मुख्यमंत्री डॉ. यादव एकात्म धाम, ओंकारेश्वर में करेंगे भव्य पंचायतन मंदिर का शिलान्यास
जगतगुरू श्री आदि शंकराचार्य ने विभिन्न उपासना पद्धतियों के मध्य समन्वय स्थापित करने के लिए श्पंचायतन पूजनश् का पुनरुद्धार किया था। भगवत्पाद के इस युगांतरकारी योगदान को अक्षुण्ण रखने के उद्देश्य से श्एकात्म धामश् में इस भव्य मंदिर का निर्माण किया जा रहा है।
सनातन परंपरा में पंचदेव पूजा का मूल दर्शन विविध स्वरूपों के माध्यम से एक ही श्परम ब्रह्मश् की अनुष्ठानिक उपासना करना है। प्राचीन पंचायतन शैली पर आधारित इस मंदिर के केंद्र में भगवान शिव का मुख्य देवालय होगा। चारों कोनों पर उप-देवालय स्थित होंगे।
ईशान कोण में भगवान विष्णु, आग्नेय कोण में भगवान सूर्य, नैऋत्य कोण में भगवान गणेश और वायव्य कोण में भगवती शक्ति का स्थान नियत है। मुख्य देवालय का शिखर श्सोमतिलकश् शैली का होगा। मंदिर का गर्भगृह श्सर्वतोभद्रश् शैली में निर्मित है, जिसमें चारों दिशाओं से प्रवेश द्वार होंगे।
परिसर में 100 कलात्मक नक्काशीदार स्तंभ और 8 लघु श्संवर्णाश् (सामरण) स्थापित किए जाएंगे। भव्य तोरण-द्वार स्थापत्य की सुंदरता को द्विगुणित करेंगे। पंचायतन मंदिर के मुख्य मंडप में 26 फीट व्यास का एक विशाल कलात्मक गुंबद होगा, जो मंदिर की भव्यता का मुख्य आकर्षण बनेगा।
यह पूरा मन्दिर 16 फीट ऊँचे आधारभूत अधिष्ठान यानी श्जगतिश् पर टिका हुआ है। इसका बाह्य ऊर्ध्वाधर वास्तु-विन्यास (मंडोवर) भद्र, कर्ण, प्रतिरथ, देवकोष्ठ और अलंकृत पट्टिकाओं के क्रमबद्ध संयोजन से सजाया गया है। संपूर्ण मंदिर 121 कलशों से सुशोभित होगा।
इसके निर्माण में 80,000 घन फीट नक्काशीदार गुलाबी बलुआ पत्थर का उपयोग किया जा रहा है। पंचायतन मन्दिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि भारतीय प्राचीन वास्तुकला और मूर्तिकला के पुनरुत्थान का एक बेहतरीन उदाहरण भी पेश करता है।
यह मंदिर पारंपरिक नागर शैली में निर्मित किया जा रहा है, जो भारतीय स्थापत्य कला और सांस्कृतिक गरिमा का जीवंत प्रतीक होगा।