Nepal Floods: नेपाल में आई बाढ़ में मरने वालों की संख्या 900 के पार, अभी भी करीब 4000 लोग लापता
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →
Nepal Floods: पड़ोसी देश नेपाल में अचानक आई बाढ़ में मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. बीते बुधवार को आई इस बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है. एक सप्ताह गुजर जाने के बाद भी सर्च ऑपरेशन अभी भी पूरा नहीं हुआ है.
क्यों कि करीब 4000 लोग अभी भी लापता है. इस आपदा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 939 पहुंच गई हैं. जबकि 3925 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं. जिनकी आज भी तलाश की जा रही है. नेपाल के आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने सोमवार को यह जानकारी दी. बचाव अभियान का आज यानी मंगलवार (1 सितंबर) को सातवां दिन है.
उधर चीन के सरकारी मीडिया ने पहले तिब्बत में 16 लोगों की मौत और 546 लोगों के लापता होने की खबर दी थी, जिससे पूरे इलाके में इस आपदा से मरने वालों की कुल संख्या कम से कम 955 और लापता लोगों की संख्या 4,471 हो गई है.
लापता लोगों में 592 विदेशी नागरिक भी शामिल नेपाल में आए सैलाब में मरने वालों में विदेशी नागरिक भी शामिल है. जबकि लापता लोगों में 592 विदेशी नागरिक बताए जा रहे हैं. वहीं हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के लापता कर्मचारियों की संख्या 639 बताई जा रही है. जो पहले 933 बताई गई थी.
नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी ने बताया कि 3,333 नेपाली नागरिकों का कोई पता नहीं चल पाया है. नुवाकोट जिले में 1,158 लोगों के लापता होने की खबर है, जबकि पड़ोसी रसुवा जिले में 865 लोगों का कोई पता नहीं है. लापता लोगों में नेपाली सेना के 45 जवान, 38 पुलिस अधिकारी और 18 कस्टम व आव्रजन अधिकारी भी शामिल हैं.
नदी में बहकर यूपी तक पहुंचे कई शव पड़ोसी देश भारत में, उत्तर प्रदेश के अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने नेपाल से बहकर आने वाली नदियों से 17 शव बरामद किए हैं, जिनके बाढ़ का शिकार होने की आशंका है. इन शवों की पहचान करने की कोशिशें जारी हैं और इन्हें आधिकारिक तौर पर मरने वालों की सूची में शामिल नहीं किया गया है.
पीएम बालेन्द्र शाह ने लोगों से की ये अपील वहीं नेपाली प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने कहा कि हिमालय में आई यह जानलेवा बाढ़ "कोई आम" आपदा नहीं थी. उन्होंने इस त्रासदी को जलवायु परिवर्तन से बढ़ते खतरों से जोड़ते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक कदम उठाने की अपील की.
चीन-नेपाल सीमा के पास ग्लेशियर के ढहने से बर्फीले पानी, बर्फ और मलबे का भारी सैलाब आया. इस आपदा में कम से कम 939 लोगों की मौत हुई है और लगभग 4,500 लोग लापता हैं, जबकि अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि पुनर्निर्माण की लागत अरबों डॉलर तक पहुंच सकती है.
पीएम बालेंद्र शाह ने सोमवार देर रात सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, "रसुवा में भोटे कोशी नदी में आई बाढ़ कोई आम बाढ़ नहीं थी." उन्होंने कहा, "यह इस इलाके की बड़ी आपदाओं में से एक थी, जो हिमालयी क्षेत्र में बर्फ और हिमखंडों के खिसकने (एवलांच) से आई थी." हालांकि इसके ढहने की असल वजह अभी साफ नहीं है.
ज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से दुनिया भर में ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं और ऐसी आपदाओं का खतरा बढ़ रहा है. ग्लोबल तापमान बढ़ने के साथ ही हिमालय का इलाका भी तेजी से गर्म हो रहा है. ये भी पढ़ें: DNA सैंपल, एयरटाइट बैग... नेपाल कैसे करेगा बाढ़ में जान गंवाने वाले लोगों की पहचान?
पीएम शाह ने कहा, "यह घटना बताती है कि जलवायु परिवर्तन के साथ-साथ हिमालयी क्षेत्र में हमारे सामने आने वाले खतरे भी बढ़ रहे हैं." उन्होंने यह भी कहा कि इस क्षेत्र को सतर्क रहने की जरूरत है. बता दें कि लगभग 3 करोड़ की आबादी वाला नेपाल मुख्य रूप से एक ग्रामीण देश है.
ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ावा देने वाली ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में इसका योगदान बहुत कम रहा है, लेकिन फिर भी यह इसके विनाशकारी नतीजों के प्रति बहुत ज्यादा संवेदनशील है. ये भी पढ़ें: नेपाल में बाढ़ के पीछे मलबे का कहर, ISRO की तस्वीरों ने खोला बड़ा राज; भारत के इन राज्यों तक बढ़ा खतरा
📡 स्रोत: NewsData.io