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नेपाल में कुदरत का भीषण तांडव: 178 भारतीयों समेत सैकड़ों की मौत, 300 से अधिक लापता; जानिए ग्राउंड जीरो से ताजा हालात

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 27 अगस्त 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
नेपाल में कुदरत का भीषण तांडव: 178 भारतीयों समेत सैकड़ों की मौत, 300 से अधिक लापता; जानिए ग्राउंड जीरो से ताजा हालात

पड़ोसी मुल्क नेपाल में कुदरत के कहर ने एक बार फिर भयानक तबाही का मंजर खड़ा कर दिया है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश, उफनती नदियों और जगह-जगह हुए जानलेवा भूस्खलन के चलते हालात बेहद गंभीर हो गए हैं।

इस आपदा की चपेट में आने से अब तक 178 भारतीय नागरिकों सहित कई लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 300 से अधिक लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। राजधानी काठमांडू से लेकर भारत-नेपाल सीमा तक चारों तरफ पानी और मलबे का साम्राज्य दिख रहा है। तबाही का आलम यह है कि कई प्रमुख राजमार्ग, पुल और संपर्क मार्ग पूरी तरह से बह गए हैं।

राहत और बचाव कार्य लगातार जारी है, लेकिन लगातार गिरते पत्थरों और खराब मौसम के चलते बचाव दलों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। प्रभावित इलाकों में फंसे हजारों लोग सुरक्षित स्थानों की तलाश में हैं और अपनों की तलाश में लोग बदहवास नजर आ रहे हैं।

भारतीय नागरिकों पर टूटा कुदरत का कहर नेपाल में हर साल बड़ी संख्या में भारतीय पर्यटक, तीर्थयात्री और व्यापारी जाते हैं। इस प्राकृतिक आपदा के वक्त भी कई भारतीय अलग-अलग क्षेत्रों में मौजूद थे। काठमांडू घाटी, धादिंग, मकवानपुर और सिंधुपालचोक जैसे इलाकों में अचानक आई बाढ़ और लैंडस्लाइड ने सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है।

भारतीय विदेश मंत्रालय और काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास लगातार स्थानीय प्रशासन के संपर्क में हैं। दूतावास द्वारा जारी किए गए हेल्पलाइन नंबरों पर भारत के अलग-अलग राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल से लगातार परिजनों के फोन आ रहे हैं।

कई परिवार अपने प्रियजनों से संपर्क टूटने की वजह से गहरे सदमे में हैं। भारतीय अधिकारियों का कहना है कि प्रभावित इलाकों में फंसे हर नागरिक को सुरक्षित बाहर निकालना पहली प्राथमिकता है।

राहत और बचाव कार्य में जुटी नेपाली सेना और भारतीय दल ग्राउंड जीरो पर नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस के जवान 24 घंटे मोर्चा संभाले हुए हैं। जहां सड़कें टूट गई हैं, वहां हेलीकॉप्टरों के जरिए लोगों को एयरलिफ्ट करने की कोशिश की जा रही है।

भारत सरकार ने भी अपने स्तर पर नेपाल को हरसंभव तकनीकी और लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध कराने की पेशकश की है। भारतीय आपदा प्रबंधन दल भी अलर्ट मोड पर हैं ताकि जरूरत पड़ने पर सीमावर्ती क्षेत्रों में तुरंत मोर्चा संभाला जा सके।

कई इलाकों में मोबाइल नेटवर्क टावर और बिजली के खंभे गिर जाने की वजह से संचार पूरी तरह ठप हो गया है, जिससे लापता लोगों की सटीक जानकारी जुटाने में वक्त लग रहा है। भारत-नेपाल सीमावर्ती क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा नेपाल की पहाड़ियों से निकलने वाली नदियां जैसे कोसी, गंडक, घाघरा और बागमती उफान पर हैं।

इनका सीधा असर उत्तर प्रदेश और बिहार के सीमावर्ती जिलों पर पड़ रहा है। बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के दर्जनों जिलों में प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है। नेपाल के बैराजों से लगातार भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण तराई क्षेत्रों में जलभराव का खतरा बढ़ गया है।

सीमावर्ती गांवों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए गए हैं और तटबंधों की लगातार निगरानी की जा रही है। चिकित्सा और बुनियादी सुविधाओं का भारी संकट आपदा प्रभावित क्षेत्रों में इस समय पीने के साफ पानी, दवाओं और भोजन का भारी संकट पैदा हो गया है।

अस्पतालों में घायलों की संख्या लगातार बढ़ रही है और कई ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र बाढ़ के पानी में डूब चुके हैं। गैर-सरकारी संगठन और स्थानीय स्वयंसेवक भोजन के पैकेट और आवश्यक दवाएं पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन टूटी सड़कों के कारण राहत सामग्री पहुंचाने में काफी देरी हो रही है।

महामारी और जलजनित बीमारियों के फैलने की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग द्वारा क्लोरीन की गोलियां और जीवनरक्षक दवाएं बांटी जा रही हैं।

📡 स्रोत: NewsData.io

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