भोपाल

नक्सलवाद के बाद बालाघाट में विकास को मिली रफ्तार

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 23 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
नक्सलवाद के बाद बालाघाट में विकास को मिली रफ्तार

एंकर - कभी नक्सलवाद की चुनौती से पहचाने जाने वाले बालाघाट में अब विकास की नई तस्वीर सामने आ रही है। गांवों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने और युवाओं को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। इसी कड़ी में लालबर्रा विकासखंड की ग्राम पंचायत गर्रा में ई-लायब्रेरी की शुरुआत की गई, वहीं 124 करोड़ 6 लाख रुपये के विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन भी हुआ। देखिए नक्सलवाद के बाद विकास की नई संभावनाओं की ओर बढ़ते बालाघाट से यह रिपोर्ट।

वीओ – बालाघाट... मध्यप्रदेश का वह जिला, जहां लंबे समय तक नक्सलवाद एक बड़ी चुनौती रहा। अब नक्सलवाद के खात्मे के बाद क्षेत्र में विकास, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार को नई दिशा देने पर जोर है। गांवों को सड़क से जोड़ने, युवाओं को पढ़ाई के बेहतर अवसर देने और ग्राम पंचायतों को विकास के लिए सक्षम बनाने की कोशिशें इसी बदलाव की तस्वीर पेश करती हैं।

लालबर्रा विकासखंड की ग्राम पंचायत गर्रा में नवनिर्मित ई-लायब्रेरी का उद्घाटन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यहां युवाओं को अध्ययन और ज्ञानवर्धन के लिए सुविधा उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है। कार्यक्रम में प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने 124 करोड़ 6 लाख रुपये की लागत के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया और कहा कि अगले तीन वर्षों में प्रदेश का कोई भी मजरा-टोला सड़क से वंचित नहीं रहेगा।

वहीं सांसद भारती पारधी ने गर्रा में ई-लायब्रेरी की शुरुआत को युवाओं के लिए उपयोगी पहल बताया।

बाइट – प्रहलाद सिंह पटेल, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री, मप्र

वीओ - नक्सलवाद के बाद बालाघाट में ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए प्रदेश में 2 हजार 472 ग्राम पंचायत भवन दिसंबर 2026 तक पूरे करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा 3 हजार 700 से अधिक सामुदायिक भवन स्वीकृत किए गए हैं। सरकार की इन पहलों का उद्देश्य गांवों में सुविधाओं का विस्तार करना और स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों को गति देना है। निश्चित ही सरकार की जन-कल्याणकारी योजनाओं और विकास से आए बदलाव का असर दूरस्थ गांवों और जरूरतमंद लोगों तक पहुंच रहा है।

बाइट – हेमलता चौहान, ग्रामीण, गर्रा, बालाघाट

बाइट – रिंकी देशमुख ग्रामीण, गर्रा, बालाघाट

बाइट – भुवनेश्वरी बघेल, ग्रामीण, गर्रा, बालाघाट

बाइट – प्रेमसिंह देशमुख ग्रामीण, गर्रा, बालाघाट

फायनल वीओ - बालाघाट में विकास की यह पहल केवल निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि गांवों को बेहतर सुविधाओं से जोड़ने और युवाओं के लिए नए अवसर तैयार करने की दिशा में भी अहम है। अब इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से यह तय होगा कि विकास की यह रफ्तार जिले के दूरस्थ इलाकों तक कितनी तेजी से पहुंचती है।

बालाघाट से झनेन्द्र बुरडे के साथ ब्यूरो रिपोर्ट डीडी न्यूज भोपाल

नक्सलवाद के बाद बालाघाट में विकास को मिली रफ्तार

लालबर्रा विकासखंड की ग्राम पंचायत गर्रा को मिली सौगात

ग्राम पंचायत गर्रा में नवनिर्मित ई-लायब्रेरी का हुआ उद्घाटन

क्षेत्र में 124 करोड़ के विकास कार्यों से बदलेगी ग्रामीण तस्वीर

💡 पृष्ठभूमि (Background)

बालाघाट, जिसे नक्सलवाद की चुनौतियों के लिए जाना जाता था, अब विकास की नई तस्वीर पेश कर रहा है। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाती है कि संघर्ष के बाद भी क्षेत्र में बुनियादी सुविधाएँ और रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं, जिससे सामाजिक स्थिरता में सुधार हो रहा है। ऐसी पहलें आम जनता पर सकारात्मक असर डालेंगी: लोग बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य और डिजिटल संसाधनों तक पहुँच पाएंगे, जिससे आर्थिक समृद्धि और सुरक्षा की भावना बढ़ेगी।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।