नवरात्रि का तीसरा दिन आज, मां चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना कर रहे श्रद्धालु
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अक्टूबर 13, नई दिल्ली: नवरात्रि के तीसरे दिन मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां चंद्रघंटा का स्वरूप शक्ति, साहस और शांति का प्रतीक है। माथे पर अर्धचंद्र के आकार का घंटा, दस भुजाओं में अस्त्र-शस्त्र और सिंह पर सवार मां का स्वरूप भक्तों को निर्भयता और आत्मविश्वास का संदेश देता है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब महिषासुर के अत्याचार बढ़ने लगे और उसने स्वर्ग पर अधिकार करने का प्रयास किया, तब देवताओं ने त्रिदेवों से सहायता मांगी। मान्यता है कि देवताओं की सामूहिक दिव्य ऊर्जा से मां चंद्रघंटा का अवतरण हुआ। मां के हाथों में त्रिशूल, गदा, धनुष-बाण, कमंडल और कमल सहित विभिन्न दिव्य प्रतीक सुशोभित हैं, जो शक्ति, साहस और करुणा का प्रतीक माने जाते हैं।
धार्मिक मान्यता है कि मां चंद्रघंटा की आराधना से भय दूर होता है और मन में आत्मविश्वास तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। नवरात्रि के तीसरे दिन भक्त विधि-विधान से मां की पूजा करते हैं, पुष्प अर्पित करते हैं और मंत्रों का जाप कर सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना करते हैं।
मां चंद्रघंटा का स्वरूप यह संदेश देता है कि कठिन परिस्थितियों में साहस, धैर्य और संयम बनाए रखना जरूरी है। भक्त मां से जीवन की बाधाएं दूर करने, परिवार में सुख-समृद्धि बनाए रखने और सभी को शक्ति व सकारात्मकता प्रदान करने की प्रार्थना करते हैं।