Nepal Floods: हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट साइटों के 573 कर्मचारी अभी भी लापता, 361 को किया गया रेस्क्यू

Nepal Floods: नेपाल में बुधवार (26 अगस्त) आई बाढ़ ने भारी कहर बरपाया. जिसकों 650 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. जबकि 2400 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं. इनमें 11 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स साइटों के 573 कर्मचारी भी शामिल हैं. जिनसे बाढ़ आने के बाद से कोई पता नहीं चला है और ना ही उनसे कोई संपर्क हो पाया है.
बता दें कि नेपाल के रसुवा और नुवाकोट जोंलों में बुधवार को आई अचानक बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट साइटों और सुरंगें हैं. जिनमें कम से कम 573 कर्मचारी फंसे हुए हैं या उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है.
नेपाल में कुदरत का ये कहर बर्फ, चट्टान और पानी की एक विशाल लहर के ल्हेन्डे-भोटे कोशी-त्रिशूली नदी प्रणाली से होकर गुजरने के कुछ दिनों बाद देखने को मिला है. 11 प्रोजेक्ट साइटों के 934 कर्मचारी थे लापता बता दें कि नेपाल सरकार के डेटा के मुताबिक, शुक्रवार देर रात तक कम से कम 11 प्रोजेक्ट साइटों पर 934 कर्मचारी लापता थे.
इनमें से 361 लोगों को बचाव दल ने रेस्क्यू कर लिया या वे खुद बाहर निकल आए. हालांक बारी कर्मचारियों का अभी तक कुछ पता नहीं चला है.
इनमं अधिकांश कर्मचारी चार हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स से जुड़े हुए हैं. #WATCH | Nepal: Rescue operations continue at Hydropower Tunnel in Trishuli amid the flash floods in the country. (Source: Nepal PMO) pic.twitter.com/oMmCdjMjLO — ANI (@ANI) August 30, 2026 कर्मचारियों में ज्यादातर भारतीय नागरिक बता दें कि इन प्रोजेक्ट्स में काम करने वालों में अक्सर विदेशी, जिनमें ज्यादातर भारतीय शामिल हैं.
कुछ प्लांट्स के अधिकारियों का कहना है कि लापता लोगों की संख्या इससे भी ज्यादा हो सकती है. उनका कहना है कि 11 में से पांच साइटें ऐसी हैं जो अभी बन रही हैं और वहां ऐसे कर्मचारी हो सकते हैं जिनका कोई रिकॉर्ड नहीं है.
नेपाल के ऊर्जा, जल संसाधन और सिंचाई मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि फंसे हुए लोगों में भारतीयों के अलावा नेपाल, दक्षिण कोरिया, चीन और जर्मनी के नागरिक भी शामिल हैं. आंकड़ों के मुताबिक, फंसे हुए ज्यादातर लोग चार प्रोजेक्ट्स पर थे. इनमें अपर त्रिशूली 1 (216MW) में कम से कम 322 लोगों के लापता होने की खबर है.
अपर त्रिशूली 3B में 122, अपर त्रिशूली 3A में 43 और रसुवागढ़ी हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट (111MW) में 44 लोग लापता हैं. भारत ने खास टीमों के साथ तेज किया बचाव अभियान वहीं भारत ने शुक्रवार को राहत सामग्री ले जाने वाली तीसरी उड़ान भेजी, जिसमें मेडिकल और टनल (सुरंग) के जानकारों की 11 सदस्यों वाली एक खास टेक्निकल टीम भी शामिल थी.
काठमांडू में भारतीय दूतावास ने बताया कि इस टीम ने दिन के समय प्रभावित हाइड्रोपावर सुरंगों का मौके पर जाकर जायजा लिया.
दूतावास ने एक बयान में कहा, "भारत की एक खास टेक्निकल टीम ने अचानक आई बाढ़ से प्रभावित इलाके में हाइड्रोपावर सुरंगों का मौके पर जाकर जायजा लिया, जिससे फंसे हुए लोगों की जल्द खोज और बचाव में मदद मिलेगी." #WATCH | EAM Dr S Jaishankar tweets, "The 4th flight from India with 11 tonne assistance is now airborne...
Additionally, 16-trucks carrying equipment for a 230 feet Single Lane Modular Steel Bridge have reached Nepal. Equipment for installation of seven more Bailey bridges will... pic.twitter.com/XFmKINZNKT — ANI (@ANI) August 29, 2026 ये भी पढ़ें: Explainer: आखिर कब पटरी पर लौटेगा नेपाल?
अर्थव्यवस्था पर बाढ़ की बड़ी मार, पुनर्निर्माण में इकोनॉमी के 10वें हिस्से जितना खर्च नेपाल के लिए रवाना हुई चौथी फ्लाइट इस बीच राहत सामग्री के साथ चौथी फ्लाइट भी नेपाल पहुंच गईं. विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने एक्स पर एक पोस्ट किया. जिसमें उन्होंने लिखा, "भारत से 11 टन राहत सामग्री लेकर चौथी उड़ान अब रवाना हो चुकी है.
इसके अलावा, 230 फीट लंबे सिंगल-लेन मॉड्यूलर स्टील ब्रिज के लिए जरूरी सामान लेकर 16 ट्रक नेपाल पहुंच चुके हैं. सात और बेली ब्रिज लगाने के लिए भी जल्द ही सामान भेजा जाएगा. इन्हें लगाने के लिए टेक्निकल टीमें भी जल्द ही पहुंचने की उम्मीद है.
अब तक कुल 68.5 टन राहत सामग्री काठमांडू पहुंचाई जा चुकी है, जिसमें जरूरी दवाएं, पोर्टेबल जनरेटर सेट, खाने के पैकेट, पानी साफ करने वाली गोलियां और टेक्निकल उपकरण शामिल हैं." ये भी पढ़ें: ग्लेशियल झीलों की बढ़ती संख्या ने बढ़ाई चिंता, ‘टाइम बम’ बन रहीं झीलें, भारत पर मंडरा रहा बड़ा खतरा!
📡 स्रोत: NewsData.io