नंदीग्राम उपचुनाव: अधीर रंजन पर भड़के TMC सांसद कल्याण बनर्जी - 'वो BJP के...'
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टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी को बीजेपी का आदमी बताते हुए निशाना साथा है.
बनर्जी ने कहा है कि राहुल गांधी के संपर्क में बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हैं. उन्होंने नंदीग्राम उपचुनाव के लिए कांग्रेस का समर्थन किया है.
बनर्जी ने अधीर रंजन चौधरी को आड़े हाथों लेते हुए कहा है कि लेकिन उनके नेता अधीर रंजन चौधरी उनके खिलाफ हैं.
कल्याण बनर्जी ने कहा है, 'इंडिया गठबंधन काम कर रहा है.
गठबंधन में शामिल सभी दल मिलकर काम कर रहे हैं. पिछले हफ्ते एक बैठक में ममता बनर्जी ने कांग्रेस का समर्थन करने को कहा था. लेकिन उनकी तरफ से किसी तरह के सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी गई. राहुल गांधी अच्छा काम कर रहे है.
वह भी ममता बनर्जी के संपर्क में हैं. हमने अपनी सीट नंदीग्राम भी एक तरह से कांग्रेस को दी है.
जब हमारे उम्मीदवार ने अपना नामांकन वापस लिया है, तब से हम कांग्रेस को समर्थन कर रहे हैं.
यह सारा विवाद शुभेंदु अधिकारी से हमारे उम्मीदवार की मुलाकात के बाद हुआ है.
इसलिए हम नंदीग्राम में कांग्रेस को समर्थन दे रहे हैं.'
बीजेपी के आदमी हैं अधीर रंजन चौधरी
उन्होंने आगे कहा, 'समस्या की जड़ अधीर रंजन चौधरी हैं. वह सिर्फ ममता बनर्जी के खिलाफ हैं. वह न तो सीपीएम के खिलाफ हैं, और न ही बीजेपी के खिलाफ हैं.
वो ही एक ऐसे इंसान हैं, जो चाहते थे कि बीजेपी बंगाल में अपनी सरकार बनाए. इस तरह के लोग ही समस्या पैदा कर रहे हैं. खासकर वेस्ट बंगाल कांग्रेस के कुछ लोग.
लेकिन मुझे यकीन है कि राहुल गांधी चाहते हैं कि इंडिय गठबंधन बचा रहे. राहुल गांधी तृणमूल कांग्रेस के साथ काम करना चाहते हैं. लेकिन अधीररंजन चौधरी नहीं चाहते.
मैं कह चुका हूं, वह बीजेपी के आदमी हैं और वह चाहते थे कि बीजेपी बंगाल में होना चाहिए.'
📡 स्रोत: ABP Live
💡 पृष्ठभूमि (Background)
नंदीग्राम उपचुनाव में टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी पर आरोप लगाया कि वह भाजपा का सहयोगी हैं, और ममता बनर्जी तथा राहुल गांधी के बीच संबंधों पर भी सवाल उठाया। यह घटना चुनावी माहौल को तीव्र करती है, क्योंकि नंदीग्राम एक रणनीतिक सीट है जहाँ दोनों पार्टियों के बीच मुकाबला कड़ा है। ऐसे आरोप मतदाताओं में असंतोष पैदा कर सकते हैं और चुनावी बहस को और जटिल बना सकते हैं, जिससे आम जनता को उम्मीदवारों की विश्वसनीयता पर संदेह हो सकता है।