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मुजफ्फरपुर में हाईटेंशन तार की चपेट में आने से झुलसीं तीन छात्राएं, परिजनों का फूटा गुस्सा; सड़क जाम कर मांगा मुआवजा

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 17 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
मुजफ्फरपुर में हाईटेंशन तार की चपेट में आने से झुलसीं तीन छात्राएं, परिजनों का फूटा गुस्सा; सड़क जाम कर मांगा मुआवजा

मिथिला हिन्दी न्यूज | रोहित कुमार सोनू, संपादक मुजफ्फरपुर: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के अहियापुर थाना क्षेत्र में स्थित उच्च माध्यमिक विद्यालय शाहबाजपुर में हाईटेंशन बिजली तार की चपेट में आने से तीन छात्राओं के झुलसने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। घायल बच्चियों के समुचित इलाज, सरकारी सहायता और मुआवजे की मांग को लेकर परिजनों और सैकड़ों ग्रामीणों ने सड़क पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन किया।

आक्रोशित लोगों ने अहियापुर चौक के पास विद्यालय के सामने मुख्य सड़क को जाम कर दिया, जिससे सड़क पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और आवागमन प्रभावित हुआ। सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर स्थिति को नियंत्रित किया। जानकारी के अनुसार, 9 अक्टूबर को सुबह करीब 10 बजे विद्यालय में भोजनावकाश के दौरान छात्राएं खाना खाने के लिए छत पर गई थीं।

इसी दौरान छत के बेहद करीब से गुजर रही 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन बिजली लाइन के कारण दीवार में करंट फैल गया। दीवार के संपर्क में आते ही तीन छात्राएं करंट की चपेट में आकर बुरी तरह झुलस गईं। हादसे के बाद घायल छात्राओं को श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एसकेएमसीएच) में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

बताया जा रहा है कि एक छात्रा की हालत अब भी नाजुक बनी हुई है। घटना के बाद छात्राओं के परिजनों और ग्रामीणों में विद्यालय प्रबंधन के प्रति नाराजगी देखी जा रही है। प्रदर्शनकारियों ने स्कूल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के दावे के अनुसार, हादसे के बाद बच्चियों के हाथ-पैर बुरी तरह झुलस गए थे, लेकिन विद्यालय का गेट तुरंत नहीं खोला गया।

परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि परिसर में वाहन मौजूद होने के बावजूद घायल छात्राओं को अस्पताल पहुंचाने के लिए उसका इस्तेमाल नहीं किया गया। इसके बाद ग्रामीणों ने ऑटो की मदद से बच्चियों को अस्पताल पहुंचाया। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी है। प्रदर्शन कर रहे लोगों की प्रमुख मांग है कि घायल छात्राओं को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए और उनके इलाज का खर्च उठाने के लिए सरकार की ओर से आर्थिक सहायता दी जाए।

इसके साथ ही पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा देने की मांग भी उठाई गई। ग्रामीणों ने विद्यालय की छत के बेहद करीब से गुजर रही 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन को तत्काल हटाने की मांग करते हुए कहा कि बच्चों की सुरक्षा के साथ किसी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। लोगों का कहना है कि यदि बिजली लाइन को लेकर पहले से सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए होते, तो इस तरह की घटना को रोका जा सकता था।

प्रदर्शन की सूचना मिलने पर जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) मौके पर पहुंचे और मामले की जानकारी ली। उन्होंने परिजनों को भरोसा दिलाया कि घटना की जांच कराई जाएगी और जांच में जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों की ओर से परिजनों की लिखित शिकायत लेने की प्रक्रिया भी शुरू की गई।

साथ ही घायल छात्राओं के इलाज और उनके भविष्य के लिए हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया। वहीं, अहियापुर थानाध्यक्ष शरत कुमार ने बताया कि करीब एक सप्ताह पहले सरकारी विद्यालय में छात्राएं करंट से झुलस गई थीं। घायल बच्चियों के समुचित इलाज की मांग को लेकर परिजनों और ग्रामीणों ने सड़क जाम किया था।

पुलिस और प्रशासन की टीम ने मौके पर पहुंचकर लोगों से बातचीत की, जिसके बाद जाम हटा दिया गया। फिलहाल मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है। इस घटना ने एक बार फिर सरकारी विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा, बिजली के खतरनाक तारों की स्थिति और प्रशासनिक निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्कूलों के आसपास या परिसर के ऊपर से गुजरने वाली हाईटेंशन बिजली लाइनों के मामले में समय रहते सुरक्षा उपाय करना जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी बच्चे को इस तरह की दुर्घटना का सामना न करना पड़े। मिथिला हिन्दी न्यूज | संपादक: रोहित कुमार सोनू

📡 स्रोत: NewsData.io

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