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Nepal में Ghatasthapana के साथ 10-दिवसीय बड़ा Dashain उत्सव शुरू

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 12 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
Nepal में Ghatasthapana के साथ 10-दिवसीय बड़ा Dashain उत्सव शुरू

(शिरीष बी.

प्रधान) काठमांडू, 11 अक्टूबर नेपाल में रविवार को 10-दिवसीय हिंदू त्योहार विजयादशमी की शुरुआत हुई, जिसे ‘बड़ा दशईं’ के नाम से भी जाना जाता है। यह त्योहार आश्विन महीने के शुक्ल पक्ष के पहले दिन शुरू होता है। ‘दशईं’ के पहले दिन रविवार को ‘घटस्थापना’ की गई। इस दिन श्रद्धालुओं ने देवी दुर्गा के नौ रूपों में से एक शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की।

अन्य आठ देवियां- ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री हैं। पहले दिन ‘जमारा’ तैयार किया जाता है। इसके लिए रेत और मिट्टी से भरे मिट्टी के पात्र में जौ के बीज बोए जाते हैं, जिनसे अंकुर निकलते हैं। दस-दिवसीय त्योहार के दौरान शक्ति की देवी ‘दुर्गा भवानी’ की पूजा-अर्चना की जाती है।

वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ बसंतपुर दरबार स्क्वायर स्थित पुराने महल के हनुमानढोका दशईं घर में भी शुभ ‘जमारा’ उगाने की प्रक्रिया शुरू होती है। इस साल 21 अक्टूबर को पड़ने वाले दशहरा के दिन पात्र में उगे जौ के अंकुरों को चावल और दही के साथ मिलाकर ‘टीका’ बनाया जाएगा और उसे माथे पर लगाया जाएगा।

इस अवसर पर बड़े-बुजुर्ग अपने से छोटों को जौ के अंकुर देकर आशीर्वाद देते हैं। नेपाल का सबसे महत्वपूर्ण त्योहार दशईं या विजयादशमी बुराई पर अच्छाई, असत्य पर सत्य और अंधकार पर प्रकाश की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। राष्ट्रीय त्योहार मनाने के लिए सरकारी कार्यालय एक सप्ताह तक बंद रहते हैं, जबकि शिक्षण संस्थानों में करीब दो सप्ताह की छुट्टी रहती है।

इस त्योहार को ‘नवरात्र’ के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इसे नौ रातों और दस दिनों तक मनाया जाता है। इस दौरान नेपाल में भगवती के विभिन्न शक्तिपीठ मंदिरों में पशुओं की बलि भी दी जाती है।

📡 स्रोत: NewsData.io

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💡 पृष्ठभूमि (Background)

यह खबर नेपाल में बड़े दशईं के 10‑दिनीय उत्सव की शुरुआत को दर्शाती है, जिसमें घटस्थापना के दिन देवी शैलपुत्री की पूजा की गई। बड़े दशईं को शुक्ल पक्ष के पहले दिन मनाया जाता है और यह नेपाली हिंदू परंपरा का प्रमुख हिस्सा है। इस खबर का महत्व इस बात में है कि यह सांस्कृतिक और धार्मिक गतिविधियों के पुनरुद्धार को दिखाती है, जो महामारी के बाद समाज में एकता और उत्साह को पुनर्जीवित कर रही है। आम जनता पर इसका असर मनोबल बढ़ाने के साथ-साथ पर्यटन और स्थानीय व्यापार में भी वृद्धि करेगा, जिससे आर्थिक उछाल और साम

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