नेपाल बाढ़: सुरंगों में फंसे हैं 900 मजदूर, रेस्क्यू में जुटी भारत की टीम

नेपाल की भोटेकोशी और त्रिशूली नदी घाटियों में आई भीषण बाढ़ और मलबे के तेज प्रवाह ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है. बाढ़ के बाद कई जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में सैकड़ों मजदूर फंस गए हैं, जिन्हें सुरक्षित बाहर निकालने के लिए लगातार बचाव अभियान चलाया जा रहा है. करीब 900 मजदूरों के अब भी लापता होने की जानकारी है.
इनमें नेपाली, भारतीय, चीनी और दक्षिण कोरियाई कामगार शामिल हैं. वहीं, अलग-अलग स्थानों से 191 से 361 मजदूरों को अब तक सुरक्षित निकाले जाने की सूचना है. सुरंगों में मलबा भरने से बढ़ी मुश्किल
बाढ़ के बाद सबसे गंभीर स्थिति रसुवा जिले में स्थित अपर त्रिशूली-1 और त्रिशूली-3ए जलविद्युत परियोजनाओं में बनी हुई है. त्रिशूली-3ए की सुरंग में बड़ी मात्रा में मिट्टी और मलबा भर गया है. बचाव दल सुरंग के ऊपरी हिस्से में छेद कर अंदर हवा, रोशनी और कैमरा पहुंचाने की कोशिश कर चुका है.
अब इस छेद को और बड़ा कर मैनहोल बनाने और उसके जरिए बचाव दल को सुरंग के अंदर भेजने की तैयारी की जा रही है. कुछ स्थानों पर एवरेस्ट के अनुभवी गाइड और पर्वतारोही भी सुरंगों में पहुंचकर बचाव कार्य में मदद करने की कोशिश कर चुके हैं, लेकिन भारी कीचड़ और मलबे के कारण वे ज्यादा अंदर तक नहीं जा सके.
थर्मल ड्रोन से भी तलाश, नहीं मिले जीवन के संकेत लापता मजदूरों की तलाश में नेपाल सेना थर्मल ड्रोन की भी मदद ले रही है. कुछ स्थानों पर ड्रोन से संभावित जीवन के संकेत तलाशे गए, लेकिन वहां कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिला.
इसके बावजूद सुरंगों में फंसे मजदूरों तक पहुंचने के लिए बचाव अभियान लगातार जारी है. भारी मलबे और खराब मौसम के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में लगातार मुश्किलें आ रही हैं.
बारिश और नदी का बढ़ता जलस्तर भी बचाव दल के लिए चुनौती बना हुआ है. भारत की 11 सदस्यीय टीम मौके पर पहुंची फंसे मजदूरों को निकालने के लिए भारत की 11 सदस्यीय टीम भी नेपाल पहुंच चुकी है. इस टीम में सुरंग विशेषज्ञों के साथ डॉक्टर और पैरामेडिक शामिल हैं.
भारत की टीम स्थानीय सुरक्षा बलों और बचावकर्मियों के साथ मिलकर सुरंगों में फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है. वहीं, चीन की ओर से भी बचाव अभियान के लिए तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है.
अंतरराष्ट्रीय सहयोग के बावजूद खराब मौसम और सुरंगों में जमा भारी मलबे के कारण अभियान की गति धीमी बनी हुई है. बाढ़ से नेपाल की जलविद्युत व्यवस्था पर भी असर भोटेकोशी और त्रिशूली नदी घाटियों में आई इस प्राकृतिक आपदा ने नेपाल की जलविद्युत परियोजनाओं की संवेदनशीलता को भी सामने ला दिया है.
देश की अर्थव्यवस्था और बिजली उत्पादन में जलविद्युत परियोजनाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है, लेकिन बाढ़ और मलबे के प्रवाह से कई परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा है. यह भी पढ़िएः 'विविधता प्राकृतिक है और एकता सत्य', न्यूयॉर्क में बोले मोहन भागवत बाढ़ के कारण नेपाल की बिजली उत्पादन क्षमता का एक बड़ा हिस्सा प्रभावित हुआ है.
ऐसे में एक ओर जहां सुरंगों में फंसे मजदूरों को सुरक्षित निकालना सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर इस आपदा ने नेपाल की जलविद्युत आधारित अर्थव्यवस्था के सामने भी गंभीर संकट खड़ा कर दिया है. फिलहाल नेपाली सुरक्षा बलों के साथ भारत और चीन की टीमें भी बचाव अभियान में जुटी हैं.
मजदूरों की तलाश के लिए सुरंगों में मलबा हटाने और सुरक्षित रास्ता बनाने का काम लगातार जारी है. 20 हजार सुरक्षाकर्मी तैनात, हेलीकॉप्टर से पहुंचाई जा रही राहत नेपाल सरकार ने खोज और बचाव अभियान के लिए करीब 20 हजार सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया है.
फंसे लोगों को निकालने और प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री पहुंचाने के लिए हेलीकॉप्टर लगातार उड़ान भर रहे हैं. नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने शनिवार को बताया कि अब तक 4,500 से अधिक लोगों को बचाया जा चुका है और खोज तथा पुनर्वास अभियान जारी है. उन्होंने कहा कि नेपाल अभी भी 'हाई अलर्ट' पर है.
नेपाल के मौसम विभाग ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में गरज के साथ फिर बारिश होने की चेतावनी दी है. इससे राहत और बचाव अभियान प्रभावित होने की आशंका है.
📡 स्रोत: NewsData.io