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नेपाल की बाढ़... और इंसानियत का सबक

लेखक: Muhammad Naseem अंतिम अपडेट: 27 अगस्त 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
नेपाल की बाढ़... और इंसानियत का सबक

नेपाल आज एक बहुत बड़े इम्तिहान से गुज़र रहा है। 26 अगस्त 2026 की भीषण बाढ़ ने न जाने कितने घर उजाड़ दिए, कितने बच्चे यतीम हो गए, कितनी माँओं की गोद सूनी हो गई और कितने लोग बेघर हो गए। मेरा दिल नेपाल के हर उस इंसान के साथ है जिसने इस आफ़त में अपना कोई अपना खोया है।

अल्लाह तआला उन्हें सब्र अता फ़रमाए और नेपाल में अमन, सुकून और रहमत के हालात पैदा करे। लेकिन इस वाक़िए से हमें अपने गिरेबान में भी झाँकना चाहिए। कुछ महीने पहले नेपाल में *मुसलमानों के साथ मारपीट, दुकानों पर हमले और डर का माहौल बनने की खबरें सामने आई थीं। उस वक़्त सोशल मीडिया पर कुछ लोग खुशी मना रहे थे।

कोई लिख रहा था, "देखो, नेपाल हिंदू राष्ट्र बन गया।" कोई कह रहा था, "हमारे भाइयों ने कमाल कर दिया।" आज मैं उन्हीं लोगों से पूछना चाहता हूँ—क्या किसी बेगुनाह पर ज़ुल्म करना किसी धर्म की तालीम है? क्या किसी की दुकान जलाना, किसी का घर उजाड़ना, किसी को उसके मज़हब की वजह से डराना इंसानियत है? क़ुरआन कहता है:

«"अल्लाह इंसाफ़, एहसान और रिश्तेदारों के साथ भलाई का हुक्म देता है और बेहयाई, बुराई और ज़ुल्म से रोकता है।" और हमारे नबी हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ ने फ़रमाया: «"रहम करने वालों पर रहमान रहम फ़रमाता है। ज़मीन वालों पर रहम करो, आसमान वाला तुम पर रहम करेगा।"» यही असली दीन है। यही असली इंसानियत है।

याद रखिए, प्राकृतिक आफ़तें इंसानों को उनकी कमज़ोरी का एहसास कराती हैं। जब बाढ़ आती है तो वह हिंदू और मुसलमान देखकर नहीं आती। पानी घरों की दीवारों से मज़हब नहीं पूछता। इसलिए किसी की मुसीबत पर खुश होना इंसानियत के ख़िलाफ़ है। आज नेपाल को हमारी दुआओं की भी ज़रूरत है और मदद की भी।

अगर हम किसी पर हुए ज़ुल्म पर ताली बजाएँगे, तो समाज में नफ़रत ही बढ़ेगी। लेकिन अगर हम दुख में एक-दूसरे का हाथ थामेंगे, तो यही इंसानियत की जीत होगी। एक और बात—नेपाल की इस बाढ़ का असर भारत के बिहार के इलाक़ों, खासकर पश्चिम चंपारण, सीतामढ़ी, सुपौल और कोसी के इलाक़ों तक पहुँचने की आशंका जताई जा रही है।

इसलिए हमें नफ़रत नहीं, बल्कि तैयारी, दुआ और एक-दूसरे की मदद की ज़रूरत है। आइए दुआ करें— ऐ अल्लाह! नेपाल के लोगों पर अपनी रहमत नाज़िल फ़रमा। जो लोग अपने घर, अपने बच्चे और अपने अपनों को खो बैठे हैं उन्हें सब्र अता फ़रमा। हमारे दिलों से नफ़रत निकाल दे और हमें इंसानियत, इंसाफ़ और मोहब्बत का रास्ता दिखा। आमीन।

M
Muhammad Naseem

कुमारी प्रियंका वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता एवं चिंतक हैं। जिनका समाज के विभिन्न हिस्सों और समस्याओं पर गहरा अध्ययन है।