नेपाल में बाढ़ के बाद अब भूकंप का झटका, भोटेकोशी की नई झील से मंडराया बड़ा खतरा

Nepal Earthquake: नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से जूझ रहे लोगों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. इसी बीच भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए, जिससे लोगों की चिंता और बढ़ गई.
रिक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 3.2 मापी गई. हालांकि, इस झटके के कारण किसी बड़े नुकसान की जानकारी सामने नहीं आई है. लेकिन नेपाल के लिए परेशानी सिर्फ भूकंप तक सीमित नहीं है. भोटेकोशी नदी के पास पानी का बहाव बाधित होने के कारण एक नई झील बन गई है.
इसमें लगातार पानी जमा हो रहा है और इसके टूटने की स्थिति में नदी के निचले इलाकों में अचानक बाढ़ आने का खतरा पैदा हो सकता है. नई झील में तेजी से जमा हो रहा पानी रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी के स्रोत के नजदीक बनी इस झील पर प्रशासन की लगातार नजर बनी हुई है.
चीन की ओर से मिली जानकारी के अनुसार, गुरुवार सुबह तक झील में लगभग 20 लाख क्यूबिक मीटर पानी जमा हो चुका था. अनुमान है कि आने वाले तीन दिनों में इसमें करीब 30 लाख क्यूबिक मीटर पानी और पहुंच सकता है. अगर पानी का दबाव बढ़ने के बाद झील टूटती है, तो नीचे की ओर बसे इलाकों में अचानक तेज बाढ़ आ सकती है.
इसी खतरे को देखते हुए स्थानीय लोगों को नदी के किनारे जाने से बचने की सलाह दी गई है.
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यात्रियों के अलावा सुरक्षा बलों और राहत-बचाव कार्य में लगे कर्मचारियों को भी नदी के आसपास सतर्क रहने की हिदायत दी गई है. अधिकारी झील के जलस्तर और आसपास की स्थिति पर लगातार निगरानी कर रहे हैं.
कोशिश यही है कि यदि हालात बिगड़ते हैं तो समय रहते लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके. भोटेकोशी क्षेत्र में पहले ही भारी तबाही हो चुकी है. नेपाल-तिब्बत सीमा के पास हुए भूस्खलन के बाद नदी का बहाव प्रभावित हुआ और अचानक आई बाढ़ ने आसपास के क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया.
इस आपदा में अब तक 392 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है, जबकि करीब 1,500 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं. राहत और बचाव अभियान जारी है और प्रभावित इलाकों में लोगों को सुरक्षित निकालने की कोशिश की जा रही है.
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हालांकि, बाद में सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों और जांच से संकेत मिला कि नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर और उससे जुड़ी चट्टानों के टूटने की घटना ने इस संकट को जन्म दिया था. ग्लेशियर के टूटने के बाद बड़ी मात्रा में बर्फ, पत्थर और मलबा नीचे की ओर आया।
इससे नदी का रास्ता प्रभावित हुआ और पानी के तेज बहाव ने आसपास के इलाकों में भारी नुकसान पहुंचाया. अब उसी क्षेत्र में दोबारा पानी जमा होने से प्रशासन और स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ गई है.
फिलहाल अधिकारियों की प्राथमिकता झील की स्थिति पर नजर रखने और किसी भी संभावित बाढ़ से पहले निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित करना है. ये भी पढ़ें: Explainer: नेपाल में तबाही के पीछे न तो भूकंप था न ही GLOF,सामने आई कहर की असली वजह ये भी पढ़ें: नेपाल में फिर मचेगी तबाही!
चीन ने दी नई चेतावनी, अब ये झील बनेगी 'काल'
📡 स्रोत: NewsData.io