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'नहीं बताया कि असली मिशन...', भारत के ASAT टेस्ट से US में मची थी खलबली, समझें पूरी बात

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 3 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
'नहीं बताया कि असली मिशन...', भारत के ASAT टेस्ट से US में मची थी खलबली, समझें पूरी बात

करीब 28 साल पहले भारत ने पोखरण-II के परमाणु परीक्षण कर अमेरिका समेत दुनिया को चौंका दिया था.

इसके बाद 27 मार्च 2019 को भारत ने मिशन शक्ति के तहत एंटी-सैटेलाइट मिसाइल का परीक्षण किया.

अब अमेरिका के पूर्व वायुसेना खुफिया अधिकारी डेविड ग्रुश ने पॉडकास्टर जो रोगन को दिए एक इंटरव्यू में उस समय की स्थिति का जिक्र किया है.

उन्होंने बताया कि परीक्षण के समय वह नेशनल रिकॉनिसेंस ऑफिस यानी NRO के ऑपरेशंस सेंटर में ड्यूटी पर थे और भारतीय मिसाइल परीक्षण की जानकारी ने अमेरिकी खुफिया तंत्र को अचानक सक्रिय कर दिया था.

भारत ने मिसाइल टेस्ट की जानकारी दी थी, लेकिन असली लक्ष्य का पता नहीं था

डेविड ग्रुश के मुताबिक, भारत ने ओडिशा के तट के पास एक NOTAM यानी विमानन चेतावनी जारी की थी. इसका मतलब था कि अमेरिका को पता था कि भारत किसी मिसाइल का परीक्षण करने वाला है.

लेकिन अमेरिकी खुफिया तंत्र को यह जानकारी नहीं थी कि इस परीक्षण में एंटी-सैटेलाइट हथियार का इस्तेमाल किया जाएगा.

ग्रुश ने बताया कि उस समय यह जानकारी बेहद सीमित दायरे में रखी गई थी.

भारत ने भी परीक्षण से पहले सार्वजनिक रूप से यह नहीं बताया था कि उसका निशाना अंतरिक्ष में मौजूद कोई उपग्रह होगा.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 मार्च 2019 की सुबह राष्ट्र के नाम संबोधन में मिशन शक्ति की घोषणा की थी.

3 मिनट में उपग्रह को बनाया निशाना

मिशन शक्ति के तहत भारत ने अपनी एंटी-सैटेलाइट मिसाइल से Microsat-R नाम के एक निष्क्रिय उपग्रह को निशाना बनाया था.

परीक्षण सफल रहने के बाद भारत अमेरिका, रूस और चीन के बाद दुनिया का चौथा ऐसा देश बन गया था, जिसके पास अंतरिक्ष में किसी उपग्रह को मार गिराने की रणनीतिक क्षमता होने की बात सामने आई.

ग्रुश ने बताया कि परीक्षण की जानकारी सामने आने के बाद NRO में अधिकारियों के बीच तेजी

📡 स्रोत: ABP Live

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