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नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से भारी तबाही, 45 मकान और 6 पुल बहे; बिहार पर भी मंडराया खतरा

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 12 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से भारी तबाही, 45 मकान और 6 पुल बहे; बिहार पर भी मंडराया खतरा

नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन ने एक बार फिर भारी नुकसान पहुंचाया है.

गोरखा जिले में रविवार तड़के करीब 4:30 बजे बूढ़ी गंडकी नदी में अचानक बाढ़ आने से 45 मकान और छह पुल बह गए.

इस प्राकृतिक आपदा से जलविद्युत परियोजनाओं और बिजली-संचार व्यवस्था को भी नुकसान पहुंचा है. सैलाब के बाद 10 लोगों के लापता होने की खबर है.

वहीं, नेपाली सेना ने 9 विदेशी नागरिकों समेत 82 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है. घटना के बाद प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान शुरू कर दिया गया है.

प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित ऊंचाई वाले स्थानों पर जाने की सलाह दी है.

नेपाल में आई इस बाढ़ के कारण बिहार में भी बाढ़ का खतरा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.

भूस्खलन के बाद नदी का रास्ता रुका, फिर अचानक आया सैलाब गोरखा जिले के मुख्य जिला अधिकारी धर्मेंद्र कुमार मिश्रा के मुताबिक, रविवार तड़के बाढ़ आने की सूचना मिली थी.

चुमनुब्री ग्रामीण नगरपालिका-6 क्षेत्र से नीचे की ओर बढ़े पानी ने नदी किनारे बसे कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया.

हालांकि, शुरुआती जानकारी के अनुसार, इस घटना में किसी की मौत या घायल होने की सूचना नहीं मिली है.

राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण की प्रवक्ता शांति महत ने बताया कि चुमनुब्री क्षेत्र में लोकपा और चुम्लिंग के बीच बड़े पैमाने पर भूस्खलन हुआ था. इसके कारण नदी का पानी आगे नहीं बढ़ सका.

पानी जमा होने और बाद में अचानक तेज बहाव शुरू होने से बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई.

चुमनुब्री ग्रामीण नगरपालिका के अध्यक्ष नीमा लामा के अनुसार, भूस्खलन से चुमके खोला नामक जलधारा का प्रवाह भी बाधित हुआ था.

इसके बाद पानी का दबाव बढ़ा और आसपास के इलाकों में अचानक सैलाब आ गया. 45 मकान और छह पुल बाढ़ में बहे बूढ़ी गंडकी नदी में आई बाढ़ से सल्लेरी, पायूका और जगत जैसे इलाकों में नदी किनारे बने मकानों को भारी नुकसान पहुंचा है.

नेपाली मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, बाढ़ में 45 मकान और छह पुल बह गए.

इससे स्थानीय लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं और प्रभावित क्षेत्रों में आवागमन भी बाधित हुआ है.

सैलाब की चपेट में आने से 341 मेगावाट की जलविद्युत परियोजना के मुख्य कैंप और निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाले उपकरण भी बह गए.

इसके अलावा, दो टेलीफोन टावर और बिजली के 50 खंभों को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है। इससे बिजली आपूर्ति और संचार व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है. 10 लोग लापता, नेपाली सेना ने संभाला मोर्चा बाढ़ के बाद 10 लोगों के लापता होने की सूचना है.

उनकी तलाश और प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए बचाव अभियान चलाया जा रहा है. नेपाली सेना ने भी अपनी टुकड़ी को खोज और बचाव कार्य में लगाया है.

राहत अभियान में नेपाली सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के कुल 437 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है. इसके साथ ही चार हेलिकॉप्टरों की मदद ली जा रही है.

नेपाल पुलिस के 50 अतिरिक्त कर्मियों की टीम को भी तैयार रखा गया है. अब तक 82 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है. इनमें नौ विदेशी नागरिक भी शामिल हैं.

प्रशासन की कोशिश है कि नदी किनारे फंसे लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित निकाला जाए और नुकसान का आकलन किया जा सके.

नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह बाढ़ के बाद प्रशासन ने बूढ़ी गंडकी नदी के आसपास रहने वाले लोगों के लिए चेतावनी जारी की है.

लोगों को नदी के करीब जाने से बचने और पानी का बहाव बढ़ने की स्थिति में ऊंचे तथा सुरक्षित स्थानों पर जाने को कहा गया है.

अधिकारियों को आशंका है कि तेज बहाव के कारण नदी किनारे बसे अन्य इलाकों में भी नुकसान हो सकता है. ऐसे में राहत और बचाव दल स्थिति पर नजर रख रहे हैं.

प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की सुरक्षा और जरूरी मदद पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिकता बनी हुई है.

बिहार में भी बढ़ सकती है बाढ़ की आशंका नेपाल में आई बाढ़ का असर भारत के बिहार राज्य पर भी पड़ सकता है. इसकी वजह नदियों का आपस में जुड़ा होना है. अधिकारियों के अनुसार, बूढ़ी गंडकी नदी आगे चलकर त्रिशूली नदी से मिलती है.

इसके बाद दोनों नदियों का पानी देवघाट के पास नारायणी नदी में पहुंचता है.

नारायणी नदी भारत में गंडक के नाम से प्रवेश करती है और आगे गंगा नदी में मिल जाती है.

ऐसे में यदि नेपाल से आने वाले पानी का बहाव बढ़ता है, तो बिहार के नदी किनारे वाले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है. फिलहाल बिहार में संभावित असर को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है.

हालांकि, किन जिलों में कितना प्रभाव पड़ेगा, इसका आकलन नदी के जलस्तर और पानी के बहाव की स्थिति के आधार पर ही किया जा सकेगा.

📡 स्रोत: NewsData.io

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