नाना पाटेकर को कलाकार जुहैब खान की अनोखी श्रद्धांजलि, कोयले से बनाई 6 फीट की तस्वीर
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हिंदी सिनेमा के अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की खबर से उनके फैंस और फिल्म जगत में शोक है.
इस बीच उत्तर प्रदेश के अमरोहा में एक कलाकार ने उन्हें अपनी कला के जरिए श्रद्धांजलि दी.
कलाकार जुहैब खान ने एक दीवार पर कोयले से नाना पाटेकर की करीब छह फीट ऊंची तस्वीर बनाई. इसके पास उन्होंने 'अलविदा नाना' लिखा.
जुहैब का कहना है कि एक कलाकार दूसरे कलाकार को अपनी कला के जरिए ही सबसे अच्छी श्रद्धांजलि दे सकता है.
कोयले से बनाई 6 फीट की तस्वीर
आईएएनएस से बातचीत में कलाकार जुहैब खान ने कहा, ''नाना पाटेकर अब हमारे बीच नहीं रहे, इसलिए मैंने उनके सम्मान में यह तस्वीर तैयार की.
मैं अभिनेता को अपनी कला के जरिए श्रद्धांजलि देना चाहता था. इसलिए मैंने दीवार पर कोयले से करीब छह फीट का चित्र बनाया.
एक कलाकार होने के नाते मैं समझता हूं कि कला के माध्यम से किसी दूसरे कलाकार के काम और उसके योगदान को याद किया जा सकता है.
जुहैब खान ने नाना पाटेकर के फिल्मी सफर और समाज में उनके योगदान का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा, नाना पाटेकर ने अपने करियर में कई तरह के किरदार निभाए.
उनके काम ने लोगों को मनोरंजन देने के साथ-साथ समाज में जागरूकता पैदा करने का काम भी किया. समाज हमेशा उनके इस योगदान के लिए आभारी रहेगा. मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि उनकी आत्मा को शांति मिले.
बता दें कि नाना पाटेकर का निधन 8 अक्टूबर की सुबह हो गया था.
जानकारी के मुताबिक, उन्हें गुरुवार को गोवा में तबीयत बिगड़ने के बाद अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. अस्पताल के डॉक्टरों ने शुरुआती तौर पर कार्डियक अरेस्ट की आशंका जताई थी.
पुलिस ने मामले में मेडिको-लीगल प्रक्रिया के तहत अप्राकृतिक मौत का केस दर्ज कर जांच शुरू की. मौत के सही कारणों का पता लगाने के लिए पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया भी की गई.
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📡 स्रोत: ABP Live Film
💡 पृष्ठभूमि (Background)
यह खबर नाना पाटेकर के निधन के बाद उत्तर प्रदेश के अमरोहा में कलाकार जुहैब खान द्वारा कोयले से बनाई गई छह फुट ऊँची श्रद्धांजलि के बारे में है। यह विषय कलाकारों के बीच सम्मान और सहानुभूति का प्रतीक है। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाती है कि कैसे कला के माध्यम से एक कलाकार दूसरे की याद को जीवित रख सकता है और दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ सकता है। आम जनता पर इसका असर गहरा हो सकता है; यह लोगों को याद दिलाता है कि कला जीवन की अनमोल यादों को संरक्षित कर सकती है और शोक के समय सांत्वना का स्रोत