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नंदनकानन पहुंचे ओडिशा के जंगल से मिले 5 बेबी ओरंगुटान:भारत में नहीं पाए जाते, इन्हें जिंदा रखना चुनौती; तस्करी करके लाने की आशंका

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 10 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
नंदनकानन पहुंचे ओडिशा के जंगल से मिले 5 बेबी ओरंगुटान:भारत में नहीं पाए जाते, इन्हें जिंदा रखना चुनौती; तस्करी करके लाने की आशंका

ओडिशा के बालासोर जिले के जंगल में मंगलवार सुबह मिले 5 नन्हे ओरंगुटान का रहस्य गहरा गया है। दरअसल ये भारत में नहीं पाए जाते हैं, इसलिए पूरी आशंका है कि इन्हें तस्करी कर यहां लाया गया है। फॉरेस्ट ऑफिसर प्रतीक प्रकाश इंदलकर के मुताबिक, पांचों को फिलहाल भुवनेश्वर के नंदनकानन जू में रखा गया है।

3 नर और 2 मादा बच्चे हैं। सभी की उम्र 6 महीने से 1 साल के बीच है। चार बच्चे स्वस्थ हैं। पांचवें पर नजर रखी जा रही है, दरअसल जंगल में मिले पांचवें ओरंगुटान में डिहाइड्रेशन के लक्षण दिखाई दिए थे। क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक प्रकाश चंद गोगिनेनी ने बताया कि बच्चों को पकड़ने के लिए तस्कर जंगल में इनकी मां को बेरहमी से मार देते हैं।

मादा ओरंगुटान अपने बच्चे को 7-8 साल की उम्र तक नहीं छोड़ती। ऐसे में बगैर मां के इन पांचों बच्चों को ​जीवित रखना बड़ी चुनौती होगी। दावा- काली SUV में थे तस्कर, पकड़े जाने के डर से छोड़ गए इंदलकर के मुताबिक, ओरंगुटान दक्षिण-पूर्व एशिया (मलेशिया, इंडोनेशिया, बोर्नियो व सुमात्रा द्वीप) में पाए जाते हैं।

भारत से इन द्वीपों को जोड़ने वाला कोई कॉरिडोर नहीं है। इसलिए इनका प्राकृतिक रूप से यहां पहुंचना असंभव है। ओडिशा तट तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता समुद्र ही है। बालासोर की सीमा पश्चिम बंगाल से लगती है। अंदेशा है कि अंतरराष्ट्रीय तस्कर इन्हें सड़क से ले जा रहे थे। चेकिंग या पकड़े जाने के डर से इन्हें छोड़कर भाग गए।

पुलिस की एसटीएफ और वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो ने संयुक्त जांच शुरू कर दी है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, सोमवार रात जंगल के पास एक काली एसयूवी देखी गई थी। यह गाड़ी सीसीटीवी फुटेज में भी दिखाई दी थी। एसयूवी के मालिक का पता लगाया जा रहा है। रसूखदार ‘प्राइवेट जू’ या फार्महाउस में रखते हैं, इसलिए इनकी भारी मांग देश के बेहद अमीर लोग, बिजनेसमैन और रसूखदार हस्तियां स्टेटस सिंबल के लिए घरों में ‘प्राइवेट जू’ या फार्महाउस बनाते हैं।

ओरंगुटान इंसानों की तरह व्यवहार करते हैं। बेहद समझदार होते हैं। इसलिए अमीर इन्हें अवैध रूप से रखने के लिए मोटी रकम देते हैं। इसके चलते इनकी तस्करी होती है। इन्हें म्यांमार के रास्ते पूर्वोत्तर भारत (मिजोरम या असम की अंतरराष्ट्रीय सीमा) से भी लाया जाता है। पूर्वोत्तर का यह कॉरिडोर दुर्लभ जीवों की तस्करी के लिए कुख्यात रूट है।

2022 में अस

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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💡 पृष्ठभूमि (Background)

ओडिशा के बालासोर जिले के जंगल में पाँच नन्हे ओरंगुटान पाए गए, जिन्हें भारत में सामान्यतः नहीं देखा जाता। यह घटना तस्करी के संदेह को बढ़ाती है, क्योंकि इनका मूल स्थान स्पष्ट नहीं है। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह वन्यजीव संरक्षण के दायरे में नई चुनौतियों को उजागर करती है और तस्करी के खिलाफ कड़ी निगरानी की आवश्यकता को दर्शाती है। आम जनता पर इसका असर जागरूकता बढ़ाने में है; लोग वन्यजीवों की सुरक्षा के महत्व को समझेंगे और तस्करी के खिलाफ आवाज़ उठाने के लिए प्रेरित होंगे।

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