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नंदीग्राम में TMC के अबू ताहिर ने कर दिया खेल, BJP को समर्थन, ममता को दी चुनौती

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 16 सितंबर 2026 👁️ 1 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
नंदीग्राम में TMC के अबू ताहिर ने कर दिया खेल, BJP को समर्थन, ममता को दी चुनौती

पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम विधानसभा सीट पर उपचुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता अबू ताहिर को पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी को बड़ा झटका दे दिया है.

ताहिर ने नंदीग्राम सीट पर भाजपा का कब्जा बरकरार रखने के पक्ष में समर्थन देते हुए ममता बनर्जी को चुनौती दी है.

उन्होंने सवाल उठाते हुए चुनौती दी कि जब साल 2021 में ममता बनर्जी ने इसी ट्रॉफी सीट से भाजपा उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ चुनाव लड़ा था, तो अब एक स्थानीय नेता इस सीट से चुनाव क्यों लड़े?

उन्हें खुद नंदीग्राम लौटकर चुनाव लड़ना चाहिए.

जब TMC सत्ता में थी, तब ममता चुनाव लड़ने आई थी- ताहिर

अबू ताहिर के इस बयान ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) और ममता बनर्जी के लिए टेंशन बढ़ा दी है.

उन्होंने कहा कि अगर पार्टी उन्हें नंदीग्राम से उपचुनाव लड़ने के लिए कहती है, तो वह इससे इनकार कर देंगे.

उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी ने उन्हें कई सालों तक नजरअंदाज किया और अब उन्हें बलि का बकरा नहीं बनना है.

उन्होंने कहा, जब टीएमसी राज्य में सत्ता पर काबिज थी, तब वह यहां लड़ने आई थीं, तो अब मैं क्यों लड़ूं. उन्हें खुद आकर उपचुनाव लड़ना चाहिए.

TMC के 15 सालों की सत्ता में मुझे क्या मिला- ताहिर

न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, अबू ताहिर ने कहा, मैंने 2007 में एंटी-लैंड एक्विजिशन आंदोलन के दौरान वामपंथी मोर्चे की ताकत के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी, लेकिन पिछले 15 सालों तक टीएमसी के सत्ता में रहने के दौरान मुझे क्या मिला?

उन 15 सालों के दौरान मुझे कभी टीएमसी का उम्मीदवार नहीं बनाया गया. मुझे अयोग्य समझा गया. फिर अब मुझे बलि का बकरा बनने के लिए क्यों चुना जाना चाहिए?

ताहिर के बयान को रितब्रत बनर्जी के गुट ने जोरशोर से उठाया

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📡 स्रोत: ABP Live

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💡 पृष्ठभूमि (Background)

यह खबर नंदीग्राम में तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अबू ताहिर के ममता बनर्जी को चुनौती देने के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसमें उन्होंने भाजपा के नंदीग्राम सीट पर कब्जे को बनाए रखने का समर्थन किया। यह विषय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह ममता बनर्जी के नेतृत्व पर एक आंतरिक विरोध दर्शाता है, जो पार्टी की एकता और चुनावी रणनीति पर प्रश्न उठाता है। आम जनता पर इसका असर यह हो सकता है कि मतदाता पार्टी के भीतर के विभाजन को देखकर अपनी वफादारी पर पुनर्विचार कर सकते हैं, जिससे चुनावी परिणामों में बदलाव आ सकता है

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