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नालागढ़ के बीड़ प्लासी स्थित सीमेंट ब्लॉक निर्माण इकाई में चाइल्ड लेबर की शिकायत पर जिला टास्क फोर्स की संयुक्त टीम ने किया निरीक्षण

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 23 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
नालागढ़ के बीड़ प्लासी स्थित सीमेंट ब्लॉक निर्माण इकाई में चाइल्ड लेबर की शिकायत पर जिला टास्क फोर्स की संयुक्त टीम ने किया निरीक्षण

औद्योगिक क्षेत्र नालागढ़ के तहत बीड़ प्लासी गांव में स्थित आरएस ग्रीन कंपनी में कथित बाल मजदूरी को लेकर चाइल्ड हेल्पलाइन पर मिली शिकायत के बाद प्रशासन की संयुक्त टीम ने फैक्ट्री में निरीक्षण किया। सीमेंट के ब्लॉक बनाने वाली इस इकाई में बाल मजदूरी की शिकायत की जांच के लिए जिला टास्क फोर्स कमेटी के विभिन्न विभागों के अधिकारी मौके पर पहुंचे।

टीम में चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी), जिला बाल संरक्षण इकाई, चाइल्ड हेल्पलाइन, पुलिस, स्वास्थ्य और श्रम विभाग के प्रतिनिधि शामिल रहे। निरीक्षण के बाद लेबर इंस्पेक्टर ने बताया कि जांच के दौरान उन्हें कोई स्पष्ट रूप से बाल मजदूरी करता हुआ बच्चा नहीं मिला। हालांकि, कुछ श्रमिकों की वास्तविक उम्र की पुष्टि के लिए दस्तावेज मांगे जाएंगे।

जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट संबंधित विभाग और जिला टास्क फोर्स कमेटी के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी।

शिकायतकर्ता बलवंत सिंह ने आरोप लगाया कि उन्होंने करीब 15 से 20 दिन पहले चाइल्ड हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करवाई थी। उनका दावा है कि फैक्ट्री में 13 से 14 वर्ष की उम्र के बच्चों से 30 से 35 किलोग्राम तक वजन वाले सीमेंट ब्लॉक उठवाए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश और झारखंड से लाए गए श्रमिकों में बड़ी संख्या में कम उम्र के बच्चे हो सकते हैं और उनसे लंबे समय तक काम करवाया जा रहा है।

बलवंत सिंह के मुताबिक, उनके पास इस संबंध में वीडियो और तस्वीरें भी हैं, जिन्हें वह जांच के लिए उपलब्ध करवाने को तैयार हैं। उन्होंने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच करवाने और बच्चों की उम्र व कामकाज की परिस्थितियों की वास्तविक स्थिति सामने लाने की मांग की।

शिकायतकर्ता ने फैक्ट्री में धूल और प्रदूषण की समस्या उठाते हुए कहा कि वहां काम करने वाले श्रमिकों के स्वास्थ्य पर भी इसका असर पड़ सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि फैक्ट्री परिसर में धूल-मिट्टी अधिक है और श्रमिकों को सांस संबंधी बीमारियों का खतरा हो सकता है। उन्होंने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से भी कंपनी का निरीक्षण करने और श्रमिकों के स्वास्थ्य की जांच करवाने की मांग की। बलवंत सिंह ने यह सवाल भी उठाया कि शिकायत के बावजूद उन्हें निरीक्षण टीम के साथ फैक्ट्री के अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई। उनके अनुसार, टीम ने उन्हें शिकायतकर्ता होने के बावजूद साथ ले जाने से इनकार कर दिया।

........................ बाइट 1: बलवंत सिंह

उधर, लेबर इंस्पेक्टर बद्दी एवं नालागढ़ का अतिरिक्त कार्यभार देख रहे अनिल चौहान ने बताया कि चाइल्ड हेल्पलाइन से मिली शिकायत के आधार पर जिला टास्क फोर्स की टीम ने फैक्ट्री का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि कुछ श्रमिक अपनी उम्र 20 से 25 वर्ष बता रहे हैं, लेकिन उनकी उम्र की पुष्टि दस्तावेजों के आधार पर की जानी है।

इसके लिए संबंधित श्रमिकों के परिवार रजिस्टर या अन्य मान्य दस्तावेज मंगवाए जाएंगे, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कोई श्रमिक 18 वर्ष से कम उम्र का तो नहीं है। कंपनी की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, वहां करीब 80 से 100 लोग काम करते हैं, जिनमें लगभग 32 से 33 कर्मचारी कंपनी के रोल पर हैं, जबकि अन्य श्रमिक दो ठेकेदारों के माध्यम से कार्यरत हैं।

लेबर इंस्पेक्टर ने बताया कि ठेकेदारों के अधीन काम करने वाले श्रमिकों के ईएसआई और ईपीएफ रिकॉर्ड भी तलब किए जाएंगे। जांच में पाई गई अन्य कमियों के संबंध में फैक्ट्री प्रबंधन को अलग से नोटिस जारी किए जाएंगे और कमियां प्रमाणित होने पर नियमानुसार कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

............................ बाइट 2: अनिल चौहान

अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। क्या फैक्ट्री में बाल मजदूरी करवाई जा रही थी, क्या श्रमिकों की उम्र और श्रम संबंधी रिकॉर्ड में अनियमितताएं हैं तथा प्रदूषण को लेकर लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है—इन सभी सवालों का जवाब दस्तावेजों और विभागीय जांच के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल, बाल मजदूरी के आरोप शिकायतकर्ता के दावे हैं और प्रशासन की ओर से इसकी पुष्टि होना बाकी है।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।