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नाराजगी दूर करने के लिए स्थानीय नेताओं से संवाद:टिकट पूर्व बगावत रोकने की तैयारी, सांसद-विधायकों को देंगे जिम्मेदारी

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 13 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
नाराजगी दूर करने के लिए स्थानीय नेताओं से संवाद:टिकट पूर्व बगावत रोकने की तैयारी, सांसद-विधायकों को देंगे जिम्मेदारी

भाजपा पंचायत चुनाव में टिकट घोषित होने से पहले ही संभावित बगावत और असंतोष को थामने की तैयारी में है। पार्टी का फोकस ऐसे दावेदारों को पहले ही भरोसे में लेने पर है, जिन्हें टिकट नहीं मिलने की आशंका है। इसके लिए सांसदों और विधायकों को जिम्मेदारी दी जा रही है। टिकट चयन के साथ संगठन की चुनौती अब नाराज नेताओं को साथ रखने की भी है।

पार्टी के जनप्रतिनिधियों के सामने अपने पसंदीदा दावेदारों को टिकट दिलाने की कोशिश के साथ अधिकृत प्रत्याशी के पक्ष में संगठन को एकजुट रखने की चुनौती भी रहेगी। निकाय चुनावों के दौरान कुछ शहरों व कस्बों में बगावत की वजह से पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा और बाद में बोर्ड बनाने के लिए जोड़-तोड़ करना पड़ा।

16 जिलों के टिकट चयन पर लगी मुहर : भाजपा प्रदेश मुख्यालय में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की मौजूदगी में पहले चरण के 16 जिलों के टिकटों पर मंथन हुआ। पहले चरण के 16 जिलों के उम्मीदवारों के नामों पर मुहर लगाई गई। बैठकों में अजमेर और जोधपुर संभाग के साथ बीकानेर, झालावाड़ और जयपुर जिले के टिकट चयन की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया गया।

बैठक में प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़, संगठन महामंत्री अजेय कुमार, संभाग प्रभारी, चुनाव प्रभारी और जिला अध्यक्ष शामिल हुए। बड़े चेहरों को मैदान में उतारेगी जिलाध्यक्ष, मंडल अध्यक्ष के साथ ही मोर्चों की प्रदेश कार्यकारिणी के पदाधिकारियों को भी जिला परिषद व पंचायत समिति सदस्य का चुनाव लड़ाया जाएगा।

भाजपा प्रदेश मुख्यालय में सोमवार को अजमेर और जोधपुर संभाग के साथ जयपुर, बीकानेर और झालावाड़ सहित पहले चरण के जिलों के टिकटों पर चर्चा हुई। जयपुर देहात दक्षिण के जिला अध्यक्ष राजेश गुर्जर और पूर्व जिला प्रमुख रमा चौपड़ा को जिला परिषद वार्ड के लिए प्रत्याशी बनाया है। टिकट तय करने के लिए सत्ता और भाजपा संगठन ने अपने-अपने स्तर पर सर्वे कराया है।

बैठक में दोनों सर्वे के नतीजों का मिलान किया गया। सांसद-विधायकों के सामने दोहरी चुनौती : पंचायत चुनाव में जिला परिषद और पंचायत समिति के टिकट तय करना आसान नहीं होता। गांवों में कई कार्यकर्ता, पूर्व जनप्रतिनिधि और स्थानीय नेता टिकट की उम्मीद लगाए बैठे रहते हैं। पार्टी किसी एक को उम्मीदवार बनाती है, तो बाकी नाराज हो सकते हैं।

कुछ निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला करते हैं, तो कुछ प्रचार से दूरी बना लेते हैं। ऐसे में सांसदों और विधायकों के सामने सभी को साथ लेकर चलने और आपसी मतभेद दूर करने की चुनौती होगी।

📡 स्रोत: NewsData.io

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