-4 साल पहले। तालाब, सड़क और सीसी रोड के कामों में मजदूरी जॉब कार्ड में दर्ज होती रही, भुगतान होता रहा। रिकॉर्ड में तालाब, सड़क और सीसी रोड के निर्माण पर लाखों रुपए खर्च दिखाए गए। मजदूरों की हाजिरी लगी, भुगतान हुआ और काम की फोटो भी अपलोड की गईं।
दैनिक भास्कर ने जॉब कार्ड और भुगतान रिकॉर्ड लेकर गांव में एक-एक परिवार तक पहुंचकर पड़ताल की तो चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई। मृत लोगों के जॉब कार्ड न केवल वर्षों तक सक्रिय मिले, बल्कि कुछ कार्ड में उनकी मौत के बाद दूसरे नाम भी जुड़े मिले।
दूसरी ओर परिवारों का दावा है कि रिकॉर्ड में चाहे जितनी मजदूरी और भुगतान दिख रहा हो, उन्हें एक रुपया तक नहीं मिला। यही नहीं, एक युवती की शादी करीब 10 साल पहले हो चुकी है। वह इंदौर में अपने ससुराल में रहती है, लेकिन इमलिया के रिकॉर्ड में उसके नाम मजदूरी दर्ज है। ये चेहरे छोड़ चुके दुनिया...
कागजों में आज भी जिंदा जॉब कॉर्ड 2010 में दिलीप की मौत... 2026 जॉब कार्ड में अंतिम भुगतान है दर्ज 2023 में महाराज सिंह की मौत... बेटों के नाम भुगतान, पर उन्हें पता ही नहीं 2022 में दामोदर की मृत्यु... कार्ड में शुभम व विसन के नाम भुगतान 15 साल पहले लक्ष्मी का निधन...
सड़क-तालाब में मजदूरी दर्ज, पति बोले- एक रुपया नहीं मिला मुन्ना के जॉब कार्ड में उनकी पत्नी लक्ष्मी का नाम दर्ज था। परिवार के मुताबिक लक्ष्मी की 15 साल पहले मृत्यु हो चुकी है। इसके बाद भी सरकारी रिकॉर्ड में उनके नाम से सड़क और तालाब निर्माण में मजदूरी दर्ज मिली। बाद में इसी जॉब कार्ड में गुड्डी का नाम भी जोड़ दिया।
पति मुन्ना का कहना है कि परिवार को मजदूरी के नाम पर कभी कोई रुपया नहीं मिला है। यह है नियम: एक परिवार, एक जॉब कार्ड; बाहरी व्यक्ति का नाम जुड़ना अपराध एक परिवार का एक ही जॉब कार्ड बनता है। नंबर भी एक ही होता है। परिवार के मुखिया की मृत्यु हो जाती है तो उस परिवार में जो मुखिया होता है उसका नाम अपडेट होता है।
जॉब कार्ड का नंबर वही रहता है। यदि जॉब कार्ड में परिवार की जानकारी के बिना किसी बाहरी व्यक्ति का नाम जोड़ दिया है। उसके नाम से मजदूरी दर्ज हो रही है, तो धोखाधड़ी है। ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
सीधी बात - कमलेश भार्गव, सीईओ जिला पंचायत मुरैना Q इमलिया गांव में मृत लोग मजदूरी कर रहे हैं? उनके जॉब कार्ड से पैसा निकाला जा रहा है। यह कैसे हो रहा है? जवाब: अगर ऐसा हो रहा है तो यह गलत है। मैं टीम बनाकर पूरे मामले की जांच करवाऊंगा। Q जिन लोगों की मौत हो चुकी, उनके जॉब कार्ड तत्काल निरस्त होने चाहिए या नहीं?
जवाब: हां, मृत लोगों के जॉब कार्ड तत्काल निरस्त होने चाहिए। Q इस गड़बड़ी-भ्रष्टाचार के लिए कौन जिम्मेदार है? जवाब: इसमें सरपंच, सचिव या अन्य लोग भी जिम्मेदार हो सकते हैं। जांच के बाद ही साफ होगा कि दोषी कौन है। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
सरपंच ने कहा- मैं बीमार हूं, अभी खबर मत छापिए ग्राम पंचायत इमलिया की सरपंच गुड्डी बघेल के पति राकेश बघेल से दैनिक भास्कर ने पूछा कि आपकी पंचायत में मृत लोगों के जॉब कार्ड अभी तक क्यों सक्रिय हैं। उनके नाम से मनरेगा में मजदूरी दर्ज हो रही है? इस पर राजेश ने कहा- ऐसा नहीं है। मैं बीमार हूं, इलाज कराने जा रहा हूं।
लौटकर मिलूंगा। अभी खबर मत छापिए।
📡 स्रोत: NewsData.io