मृत्युदंड देने के तरीके को बदलने की मांग SC ने खारिज की

अगस्त 18, नई दिल्ली: मृत्युदंड देने के तरीके को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें फांसी देकर मौत देने की मौजूदा व्यवस्था खत्म करने और उसकी जगह कम पीड़ादायक विकल्प अपनाने की मांग की गई थी। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि याचिका खारिज करने का मतलब यह नहीं है कि केंद्र सरकार मौजूदा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा नहीं कर सकती। केंद्र चाहे तो विशेषज्ञ समिति बनाकर यह जांच करा सकता है कि मृत्युदंड देने का कौन-सा वैकल्पिक तरीका दोषी को अनावश्यक पीड़ा से बचाने और उसकी गरिमा बनाए रखने के संवैधानिक उद्देश्य को बेहतर तरीके से पूरा करता है।मार्च 2023 में भी सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर विशेषज्ञ समिति गठित करने की संभावना जताई थी और केंद्र से बेहतर आंकड़े मांगे थे। हालांकि अदालत ने यह साफ किया था कि वह विधायिका को मृत्युदंड देने का कोई खास तरीका अपनाने का निर्देश नहीं दे सकती। वहीं, केंद्र सरकार पहले ही फांसी के मौजूदा प्रावधान का समर्थन कर चुकी है। 2018 में केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि घातक इंजेक्शन और गोली मारने जैसे तरीके जरूरी तौर पर कम पीड़ादायक नहीं हैं। गृह मंत्रालय ने फांसी को त्वरित और सरल तरीका बताते हुए कहा था कि इससे कैदी की पीड़ा अनावश्यक रूप से नहीं बढ़ती।
फोटो- सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)