मुरैना के किसान ने गेहूं-बाजरा के जगह अपनाया गेंदा:एक बीघा में की 55 हजार की कमाई, कम सिंचाई में भी बेहतर उत्पादन
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →खेती में बढ़ती लागत और पारंपरिक फसलों से सीमित आमदनी के बीच मुरैना जिले के जौरा तहसील के ग्राम कांसपुरा गुड आसान के 55 वर्षीय किसान बनवारी लाल कुशवाह ने खेती का तरीका बदलकर अपनी आय बढ़ाने की मिसाल पेश की है। कभी गेहूं और बाजरा की खेती करने वाले बनवारी लाल अब गेंदे की व्यावसायिक खेती कर रहे हैं।
एक बीघा में गेंदा उगाकर वे करीब 55 हजार रुपए का शुद्ध मुनाफा कमा चुके हैं। उनकी सफलता अब आसपास के किसानों को भी परंपरागत खेती के साथ नकदी फसलों का विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है। विभाग की सलाह से बदली खेती की दिशा करीब पांच साल पहले तक बनवारी लाल की खेती गेहूं और बाजरा तक सीमित थी।
मेहनत और लागत के मुकाबले आमदनी कम होने से उन्होंने खेती में बदलाव का निर्णय लिया। इसी दौरान उद्यानिकी विभाग के संपर्क में आने पर उन्हें फसल विविधीकरण और गेंदे की व्यावसायिक खेती की जानकारी मिली। विभाग की सलाह पर उन्होंने शुरुआत में महज 10 बिस्वा जमीन पर गेंदा लगाया। दो महीने में 70 से 80 हजार की बिक्री बनवारी लाल के मुताबिक एक बीघा में गेंदे की फसल से उन्हें करीब 70 से 80 हजार रुपए की कुल आमदनी हुई।
इसमें लगभग 25 हजार रुपए लागत निकालने के बाद 55 हजार रुपए का शुद्ध मुनाफा बचा। उनके अनुसार यह आमदनी गेहूं और बाजरा की तुलना में दोगुनी से अधिक रही। इसके बाद उन्होंने गेंदे का रकबा बढ़ाना शुरू किया और अब अलग-अलग समय में 2 से 5 बीघा तक में इसकी खेती कर रहे हैं। एक खेत से फूल भी और गेहूं भी बनवारी लाल के लिए गेंदे की खेती सस्य चक्र के लिहाज से भी फायदेमंद साबित हो रही है।
जुलाई में लगाए गए पौधों से अक्टूबर से दिसंबर तक फूल मिलते हैं। उत्पादन खत्म होने के बाद उसी खेत में गेहूं की बोवनी कर देते हैं। इससे एक ही खेत से नकदी फसल के साथ अनाज भी मिल जाता है। मानसून में सिंचाई की जरूरत कम पड़ती है, जबकि अक्टूबर-नवंबर में करीब 15 दिन के अंतराल पर पानी देना पर्याप्त रहता है।
फूलों की बढ़ती मांग से बाजार में अच्छे दाम मिल रहे हैं। वे मुरैना, ग्वालियर और आगरा में फूल बेचते हैं, जहां करीब 60 रुपए किलो तक भाव मिल जाता है।
📡 स्रोत: NewsData.io