अपराध

नेपाल में तबाही के 9 दिन, 1252 लोगों की मौत, 4875 लापता

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 3 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
नेपाल में तबाही के 9 दिन, 1252 लोगों की मौत, 4875 लापता

सितंबर 03, नई दिल्ली: नेपाल में विनाशकारी बाढ़ की त्रासदी को नौ दिन बीत चुके हैं, लेकिन प्रभावित इलाकों में अब भी शवों की बरामदगी का सिलसिला जारी है। मृतकों की संख्या बढ़कर 1,252 हो गई है, जबकि 4,875 लोग अब भी लापता हैं।

हर गुजरते दिन के साथ लापता लोगों के परिजनों की अपनों के लौटने की उम्मीद धूमिल होती जा रही है।नेपाल पुलिस के मुताबिक, सबसे ज्यादा 355 शव चितवन से बरामद किए गए हैं। इसके अलावा नवलपरासी पूर्व से 218, नवलपरासी पश्चिम से 208 और नुवाकोट से 177 शव मिले हैं।

वहीं, रसुवा से 127, गोरखा से 69, धादिंग से 60 और तनहूं से 38 शव बरामद किए गए हैं।लापता लोगों का लंबे समय से कोई सुराग नहीं मिलने के बाद अब कई परिवारों ने प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार शुरू कर दिए हैं।

परिजन भारी मन से उन अपनों के अंतिम संस्कार की रस्में निभा रहे हैं, जिनके शव अब तक नहीं मिल सके हैं।उधर, नेपाल की सीमा से लगे तिब्बत के ग्यिरोंग काउंटी में भी अचानक आई बाढ़ से हालात गंभीर हैं।

यहां बाढ़ से 21 लोगों की मौत हुई है, जबकि 541 लोग लापता बताए जा रहे हैं।नेपाल के विदेश मंत्रालय के अनुसार, बाढ़ के बाद करीब 100 नेपाली नागरिक तिब्बत में लापता हैं। वहीं, केरुंग सीमा नाके पर करीब 1,500 नेपाली नागरिक अब भी फंसे हुए हैं।

दोनों देशों के अधिकारी फंसे हुए नेपाली नागरिकों को सुरक्षित नेपाल वापस लाने के लिए लगातार बातचीत कर रहे हैं। FILE PHOTO

💡 पृष्ठभूमि (Background)

नेपाल में 2024 के सितंबर में आई भारी बाढ़ के बाद नौ दिन बीत चुके हैं, जिसमें 1252 लोगों की मौत हो गई है और 4875 लोग अभी भी लापता हैं। यह विषय एक प्राकृतिक आपदा की त्रासदी और उसके मानवीय प्रभाव पर प्रकाश डालता है। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों की जनसंख्या, बुनियादी ढाँचे और आर्थिक गतिविधियों पर गहरा असर पड़ा है, जिससे राहत और पुनर्निर्माण के लिए तात्कालिक कदम उठाने की जरूरत है। आम जनता पर इसका असर यह हो सकता है कि परिवारों को अपने प्रियजनों के लिए निराशा का सामना करना पड

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।