अपराध

नाबालिग को शादी के झांसे में फंसाकर महीनों तक शोषण, ब्लैकमेल कर 50 लोगों से करवाया रेप, मां की शिकायत पर FIR दर्ज

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 14 अगस्त 2026 👁️ 2 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
नाबालिग को शादी के झांसे में फंसाकर महीनों तक शोषण, ब्लैकमेल कर 50 लोगों से करवाया रेप, मां की शिकायत पर FIR दर्ज

फरीदाबाद। हरियाणा के फरीदाबाद ज़िले के धौज थाना क्षेत्र से एक ऐसा मामला सामने आया है जो सिर्फ़ एक अपराध की कहानी नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की नाकामी का आईना है। 16 वर्षीय एक किशोरी को कथित तौर पर शादी का झांसा देकर फंसाया गया, उसका यौन शोषण किया गया, अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल किया गया और महीनों तक कई लोगों के हवाले किया जाता रहा। पीड़िता की माँ की शिकायत पर पुलिस ने केस दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है।

कैसे बुना गया जाल

शिकायत के मुताबिक़, क़रीब दो साल पहले नूंह में किशोरी की पहचान एक युवक से हुई थी, जिसे मोबाइल फ़ोन देकर संपर्क में रखा गया। धीरे-धीरे भरोसा जीतने के बाद आरोपी ने उसे मिलने पर मजबूर किया और अंततः शादी का वादा कर दुष्कर्म किया। इसी दौरान उसकी अश्लील वीडियो बना ली गई — जो आगे चलकर शोषण का सबसे बड़ा हथियार बनी।

यह पैटर्न नया नहीं है। भरोसा, फिर धमकी, फिर मजबूरी — यही वह चक्र है जिसमें देशभर में नाबालिग लड़कियाँ फँसाई जाती रही हैं। वीडियो वायरल करने की धमकी पीड़िता को चुप कराने का औज़ार बन जाती है, और यहीं से शोषण संस्थागत रूप लेने लगता है।

होटलों तक पहुँची शोषण की कड़ी

माँ के आरोपों के अनुसार, किशोरी को 8-9 दिनों तक अलग-अलग वाहनों में घुमाया गया और सोहना, नूंह व किशनगढ़ के होटलों तक ले जाया गया, जहाँ पैसों के बदले उसे कथित तौर पर अन्य लोगों को सौंपा जाता रहा — आरोप है कि इस तरह 50 से अधिक लोगों ने उसका शोषण किया। यह भी आरोप है कि विरोध रोकने के लिए उसे नशीली दवाएँ दी जाती थीं।

अगर ये आरोप जाँच में सही साबित होते हैं, तो यह मामला सिर्फ़ दुष्कर्म का नहीं बल्कि संगठित यौन तस्करी (ऑर्गनाइज़्ड ट्रैफिकिंग) का रूप लेता दिखता है — जहाँ एक पीड़िता को बार-बार "बेचा" गया। यही वह पहलू है जिसकी जाँच सबसे बारीकी से होनी चाहिए, क्योंकि इसमें आरोपी अकेला नहीं, एक पूरा नेटवर्क शामिल दिखता है।

पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल

मामले का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि पीड़ित परिवार ने ख़ुद जाँच एजेंसी पर सवाल खड़े किए हैं। आरोप है कि 12 जुलाई को बरामदगी के बाद किशोरी पर बयान बदलने का दबाव बनाया गया, परिवार से मिलने नहीं दिया गया और सच बताने पर कार्रवाई की धमकी दी गई। यह भी आरोप है कि नाबालिग की माँग के बावजूद मेडिकल जाँच तुरंत नहीं कराई गई।

अगर यह आरोप सही हैं, तो यह सीधे तौर पर POCSO एक्ट और किशोर न्याय व्यवस्था के उन प्रावधानों का उल्लंघन है जो नाबालिग पीड़िता की तुरंत मेडिकल जाँच, सुरक्षित बयान-प्रक्रिया और परिवार से संपर्क सुनिश्चित करते हैं। जब जाँच एजेंसी ख़ुद संदेह के घेरे में आ जाए, तो पीड़िता के लिए न्याय की राह और लंबी हो जाती है — यही वजह है कि परिवार ने पुलिसकर्मियों की भूमिका की स्वतंत्र जाँच की माँग की है।

केस की स्थिति

पुलिस ने आरोपी तारीफ़, फ़िरोज़ और सौरभ के ख़िलाफ़ पॉक्सो एक्ट सहित अन्य गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि सभी आरोपों की निष्पक्ष जाँच जारी है।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।