मुख्यमंत्री या तो सबूत दिखाएं, या फिर सार्वजनिक रूप से प्रदेश की जनता से माफी मांगें: राजेंद्र राणा
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नवंबर 05, हमीरपुर (हिमाचल प्रदेश): मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के 'बिकने' वाले आरोप पर अब मुख्यमंत्री खुद ही घिर गए हैं। प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ प्रवक्ता एवं सुजानपुर के पूर्व विधायक राजेंद्र राणा ने मुख्यमंत्री को ही लपेटते हुए सीधा हमला बोलते हुए कहा है कि अब मुख्यमंत्री या तो सबूत दिखाएं, या फिर सार्वजनिक रूप से प्रदेश की जनता से माफी मांगें।
उन्होंने कहा कि ढाई साल से मुख्यमंत्री हर मंच पर चिल्ला रहे हैं कि 9 विधायक बिक गए। जबकि पुलिस ने जांच पूरी कर ली है। कॉल डिटेल खंगालने और बैंक खाते जांचने के बाद एक रुपया भी अवैध नहीं पाया गया। फिर भी मुख्यमंत्री झूठ पर झूठ बोले जा रहे हैं। अगर अब भी झूठ पर कायम हैं, तो किसी अन्य जांच एजेंसी को भी बुलाकर तसल्ली कर लें।
जारी प्रेस विज्ञप्ति में राजेंद्र राणा ने कहा कि जो नेता मंच से झूठ बोलकर जनता को गुमराह करे, वो मुख्यमंत्री कहलाने लायक ही नहीं है। देहरा उपचुनाव को लेकर 'कैश फॉर वोट' का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि आचार संहिता के दौरान असंवैधानिक एवं गैर कानूनी तरीके से देहरा में 68 महिला मंडलों के खातों में कांगड़ा सहकारी बैंक से 50-50 हजार रुपए डाले।
हिमाचल के इतिहास में मुख्यमंत्री पद का ऐसा दुरुपयोग कभी नहीं हुआ। सरकार को जनता ने सरकारी खजाने का कस्टोडियन बनाया है, मालिक नहीं। जो जनता के टैक्स के पैसे को निजी समझकर सरकारी खाते से अपनी पत्नी को जिताने के लिए लुटाए। अगर मुख्यमंत्री को महिला मंडलों की ही फिक्र होती, तो प्रदेश के सभी महिला मंडलों को 50-50 हजार देते, न कि बंदरबांट करते।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हर जगह मंच से कहते हैं कि उन्होंने अपना सब कुछ कुर्बान कर दिया। जबकि ये सब बातें कोरी झूठ हैं। सच ये है कि हिमाचल की जनता पानी के लिए अपनी जमीन देकर दानवीर बन रही है और मुख्यमंत्री अपनी जमीन का मुआवजा लेकर दामवीर बने बैठे हैं। जो आदमी दान को भी धंधा बना दे, उसे त्यागी नहीं, सौदागर कहते हैं।
मंच पर कुर्बानी का भाषण और बैंक में मुआवजे का ट्रांजेक्शन ही सुक्खू मॉडल है। अगर मुख्यमंत्री अपनी जगह सही हैं तो श्वेत पत्र लाएं कि प्रदेश में सरकार को जमीन दान करने वाले कितने लोगों को मुआवजा दिया। चंबा में 15 हजार महिलाओं को 1500 रुपए की घोषणा करने पर उन्होंने सरकार से पूछा कि बाकी 28 लाख महिलाएं क्या हिमाचल की नहीं हैं?
जब प्रदेश की हर महिला से वादा किया था, तो अब सरकार मुकर क्यों रही है? उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बनने के बाद से ही प्रदेश पर 46 हजार करोड़ का नया कर्ज चढ़ा दिया है और लूटने का काम जारी है। शिमला के फागू में मुख्यमंत्री व उनके मित्रों की जमीनों में सरकारी खजाने से करोड़ों रुपए लेकर डंगे बना दिए।
सड़कों की मरम्मत को पैसा नहीं है और सरकारी ट्रेजरी पर ताला लगा है, जो चहेतों के लिए ही खुलता है। कर्मचारी तबका परेशान है और विकास कार्य पूरी तरह से ठप्प है, लेकिन मुख्यमंत्री को सिर्फ अपनी कुर्सी बचाने की चिंता है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री रोज झूठ बोले और रोज दूसरों पर कीचड़ उछाले, तो उससे साफ है कि उनका मानसिक संतुलन बिगड़ गया है।
उन्हें पहले अपना इलाज करवाना चाहिए। हिमाचल की जनता सब समझ चुकी है और सरकार की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। उन्होंने कहा कि सारे सबूत सहेजे जा रहे हैं। सरकार बदलने पर इनकी कुर्सी भी जाएगी और लूट का हिसाब भी पूरा लिया जाएगा।