नाना पाटेकर की सादगी और इंसानियत आज भी यादों में जिंदा है : ओमर गुल खान
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भोपाल। वर्ष 1999 में फिल्म ‘तरकीब’ की शूटिंग के दौरान दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के साथ बिताए गए पल आज भी यादों में ताजा हैं। फिल्म की शूटिंग मध्य प्रदेश के खूबसूरत हिल स्टेशन पचमढ़ी और भोपाल के ऐतिहासिक नूर-उस-सबाह पैलेस में हुई थी। उस दौर में पचमढ़ी में आज की तरह आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं, लेकिन नाना पाटेकर के सहज स्वभाव और आत्मीय व्यवहार ने शूटिंग के माहौल को बेहद खुशनुमा बना दिया था।
यह बात कोलंबस मल्टीमीडिया फिल्म्स एंड प्रोडक्शन, भोपाल के सीईओ ओमर गुल खान ने नाना पाटेकर के साथ अपनी पुरानी यादें साझा करते हुए कही। उन्होंने बताया कि फिल्म ‘तारकीब’ के लाइन प्रोड्यूसर कोलंबस मल्टीमीडिया फिल्म्स एंड प्रोडक्शन के तत्कालीन सीईओ स्वर्गीय डॉ. कमर खान थे।
ओमर गुल खान के मुताबिक, नाना पाटेकर केवल अपने अभिनय के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी सादगी और मानवीय संवेदनाओं के लिए भी याद किए जाते हैं। शूटिंग के दौरान वे सेट पर मौजूद स्पॉट बॉय, लाइटमैन, आर्ट असिस्टेंट और सेटिंग बॉय जैसे कर्मचारियों के पास स्वयं जाकर उनका हालचाल पूछते और यह जानने की कोशिश करते थे कि उन्होंने खाना खाया है या नहीं।
उन्होंने एक खास घटना का जिक्र करते हुए बताया कि पचमढ़ी में शूटिंग के दौरान नाना पाटेकर ने स्वयं लकड़ियों और पत्थरों की मदद से चूल्हा बनाया और सेट पर मौजूद लोगों के लिए अपने हाथों से चाय तैयार की। जब उनसे ऐसा करने की वजह पूछी गई, तो उन्होंने सहजता से कहा कि उन्हें अपने हाथों से बनाकर लोगों को खिलाने-पिलाने में अच्छा लगता है।
ओमर गुल खान ने बताया कि नाना पाटेकर का व्यवहार हर व्यक्ति के प्रति आत्मीय और मजाकिया था। शूटिंग के दौरान कुछ-कुछ देर में उनके ठहाकों की आवाज सुनाई देती थी। उनके साथ काम करते हुए कभी ऐसा महसूस नहीं होता था कि सेट पर बॉलीवुड का इतना बड़ा सितारा मौजूद है। वे सभी के साथ घुल-मिलकर रहते थे और अपने व्यवहार से लोगों के दिलों में जगह बना लेते थे।
उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि नाना पाटेकर एक बेहद अच्छे, शालीन और खूबसूरत दिल वाले इंसान थे। उनके साथ बिताए गए पल जीवन की अनमोल यादें हैं। उनका सरल स्वभाव, दूसरों के प्रति सम्मान और इंसानियत हमेशा याद रखी जाएगी।
ओमर गुल खान ने कहा, “कुछ लोग अपनी कला से पहचान बनाते हैं, लेकिन अपने व्यवहार और इंसानियत से लोगों के दिलों में हमेशा के लिए बस जाते हैं। नाना जी उन्हीं लोगों में से एक थे। वे हमारी यादों और दिलों में हमेशा जिंदा रहेंगे।”