नेपाल में बूढ़ी गंडकी नदी में बाढ़, 35 से अधिक मकान और पुल बहे
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अक्टूबर 11, नई दिल्ली: नेपाल के गोरखा जिले में रविवार तड़के बूढ़ी गंडकी नदी में अचानक आई बाढ़ से भारी नुकसान हुआ है। बाढ़ में 35 से अधिक मकान और पुल बह गए, जबकि 412.09 मेगावॉट की कुल क्षमता वाली चार जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं। राहत और बचाव अभियान जारी है तथा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।
गोरखा जिले की चुमनुब्री ग्रामीण नगरपालिका से होकर बहने वाली बूढ़ी गंडकी नदी में बाढ़ से दोभान, घट्टेखोला, जगत और सल्लेरी सहित कई इलाके प्रभावित हुए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, उत्तरी गोरखा के कई क्षेत्रों में मकान बह गए हैं।
बाढ़ से प्रभावित चार जलविद्युत परियोजनाओं में 341 मेगावॉट की बूढ़ी गंडकी, 24.5 मेगावॉट की दोभान खोला, 30.59 मेगावॉट की यारू खोला और 16 मेगावॉट की माछा खोला परियोजनाएं शामिल हैं।
341 मेगावॉट की बूढ़ी गंडकी जलविद्युत परियोजना का मुख्य कैंप क्षेत्र बाढ़ की चपेट में आ गया। परियोजना स्थल पर मौजूद कुछ निर्माण उपकरण भी बह गए।
दोभान खोला जलविद्युत परियोजना के कैंप क्षेत्र में कुछ घर क्षतिग्रस्त हो गए, जबकि परियोजना स्थल के पास बना बेली ब्रिज बह गया।
यारू खोला परियोजना के निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाले बेली ब्रिज को भी नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा निर्माण सामग्री और उपकरण बह गए।
माछा खोला जलविद्युत परियोजना तक जाने वाली सड़क और पुल भी क्षतिग्रस्त हो गए हैं।
अधिकारियों ने नदी किनारे रहने वाले लोगों से ऊंचे स्थानों पर जाने की अपील की है। नदी में अचानक जलस्तर बढ़ने के कारणों का अभी पता नहीं चला है। स्थानीय लोगों को आशंका है कि चुमनुब्री-6 में लोकपा और चुमलिंग के बीच बूढ़ी गंडकी की सहायक नदी स्यार का प्रवाह बाधित होने से बाढ़ आई हो सकती है।
अधिकारियों के अनुसार, नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। राहत सामग्री पहुंचाने और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने के लिए हेलीकॉप्टर तैनात किए गए हैं। नेपाल पुलिस, सशस्त्र पुलिस बल और स्थानीय प्रशासन की टीमें बचाव कार्य में जुटी हैं।
नेपाल में बाढ़ के हालात को देखते हुए भारत में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। भारत-नेपाल सीमा के आसपास तथा बिहार और उत्तर प्रदेश में गंडक नदी के किनारे बसे निचले इलाकों के अधिकारियों को सतर्क रहने और जलस्तर तथा पानी के बहाव की लगातार निगरानी करने को कहा गया है।
अधिकारियों को जरूरत पड़ने पर समय रहते आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। अनुमान है कि भारतीय सीमा तक पहुंचने के दौरान बाढ़ के पानी की तीव्रता कम हो सकती है, जिससे भारत में इसका प्रभाव सीमित रहने की संभावना है।
नेपाल में जलस्तर में बदलाव के कारण बिहार के वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बैराज में भी जलस्तर में मामूली वृद्धि होने की संभावना जताई गई है।
रविवार की बाढ़ ने 26 अगस्त को भोटे कोशी और त्रिशूली नदियों में आई विनाशकारी बाढ़ की यादें ताजा कर दीं। उस बाढ़ से कई बस्तियां प्रभावित हुई थीं और बूढ़ी गंडकी नदी बेसिन तथा उसकी सहायक नदियों के आसपास स्थित जलविद्युत परियोजनाओं के पुलों, सड़कों और अन्य बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा था।
🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत
बाढ़ ने गोरखा के जीवन को तोड़ दिया, पर यह हमें याद दिलाता है कि प्रकृति के साथ सहजीवन जरूरी है। जल संरक्षण, तटीय योजनाएँ और सामुदायिक चेतावनी प्रणालियाँ अपनाकर हम भविष्य में ऐसी आपदाओं को कम कर सकते हैं। साथ ही, जब आपदाएँ आएँ, तो परस्पर सहायता और सहानुभूति से नयी आशा पैदा होती है। हमें मिलकर सुरक्षित भविष्य का निर्माण करना चाहिए।