अपराध

NEET-UG पेपर लीक- आरोप तय करने के मुद्दे पर सुनवाई:आरोपी के वकील बोले- वे पब्लिक सर्वेंट नहीं; न भरोसा तोड़ा, न कोई अपराध हुआ

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 23 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
NEET-UG पेपर लीक- आरोप तय करने के मुद्दे पर सुनवाई:आरोपी के वकील बोले- वे पब्लिक सर्वेंट नहीं; न भरोसा तोड़ा, न कोई अपराध हुआ

नई दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में मंगलवार को NEET-UG पेपर लीक केस में आरोप तय करने के मुद्दे पर सुनवाई हुई। प्रह्लाद विठ्ठलराव कुलकर्णी के वकील ने कहा कि कुलकर्णी पब्लिक सर्वेंट नहीं हैं, जैसा कि CBI ने आरोप लगाया है। वकील हेमंत शाह ने कहा कि किसी व्यक्ति को पब्लिक सर्वेंट घोषित करने के लिए कानून के मुताबिक उसके पद की अधिसूचना जारी होना जरूरी है।

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) पब्लिक अथॉरिटी है और पब्लिक परीक्षाएं कराती है। लेकिन कुलकर्णी के पद को लेकर ऐसी कोई अधिसूचना नहीं है। वकील ने CBI के आरोप पर भी सवाल उठाया कि कुलकर्णी समेत एक्सपर्ट्स को NEET प्रश्नपत्र तैयार करने का काम सौंपा गया था। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई काम सौंपे जाने का सवाल ही नहीं है।

न भरोसा तोड़ने का मामला बनता है और न ही कोई अपराध हुआ है। स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट स्पेशल जज (CBI) अजय गुप्ता की बेंच 13 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने के मुद्दे पर सुनवाई कर रही है। इस मामले में आज भी सुनवाई होगी, मंगीलाल बिवाल, दिनेश बिवाल और विकास बिवाल के वकील दलीलें रखेंगे। वकील ने पेपर लीक और पैसों के आरोपों पर सवाल उठाए कुलकर्णी के वकील ने कहा कि किसी भी छात्र को लीक हुआ पेपर नहीं दिया गया था।

किसी ने यह भी नहीं कहा है कि सवालों के बदले पैसे दिए गए। पैसे से जुड़ी बात विवादित है। उन्होंने कहा कि कुलकर्णी का परीक्षा प्रश्नपत्र की छपाई से कोई लेना-देना नहीं था। वकील ने कहा कि आरोपों के मुताबिक NEET-UG परीक्षा से पहले छात्रों ने कुलकर्णी के घर पर स्पेशल क्लास की थी। लेकिन रिकॉर्ड में छात्रों के उनके घर जाने का कोई सबूत नहीं है।

रिकॉर्ड में MyGate की एंट्री भी नहीं है। NTA के साथ हुए समझौते को लेकर भी दलील कुलकर्णी के वकील ने कहा कि उनके और NTA के बीच हुआ गोपनीयता प्रमाणपत्र सिर्फ एक अंडरटेकिंग है। यह केवल एक कॉन्ट्रैक्ट है। इस अंडरटेकिंग से यह पता चलता है कि काम किया गया था। धनंजय लोखंडे की ओर से एडवोकेट विक्रम सिंह ने दलीलें रखीं।

मंगलवार को स्पेशल जज (CBI) अजय गुप्ता ने आरोपियों की ओर से बहस सुनी। CBI आरोप तय करने के मुद्दे पर सोमवार को अपनी दलीलें पूरी कर चुकी है। मंगलवार की सुनवाई में प्रह्लाद कुलकर्णी, मनीषा मंधारे, तेजस हर्षद कुमार शाह, यश यादव, धनंजय लोखंडे और शुभम खैरनार के वकीलों ने बहस की।

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

📰 पूरी खबर पढ़ें (Dainik Bhaskar पर जाएं)

💡 पृष्ठभूमि (Background)

NEET-UG पेपर लीक का मामला भारत की राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा पर आधारित है, जहाँ एक कथित दस्तावेज़ को अवैध रूप से फिसलने का आरोप है। यह विषय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और परीक्षाओं की सुरक्षा पर सवाल उठाता है, जो लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित करता है। यदि आरोप सत्य सिद्ध होते हैं, तो इससे सार्वजनिक विश्वास पर गहरा असर पड़ेगा, और भविष्य की परीक्षाओं में कड़ी निगरानी और सुधार की आवश्यकता महसूस होगी। जनता को यह जानने की ज़रूरत है कि ऐसे मामलों में जवाबदेही कैसे

🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत

NEET-UG पेपर लीक के इस मामले से यह सिखने को मिलता है कि सार्वजनिक विश्वास के साथ जिम्मेदारी निभाना अनिवार्य है। जब किसी भी व्यक्ति पर सार्वजनिक पद से संबंधित अपराध का आरोप लगे, तो उसे कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से स्पष्ट करना चाहिए, ताकि न्याय और पारदर्शिता बनी रहे। समाज को चाहिए कि वह जवाबदेही और साक्ष्य-आधारित निर्णय को प्राथमिकता दे, जिससे सभी को समान रूप से न्याय मिले।

J
JKS News Desk

वॉयस ऑफ क्रांति की संपादकीय टीम आपके लिए भोपाल, मध्यप्रदेश और देश की सटीक और विश्वसनीय समाचार प्रस्तुत करती है।