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मुस्कान-साहिल को मिले सजा-ए-मौत:मेरठ के नीला ड्रम केस में बहस खत्म, जिला जज के सामने वकील बोले ये नृशंसतम हत्या का केस

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 25 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
मुस्कान-साहिल को मिले सजा-ए-मौत:मेरठ के नीला ड्रम केस में बहस खत्म, जिला जज के सामने वकील बोले ये नृशंसतम हत्या का केस

मेरठ के चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में आरोपी मुस्कान-साहिल को सजा-ए-मौत देने की मांग की गई है। मृतक मर्चेंट नेवी ऑफिसर सौरभ राजपूत की तरफ से केस लड़ रहे उनके निजी वकील और अभियोजन पक्ष ने शनिवार को अदालत के सामने इस नृशंस हत्याकांड को पूरी तरह साबित किया। इसके साथ ही अदालत से दरख्वास्त की, कोर्ट सामाजिक दायरों और पति, पत्नी के रिश्ते, भरोसे को तार-तार करने वाले इस हत्याकांड के आरोपियों को सजा-ए-मौत सुनाए।

ताकि समाज में पति, पत्नी के सबसे विश्वसनीय रिश्ते के प्रति लोगों के मन में आस्था बढ़े। साथ ही कानून और न्याय की एक मजबूत मिसाल इस केस के जरिए पेश हो सके। बयानों, साक्ष्यों के आधार पर साबित की हत्या शनिवार को केस में सौरभ के वकील और अभियोन पक्ष की तरफ से सीनियर एडवोकेट विजय बहादुर सिंह ने पूरा केस अदालत के सामने ब्रीफ किया।

उन्होंने सभी 22 गवाहों के बयानों की कढ़ियां, घटना से जुड़े सुबूत, साक्ष्यों और परिस्थितियों को जोड़ते हुए हत्या के केस को जिला जज के सामने स्थापित किया। सोमवार को डिफेंस की वकील रखेंगी पक्ष डीजीसी केके चौबे ने बताया कि सौरभ राजपूत मर्डर केस में बहस खत्म है। अब डिफेंस की वकील रेखा जैन अपना जबाव देंगी।

इसके बाद अभियोजन पक्ष उनके जबाव पर अपनी बात रखेगा और केस फाइल जजमेंट के लिए लग जाएगी। अब 7 सितंबर सोमवार की तारीख लगी है। सुप्रीम कोर्ट के 20 कानूनों का हवाला देकर मांगी फांसी सौरभ के वकील विजय बहादुर सिंह ने अपनी बहस पूरी कर दी है। 22 गवाह पूरे कर दिए हैं। हमने जिला जज की अदालत में हत्या के पूरे केस को स्थापित किया है।

हमने अदालत को बताया कि ये केस सजा का बनता है। इसमें हमने अदालत से सजा ए मौत की दरख्वास्त की है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट के 20 कानूनों का हवाला देते हुए यह साबित किया है कि अभियोजन का केस मुल्जिमान पर साबित होता है। साक्ष्य आधार पर साबित हुए इस केस में सजा ए मौत हो। डिफेंस की वकील रेखा जैन ने अभियोजन की ब्रीफिंग पर अपने कुछ जबाव देने के लिए समय मांगा है।

वो क्या लेकर आती हैं उसके बाद हम उसका जबाव देंगे। वो जो जबाव देंगी उसमें एक या दो दिन का समय हमें रिप्लाई के लिए मिलेगा इसके बाद जजमेंट के लिए फाइल लग जाएगी।

📡 स्रोत: NewsData.io

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हिंसा का कोई रास्ता नहीं, न्याय का रास्ता है। यदि किसी रिश्ते में मतभेद हों तो संवाद, मध्यस्थता और कानूनी सलाह से समाधान ढूंढें। गुस्सा या बदला लेने की चाह में जीवन का अंत न हो। समाज को एकजुट होकर सहानुभूति, विश्वास और कानून के प्रति सम्मान बढ़ाना चाहिए। पीड़ित की याद को सम्मानित करते हुए, हम सभी को शांति और न्याय की दिशा में कदम बढ़ाने की प्रेरणा देते हैं।

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