नेपाल आपदा के लिए UNGA में किसको जिम्मेदार ठहराएंगे बालेन शाह? 44 देश आए साथ
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नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह इस महीने संयुक्त राष्ट्र महासभा में नेपाल में हालिया भयानक बाढ़ और उससे हुई तबाही का मुद्दा उठा सकते हैं.
नेपाल इस आपदा को जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव से जोड़ रहा है और उन देशों से जलवायु मुआवजे की मांग उठाने की तैयारी में है, जिन्हें वह बड़े पैमाने पर कार्बन डाइऑक्साइड और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार मानता है.
रिपोर्ट के मुताबिक, बालेन शाह अपने संबोधन के दौरान सबसे पहले चीन, दूसरे नंबर पर अमेरिका और तीसरे नंबर पर भारत का नाम ले सकते हैं.
नेपाल इन देशों को अधिक कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन करने वाले देशों में शामिल बताते हुए जलवायु परिवर्तन से होने वाले नुकसान के लिए मुआवजे की मांग का मुद्दा उठा सकता है. भोटेकोशी बाढ़ को जलवायु परिवर्तन से जोड़ रहा नेपाल
नेपाल ने चीन, भारत और अमेरिका को दुनिया में सबसे ज्यादा ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जित करने वाले देशों में शामिल किया है. इसी के साथ उसने बागमती प्रांत के कई जिलों में भारी तबाही मचाने वाली हालिया भोटेकोशी बाढ़ को लेकर जलवायु मुआवजे की मांग उठाई है.
नेपाल की दलील है कि देश का कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में योगदान बेहद कम है, लेकिन जलवायु परिवर्तन का असर उस पर गंभीर रूप से पड़ रहा है. खासतौर पर हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते तापमान और बदलते मौसम के कारण नेपाल प्राकृतिक आपदाओं के बढ़ते खतरे का सामना कर रहा है. भारत, चीन और अमेरिका से मांगेंगे हर्जाना?
पिछले दिनों नेपाल-चीन सीमा के पास चट्टानों और बर्फ के बड़े हिमस्खलन के बाद भोटेकोशी क्षेत्र में विनाशकारी बाढ़ आई थी. इस आपदा में कम से कम 1,127 लोगों की मौत और करीब 3,900 लोगों के लापता होने की बात कही गई है. इस मामले में काठमांडू सख्त रुख अपना रहा है.
रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाल प्रधानमंत्री बालेन शाह को संयुक्त राष्ट्र महासभा में भेजकर जलवायु परिवर्तन से जुड़ी इस आपदा और संभावित मुआवजे की मांग को अंतरराष्ट्रीय मंच पर जोर-शोर से उठाना चाहता है.
नेपाल को कई देशों का समर्थन मिलने का दावा नेपाल के हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरों का मुद्दा उठाने के बीच उसे कई देशों का समर्थन भी मिला है.
सबसे कम विकसित देशों यानी एलडीसी के 44 देशों के समूह ने इस साल होने वाले संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन COP31 में जलवायु परिवर्तन को लेकर तत्काल कदम उठाने की मांग की है. समूह ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए अनुकूलन फंड बढ़ाया जाना चाहिए.
साथ ही यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि यह पैसा उन देशों तक पहुंचे, जो जलवायु परिवर्तन से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं.
नेपाल भी इसी समूह का सदस्य है और उसका कहना है कि कार्बन उत्सर्जन में उसका योगदान बहुत कम है, लेकिन जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणामों का सामना उसे बड़े स्तर पर करना पड़ रहा है. नेपाल को 44 देशों के LDC समूह का साथ
सबसे कम विकसित देशों (LDC) का समूह संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा सम्मेलन यानी UNFCCC के तहत बातचीत करने वाला औपचारिक समूह है. इसमें अफ्रीका, एशिया-प्रशांत और कैरिबियन क्षेत्र के 44 देश शामिल हैं. यह समूह एक अरब से ज्यादा लोगों का प्रतिनिधित्व करता है. विनाशकारी बाढ़ से प्रभावित नेपाल भी इस समूह का सदस्य है.
LDC समूह हर साल होने वाली संयुक्त राष्ट्र की जलवायु वार्ताओं में एक साथ मिलकर अपनी मांगें और रणनीति सामने रखता है. दिली में हुई एलडीसी देशों की बैठक
रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल तुर्की में होने वाले संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन COP31 के लिए एजेंडा तय करने के उद्देश्य से LDC देशों के मंत्रियों, वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों और बातचीत करने वाले प्रतिनिधियों की बैठक एक से तीन सितंबर तक तिमोर-लेस्ते की राजधानी दिली में हुई.
इस बैठक में समूह की रणनीति को लेकर आपसी तालमेल बनाया गया. नेपाल में ग्लेशियर, चट्टान और बर्फ के हिमस्खलन से जुड़ी अभूतपूर्व बाढ़ के मद्देनजर गुरुवार को एक विशेष उच्चस्तरीय मंत्रिस्तरीय बैठक भी आयोजित की गई.
बैठक का समापन जलवायु परिवर्तन पर ‘दिली LDC ग्रुप मिनिस्ट्रियल डिक्लेरेशन’ को अपनाने के साथ हुआ. भारत और बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को घेरने की तैयारी
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा है कि चीन, भारत और अमेरिका जैसे देशों की जिम्मेदारी है कि वे उन कमजोर देशों को मुआवजा दें, जो ऐसे कार्बन उत्सर्जन के नतीजे भुगत रहे हैं जिनमें उनका योगदान बहुत कम रहा है.
कांतिपुर टीवी को दिए एक इंटरव्यू में खनाल ने कहा, “हम अपने कूटनीतिक ढांचे को मदद से बदलकर न्याय और मुआवजे की ओर ले जा रहे हैं.” उनके मुताबिक, नेपाल अब केवल आर्थिक मदद मांगने के बजाय जलवायु न्याय और मुआवजे के मुद्दे को प्राथमिकता दे रहा है.
UN के ‘लॉस एंड डैमेज फंड’ से भी मदद की मांग नेपाल ने तत्काल आर्थिक मदद के लिए संयुक्त राष्ट्र के ‘लॉस एंड डैमेज फंड’ यानी जलवायु परिवर्तन से होने वाले नुकसान और क्षति से निपटने वाले फंड से औपचारिक रूप से संपर्क किया है.
रिपोर्ट के मुताबिक, काठमांडू अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हालिया बाढ़ और जलवायु न्याय की अपनी मांग को प्रमुखता से उठाने की तैयारी कर रहा है. इसी कड़ी में प्रधानमंत्री बालेन शाह के संयुक्त राष्ट्र महासभा में जलवायु परिवर्तन से नेपाल को हुए नुकसान का मुद्दा उठाने की उम्मीद है.
नेपाल का तर्क है कि जलवायु परिवर्तन के लिए जिम्मेदार उत्सर्जन में उसका योगदान बहुत कम है, लेकिन हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते तापमान और बदलते पर्यावरण का असर उसे गंभीर प्राकृतिक आपदाओं के रूप में झेलना पड़ रहा है. यह भी पढ़िएः US ने ईरान में शादी वाले घर पर किया हमला, जेडी वेंस बोले- 'नागरिकों को निशाना...'
📡 स्रोत: NewsData.io