MSP पर बाजरा खरीद की मांग, 5 को प्रदर्शन
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भारतीय किसान संघ ने राजस्थान सरकार से बाजरे की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद शुरू करने की मांग की है। संघ के अनुसार 5 अक्टूबर को प्रदेश की 160 तहसीलों में धरना-प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपे जाएंगे।
जयपुर, 3 अक्टूबर। भारतीय किसान संघ ने राजस्थान सरकार से बाजरे की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद शुरू करने की मांग की है। संघ ने मांग पूरी नहीं होने पर प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है।
जयपुर स्थित प्रदेश कार्यालय में प्रांत अध्यक्ष कालूराम बागड़ा ने कहा कि मंडियों में किसानों का बाजरा करीब 2 हजार रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर बिक रहा है, जबकि केंद्र सरकार की ओर से बाजरे का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,900 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। संघ ने सरकार से किसानों को MSP का लाभ दिलाने की मांग की है।
प्रांत महामंत्री डॉ. सांवर मल सोलेट ने कहा कि राजस्थान देश के प्रमुख बाजरा उत्पादक राज्यों में है। उन्होंने बाजरे के निर्यात को बढ़ावा देने और किसानों को बेहतर मूल्य उपलब्ध कराने की मांग की। साथ ही उन्होंने हरियाणा की तर्ज पर किसानों को भावांतर देने अथवा समर्थन मूल्य पर खरीद की व्यवस्था करने की बात कही।
प्रदेश उपाध्यक्ष छोगालाल सैनी ने बताया कि MSP पर बाजरा खरीद की मांग को लेकर 5 अक्टूबर को जयपुर प्रांत की सभी 160 तहसीलों में तहसील मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपे जाएंगे।
इस अवसर पर प्रांत मंत्री श्रीचंद सिद्ध, जिलाध्यक्ष लक्ष्मीनारायण यादव, जिला मंत्री डॉ. लोकेश कुमार चन्देल सहित संगठन के अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
💡 पृष्ठभूमि (Background)
राजस्थान में किसान संघ ने बाजरे के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद की मांग की है, ताकि किसान अपनी फसल का उचित मूल्य पा सकें। यह कदम बाजरे के प्रमुख उत्पादन क्षेत्र में किसानों की आय सुरक्षा के लिये उठाया गया है। खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि MSP से किसानों की आय में स्थिरता आती है और कृषि क्षेत्र में असमानता घटती है। यदि सरकार मांग को न मानती है तो 5 अक्टूबर को 160 तहसीलों में धरना-प्रदर्शन हो सकता है, जिससे राजमार्ग, स्कूल और अस्पताल जैसी सार्वजनिक सेवाएँ प्रभावित हो सकती हैं, और किसानों को बाजा
🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत
किसान की मांग को शांतिपूर्ण संवाद और नीति-निर्माण के माध्यम से सुलझाना समाज की समृद्धि का आधार है। जब किसान अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाते हैं, तो सरकार और समाज को सहानुभूति के साथ सुनना चाहिए, न कि संघर्ष से। सहमति, पारदर्शिता और न्यायपूर्ण समर्थन मूल्य से न केवल कृषि क्षेत्र मजबूत होगा, बल्कि ग्रामीण-शहरी संबंधों में भी विश्वास और सहयोग बढ़ेगा।