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मुख्य चुनाव आयुक्त के विरोध में वामपंथी दलों का प्रदर्शन:प्रदर्शनकारियों ने मुरादाबाद में रेलवे स्टेशन से कलेक्ट्रेट तक मार्च निकाला

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 8 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
मुख्य चुनाव आयुक्त के विरोध में वामपंथी दलों का प्रदर्शन:प्रदर्शनकारियों ने मुरादाबाद में रेलवे स्टेशन से कलेक्ट्रेट तक मार्च निकाला

मुरादाबाद में बुधवार को वामपंथी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को बर्खास्त करने की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट पर जोरदार प्रदर्शन किया। 'वामपंथी मोर्चा' के बैनर तले एकजुट हुए कार्यकर्ताओं ने रेलवे स्टेशन से जिलाधिकारी कार्यालय तक शांति मार्च निकाला और राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा।

मुरादाबाद के सीपीआई, सीपीआई माले, सीपीआई एम और एसयूसीआई वामपंथी मोर्चों द्वारा यह विरोध प्रदर्शन चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाताओं के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए किया गया। प्रदर्शनकारियों ने रेलवे स्टेशन से गंज बाजार और गुरहट्टी होते हुए कलेक्ट्रेट तक मार्च निकाला। इस दौरान "मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को बर्खास्त करो", "एसआईआर प्रक्रिया पर रोक लगाओ" और "अवैध रूप से काटे गए वोट बहाल करो" जैसे नारे बुलंद किए गए।

वामपंथी नेताओं ने संयुक्त बयान में मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव आयोग के भीतर ही मुख्य चुनाव आयुक्त के कामकाज के तरीके पर गंभीर सवाल उठे हैं। आयोग के अन्य दो चुनाव आयुक्तों ने ही मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने और एसआईआर के संचालन से जुड़े कम से कम 14 अहम फैसलों पर अपनी असहमति दर्ज कराई है।

नेताओं का आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त के एकाधिकार और अपारदर्शी रवैये के कारण देश की चुनाव व्यवस्था पर जनता का भरोसा डगमगा रहा है। जिलाधिकारी के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति को भेजे गए ज्ञापन में मुख्य रूप से 6 मांगें उठाई गई 1 .

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके पद से तत्काल हटाया जाए। 2.

एसआईआर (SIR) की प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाई जाए और मतदाता सूची से हटाए गए वैध मतदाताओं के नाम वापस जोड़े जाएं। 3.

निर्वाचन आयोग की स्वतंत्र, निष्पक्ष और लोकतांत्रिक कार्यप्रणाली को बहाल किया जाए। 4.

चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े वर्ष 2023 के मौजूदा कानून को वापस लिया जाए। 5.

चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट के सुझाव के अनुसार बनी समिति से हो, जिसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) शामिल हों। 6.

दिल्ली में महिला प्रदर्शनकारियों और महिला पत्रकारों के साथ अभद्र व्यवहार करने वाले दोषी पुलिस अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज की जाए। इस विरोध मार्च का नेतृत्व मुख्य रूप से वामपंथी दलों के वरिष्ठ नेताओं ने किया। प्रदर्शन में सीपीआई से राम किशोर रस्तोगी, वाला कश्यप, भाकपा माले से रोहिताश राजपूत, लता सागर, सीपीआई(एम) से थान सिंह, चंद्रपाल सिंह आजाद, और एसयूसीआई से विजयपाल सिंह व अविनाश चंद्र सहित भारी संख्या में कार्यकर्ता शामिल रहे।

📡 स्रोत: NewsData.io

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