नौणी विश्वविद्यालय के डॉ. धर्म पाल शर्मा की अध्यक्षता में 21वीं वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक आयोजित
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कृषि एवं बागवानी क्षेत्र में वैज्ञानिक तकनीकों को बढ़ावा देने और गुणवत्तापूर्ण उपज पर दिया ज़ोर
अक्तूबर 17,सोलन (हिमाचल प्रदेश): डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय कृषि विज्ञान केंद्र किन्नौर के सौजन्य से आज एकीकृत जनजातीय विकास परियोजना भवन, रिकांग पीओ में 21वीं वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता विस्तार शिक्षा निदेशक, नौणी विश्वविद्यालय के डॉ.
धर्म पाल शर्मा ने की। बैठक में जिला किन्नौर में कृषि एवं बागवानी गतिविधियों को प्रोत्साहित करने, किसानों एवं बागवानों तक नवीनतम वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी पहुंचाने तथा क्षेत्र की भौगोलिक एवं जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप कृषि विकास को बढ़ावा देने से संबंधित विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।
मुख्य अतिथि डॉ. धर्म पाल शर्मा ने कहा कि आने वाला समय कृषि एवं बागवानी क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा का होगा, जहां किसानों और बागवानों को अपनी उपज की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि भविष्य में गुणवत्तापूर्ण फल एवं कृषि उत्पादों को ही बाजार में बेहतर दाम मिल सकेंगे। ऐसे में किसानों एवं बागवानों को आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों, उन्नत उत्पादन पद्धतियों तथा गुणवत्ता सुधार और प्राकृतिक खेती पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है, ताकि वे बदलती बाजार प्रतिस्पर्धा में अपनी उपज का उचित मूल्य प्राप्त कर सकें और अपनी आर्थिकी को सुदृढ़ बना सकें।
बैठक में सरकारी एवं गैर-सरकारी सदस्यों ने अपने सुझाव प्रस्तुत किए। इस दौरान कृषि एवं बागवानी क्षेत्र में आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों के उपयोग, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, फसलों की उत्पादकता एवं गुणवत्ता में सुधार, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा किसानों एवं बागवानों की समस्याओं का वैज्ञानिक समाधान तलाशने पर विशेष बल दिया गया।
इसके अतिरिक्त कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा संचालित प्रशिक्षण, प्रदर्शन एवं प्रसार गतिविधियों की समीक्षा करते हुए जिले की आवश्यकताओं के अनुरूप आगामी कार्ययोजना तैयार करने पर भी विचार-विमर्श किया गया। बैठक में किन्नौर जिले की विशिष्ट भौगोलिक एवं जलवायु परिस्थितियों तथा पारंपरिक कृषि-बागवानी पद्धतियों को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिक संस्थानों और किसानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
इस दौरान कहा गया कि वैज्ञानिक अनुसंधान एवं आधुनिक तकनीकों की जानकारी किसानों और बागवानों तक पहुंचाने से कृषि उत्पादन एवं गुणवत्ता में सुधार लाने के साथ-साथ उनकी आर्थिकी को भी सुदृढ़ किया जा सकता है। बैठक में शिमला, अटारी लुधियाना तथा ताबो से जुड़े वैज्ञानिकों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भाग लिया और कृषि एवं बागवानी विकास को लेकर अपने सुझाव प्रस्तुत किए।
बैठक के दौरान कृषि विज्ञान केंद्र किन्नौर की वर्ष 2026-27 की प्रस्तावित प्रसार गतिविधियों पर भी चर्चा की गई। निर्धारित कार्ययोजना के अनुसार वर्ष के दौरान 60 प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने का लक्ष्य रखा गया है, जिनमें लगभग 1,800 प्रतिभागियों को शामिल किया जाएगा। इसके अतिरिक्त ग्रामीण युवाओं के लिए 10 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर 200 युवाओं को लाभान्वित करने तथा कौशल विकास के लिए दो प्रशिक्षण शिविरों के माध्यम से 40 प्रतिभागियों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
किसानों एवं बागवानों को समयानुकूल वैज्ञानिक मार्गदर्शन उपलब्ध करवाने के लिए 450 सलाहकार सेवाएं प्रदान करने, 250 निदानात्मक भ्रमण आयोजित करने तथा वैज्ञानिकों द्वारा किसानों के खेतों के 250 भ्रमण करने की योजना है। इसके अतिरिक्त तीन खेत दिवस, एक समूह चर्चा, दो किसान संगोष्ठियां, एक किसान मेला तथा पांच प्रदर्शनियां आयोजित करने का प्रस्ताव है।
इन गतिविधियों के माध्यम से किसानों को नवीनतम कृषि तकनीकों, उन्नत उत्पादन पद्धतियों तथा विभिन्न समस्याओं के वैज्ञानिक समाधान की जानकारी उपलब्ध करवाई जाएगी। प्रस्तावित कार्ययोजना के तहत 10 विधि प्रदर्शनों के माध्यम से लगभग 100 प्रतिभागियों को लाभान्वित करने, महत्वपूर्ण दिवसों के पांच आयोजन करने तथा दो भ्रमण कार्यक्रमों के माध्यम से 50 प्रतिभागियों को अनुभवात्मक जानकारी उपलब्ध करवाने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके अलावा दो प्रौद्योगिकी सप्ताह आयोजित कर लगभग 300 प्रतिभागियों तक वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी पहुंचाने तथा 15 जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से 450 लोगों को जागरूक करने की योजना भी शामिल है। बैठक का संचालन कृषि विज्ञान केंद्र किन्नौर की सह निदेशक डॉ. नीना चौहान ने किया। उन्होंने 20वीं वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक में लिए गए निर्णयों एवं सुझावों पर की गई कार्रवाई की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में कृषि विज्ञान केंद्र किन्नौर में कुल 16 पद स्वीकृत हैं और सभी पद भरे हुए हैं। बैठक में कृषि एवं बागवानी क्षेत्र से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा करते हुए जिले में कृषि विकास की संभावनाओं, चुनौतियों और भविष्य की प्राथमिकताओं की समीक्षा की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी मार्गदर्शन और कृषि विस्तार गतिविधियों के माध्यम से किन्नौर जिले में कृषि एवं बागवानी क्षेत्र को सुदृढ़ बनाना तथा किसानों एवं बागवानों की आर्थिकी में सुधार लाना रहा।
💡 पृष्ठभूमि (Background)
21वीं वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक, जिसे नौणी विश्वविद्यालय के डॉ. धर्म पाल शर्मा ने अध्यक्षता की, कृषि और बागवानी क्षेत्र में नवीन वैज्ञानिक तकनीकों के प्रचार-प्रसार तथा उच्च गुणवत्ता वाली उपज के उत्पादन पर केंद्रित है। यह बैठक अक्तूबर 17 को सोलन के रिकांग पीओ में एकीकृत जनजातीय विकास परियोजना भवन में आयोजित हुई, और इसका उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि पद्धतियों से अवगत कराना तथा उनकी उत्पादकता बढ़ाना है। इस कदम से कृषि क्षेत्र में दक्षता और आय में वृद्धि की संभावना है, जिससे आम जनता को बेहत