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नंदीग्राम उपचुनाव: कांग्रेस प्रत्याशी की बढ़ीं मुश्किलें, कोर्ट से लगा बड़ा झटका

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 23 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
नंदीग्राम उपचुनाव: कांग्रेस प्रत्याशी की बढ़ीं मुश्किलें, कोर्ट से लगा बड़ा झटका

नंदीग्राम उपचुनाव से पहले कांग्रेस उम्मीदवार को बड़ा झटका लगा है.

पूर्व मेदिनीपुर जिले की एक अदालत ने मिलन प्रधान को 2007 के एक आपराधिक मामले में बुधवार को 7 अक्तूबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा है. यानी इस आदेश के बाद वह उपचुनाव के लिए प्रचार नहीं कर पाएंगे.

बंगाल उपचुनाव के लिए प्रचार 4 अक्तूबर को खत्म हो जाएगा, जबकि 6 अक्टूबर को मतदान होगा और 9 अक्तूबर को नतीजे जारी होंगे.

कोर्ट में प्रधान के वकील प्रसनजीत जना ने कहा कि प्रधान को पहले ही आर्म्स एक्ट के एक केस में पांच अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया था.

अब नंदीग्राम में भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन के दौरान 2007 में दर्ज एक अन्य मामले में उन्हें हत्या और आईपीसी की अन्य धाराओं के तहत आरोपी बनाया गया है.

इन आदेशों के चलते प्रधान के लिए अपना चुनाव प्रचार करने का मौका असम में खत्म हो गया है.

नंदीग्राम में 6 अक्तूबर को वोटिंग

बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी की खाली की गई नंदीग्राम सीट पर 6 अक्टूबर को वोटिंग होनी है, जबकि प्रचार की आखिरी तारीख 4 अक्तूबर है.

कांथी अदालत के एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने हत्या के आरोप से जुड़े मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से उनकी हिरासत का अनुरोध किए जाने के बाद प्रधान को सात अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया.

24 सितंबर को कलकत्ता हाईकोर्ट में सुनवाई

कलकत्ता हाईकोर्ट ने बुधवार को कहा कि वह प्रधान की याचिका पर 24 सितंबर को सुनवाई करेगा.

प्रधान ने अपनी याचिका में दावा किया है कि मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान राज्य ने इस मामले का उल्लेख नहीं किया था.

कांग्रेस उम्मीदवार के अधिवक्ता अयन भट्टाचार्य ने न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य के समक्ष इस मामले का उल्लेख किया और कहा कि प्रधान को गिरफ्तार दिखाकर इस मामले में रिमांड के लिए अदालत में पेश किया गया था.

प्रधान को लगभग दो दशक पहले द

📡 स्रोत: ABP Live

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💡 पृष्ठभूमि (Background)

नंदीग्राम उपचुनाव के पूर्व में कांग्रेस के प्रत्याशी मिलन प्रधान को 2007 के एक आपराधिक मामले में अदालत ने 7 अक्तूबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा है, जिससे वे प्रचार नहीं कर पाएंगे। यह घटना चुनावी प्रक्रिया में कानूनी जाँच के प्रभाव को दर्शाती है। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाती है कि चुनावी उम्मीदवारों पर न्यायिक निर्णय का तत्काल असर पड़ता है, जिससे पार्टी की रणनीति और मतदाता विश्वास प्रभावित होते हैं। आम जनता पर इसका असर यह हो सकता है कि उम्मीदवार की अनुपस्थिति में वैकल्पिक विकल्पों पर विच

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