नलटड़ी खड्ड पर पुल बनने का दशकों से इंतजार, हर बरसात में जान जोखिम में डाल रहे बटोला के लोग
अगस्त 21, शिमला (हिमाचल प्रदेश): आजादी के 80 वर्ष बीत जाने के बावजूद जुन्गा और ठियोग तहसील की सीमा पर बहने वाली नलटड़ी खड्ड के कांवती में आज तक स्थायी पुल का निर्माण नहीं हो पाया है। इसका खामियाजा पीरन पंचायत के बटोला सहित आसपास के गांवों के लोगों को हर वर्ष बरसात के मौसम में भुगतना पड़ता है।
उफनती खड्ड को ग्रामीण कई बार जान जोखिम में डालकर रस्सी के सहारे पार करने को मजबूर होते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार करीब 20 वर्ष पहले नलटड़ी खड्ड पर पैदल आवागमन के लिए फुटब्रिज बनाया गया था, लेकिन पहली ही बरसात में तेज पानी के बहाव में यह पुल बह गया।
वर्ष 2023 में भी उफनती खड्ड को पेड़ के सहारे एक बच्चे को रस्सी बांधकर खड्ड पार करवाने का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था। इसके बाद सरकार की ओर से डीआरडीए शिमला को यहां पुल निर्माण के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद भी पुल निर्माण का कार्य आगे नहीं बढ़ पाया।
गौर रहे कि पीरन पंचायत के बटोला, नालटा, मीमू और नट सहित कई गांवों के लोगों की घासनी, चारागाह और घराट खडड से पार हैं। वहीं पीरन पंचायत के लोगों की ठियोग तहसील के धरेच, सतोग, अलोटी तथा सिरमौर जिला के शीलाबाग और कलयोंपाब सहित अन्य क्षेत्रों में रिश्तेदारियां हैं।
इस कारण इन क्षेत्रों के बीच ग्रामीणों का नियमित आना-जाना लगा रहता है। लोगों का कहना है कि खड्ड के दोनों ओर एंबुलेंस योग्य सड़क बन चुकी है, ऐसे में यहां वाहन योग्य पुल का निर्माण होने से क्षेत्र के लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है। लोगों का कहना है कि इस बार पीरन पंचायत के बटोला वार्ड से महिला प्रधान चुनी गई हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि पुल का निर्माण क्षेत्र के लिए सबसे महत्वपूर्ण कार्यों में से एक है और इसे पूरा करना पंचायत प्रतिनिधियों के लिए बड़ी चुनौती भी है। पंचायत सचिव राजीव ठाकुर ने बताया कि प्रस्तावित पुल का स्पैन करीब 53 मीटर है। फुटब्रिज का निर्माण कार्य डीआरडीए शिमला द्वारा किया जा रहा है।
पंचायत के पास पुल निर्माण के लिए अलग से कोई धनराशि उपलब्ध नहीं है।