नेपाल बाढ़: 'बस पार्थिव शरीर मिल जाए...', अब छूट रही अपनों की उम्मीद
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नेपाल में आई बाढ़ ने हजारों लोगों की जिंदगी तबाह कर दी. अब तक 1125 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है और चार हजार से अधिक लोग लापता हैं. कई परिवार में तो एक भी सदस्य नहीं बचे हैं और लोग अपनों के बचने की उम्मीद खो रहे.
लापता लोगों की तलाश की दर्दनाक तस्वीर काठमांडू के अस्पताल में देखी जा सकती है. अस्पताल के बाहर लगी मिसिंग यानी गुमशुदा लोगों की तस्वीर धुंधली पड़ने लगी है. क्योंकि एक हफ्ते बाद लोगों को अपनों की सुरक्षित वापस आने की उम्मीद धुंधली पड़ती जा रही है. यहां अपनों को ढूंढने वाले लोगों में भी कमी आई है.
अस्पताल और शवगृह के बाहर जो मृतकों की तस्वीर लगी हैं, उनसे उनको पहचानना मुश्किल है लेकिन फिर भी परिवार के लोग एक-एक तस्वीर को उठाकर अपनों की तस्वीर से उसका मिलान कर रहे हैं. ताकि कहीं शरीर का कोई चिह्न मिल जाए.
काठमांडू में शवगृह यानी मोर्चरी के बाहर अपनों को तलाश रहे लोगों को वहां मौजूद लोग मोबाइल में तस्वीर दिखा रहे हैं. उनका कहना है कि हमने तो उम्मीद शुरुआती दिनों में ही छोड़ दी थी लेकिन बस इतना चाहते हैं कि कम से कम पार्थिव शरीर का ही पता चल जाए, जिससे कि हम आखिरी कर्मकांड कर सकें.
दूसरी तरफ त्रिशूली के आर्मी ट्रेनिंग सेंटर कैंप पर बॉडी बैग में डेड बॉडीज पड़ी हुई हैं. ये वो बॉडीज हैं जिन्हें ऊंचाई वाले इलाकों से मलबे के अंदर से निकाला गया है और हेलीकॉप्टर के जरिए यहां लाया गया है. अब यहां से इन्हें एम्बुलेंस में रखकर दूसरी जगह डिस्पोज किया जाएगा.
त्रिशूली में जहां पूरा शहर अचानक आई बाढ़ में बह गया, वहां एबीपी न्यूज की टीम पहुंची. एबीपी के रिपोर्टर अहमद बिलाल ने पीड़ितों से बातचीत की. यूपी के बलिया के रसड़ा के रहने वाले अशोक कुमार चौरसिया 20 साल पहले अपना घर छोड़ कर नेपाल एक बेहतर जिंदगी की तलाश में आये थे.
और इन 20 सालों में अपने और परिवार के लिए एक बेहतर जिंदगी बना ली थी लेकिन 26 अगस्त की त्रासदी में पल भर में इनकी जिंदगी ही बदल गई. अशोक कुमार चौरसिया का शुमार, नेपाल के नुवाकोट के त्रिशूली इलाके में एक बड़े कपड़ा कारोबारी में था.
इलाके में इनकी एक दो नहीं बल्कि 6 दुकानें थीं, इनके कपड़े त्रिशूली से लेकर रसुवा तक जाते थे. करोड़ों रुपये का कारोबार था लेकिन बाढ़ ने इनका मकान, दुकान सब तबाह कर दिया. यहां तक कि परिवार के दो लोगों को भी पहाड़ का मलबा अपने साथ बहा कर ले गया.
अशोक कुमार चौरसिया ने एबीपी न्यूज़ को बताया कि 4 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ है. बेटे की शादी के लिए ज़ेवर बनवाये थे और कुल 52 तोला सोना भी बाढ़ में बह गया. इन्होंने बताया कि बाढ़ से पहले मैं यहां का राजा था, किसी की औकात नहीं थी कि हमको कोई कुछ कह सके लेकिन आज मैं भिखारी बन गया हूं.
अशोक कुमार चौरसिया के भाई ने रोते एबीपी न्यूज़ को बताया कि मेरी पत्नी ऊषा देवी और 20 साल का बेटा राहुल बाढ़ में बह गए. मैं उस वक्त घर पर नहीं था इसलिए उन्हें बचा नहीं पाया और सारी जिंदगी इस बात का मलाल रह कि काश मैं उस दिन घर से बाहर नहीं जाता टहलने तो आज मेरा परिवार मेरे साथ होता.
📡 स्रोत: NewsData.io