नेपाल की तबाही में 3 दिन तक भूखे-प्यासे भटकी महिला:रक्सौल के मैत्री पुल पहुंचने पर SSB ने संभाला, आधार कार्ड-भारतीय सिम से घर तक पहुंची
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →नेपाल के रसुवा क्षेत्र में आई भीषण प्राकृतिक आपदा और भोटेकोसी-त्रिशूली नदी की तबाही ने राजस्थान की 66 वर्षीय सीता देवी की जिंदगी को झकझोर कर रख दिया। तीर्थ और पर्यटन के लिए नेपाल गईं सीता देवी आपदा के बीच अपने साथियों से बिछड़ गईं।
इसके बाद तीन दिनों तक वह अनजान रास्तों और भूगोल के बीच अपनों तक पहुंचने की कोशिश करती रहीं। भूख-प्यास, डर और सदमे ने उन्हें इस कदर तोड़ दिया कि मदद मिलने के बाद भी वह ठीक से अपनी बात नहीं बता पा रही थीं। जान बच गई, लेकिन अपनों से बिछड़ने का दर्द उनके चेहरे पर साफ दिखाई दे रहा था।
हर पल उन्हें अपने परिवार और साथियों की चिंता सता रही थी। आखिरकार नेपाल पुलिस उन्हें मैत्री पुल तक लेकर पहुंची। यहां से उन्हें सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के हवाले किया गया।
सीमा पार कर रक्सौल पहुंचने के बाद भी उनकी नजरें अपनों को तलाश रही थीं। 10 लोगों के दल के साथ नेपाल गई थीं सीता देवी सीता देवी राजस्थान से नेपाल घूमने गए 10 लोगों के दल में शामिल थीं। नेपाल में आपदा आने के बाद अचानक हालात बिगड़ गए। नदी का जलस्तर बढ़ा और कई जगह रास्ते प्रभावित हो गए।
इसी अफरा-तफरी में सीता देवी अपने साथियों से अलग हो गईं। साथियों से संपर्क टूटने के बाद उनके लिए सबसे बड़ी चिंता परिवार तक पहुंचने की थी। वह नेपाल के रास्तों और भौगोलिक स्थिति से परिचित नहीं थीं। ऐसे में उन्हें यह भी समझ नहीं आ रहा था कि किस दिशा में जाने पर वह अपने लोगों तक पहुंच सकती हैं।
तीन दिन तक भूख-प्यास के बीच भटकती रहीं सीता देवी ने तीन दिनों तक अनजान जगहों पर भटकते हुए अपने साथियों और परिवार तक पहुंचने की कोशिश की। मोबाइल पर अपनों की आवाज सुनने की बेचैनी उनके भीतर बनी रही। लेकिन आपदा के कारण बिगड़े हालात और अपरिचित रास्तों ने उनकी मुश्किल और बढ़ा दी।
लगातार भटकने के कारण वह शारीरिक और मानसिक रूप से काफी कमजोर हो गई थीं। भूख-प्यास के साथ आपदा का डर भी उनके मन में बैठ गया था। जब वह रक्सौल पहुंचीं तो सदमे के कारण ज्यादा बातचीत करने की स्थिति में नहीं थीं।
आधार कार्ड और भारतीय सिम ने खोली पहचान की राह सीता देवी के पास मौजूद आधार कार्ड और भारतीय सिम वाला मोबाइल उस मुश्किल समय में उनके लिए सबसे बड़ा सहारा बना। आधार कार्ड से उनकी पहचान सीता देवी के रूप में हुई। दस्तावेज से पता चला कि वह उदयपुर में शास्त्री सिंक्ले निवासी रूप लाल की पत्नी हैं।
इसके बाद उनके मोबाइल में मौजूद भारतीय सिम के जरिए परिजनों से संपर्क करने की कोशिश की गई। काफी प्रयास के बाद घरवालों तक उनकी सुरक्षित होने की सूचना पहुंचाई जा सकी। जैसे ही परिवार को सीता देवी के सुरक्षित होने की जानकारी मिली, उनकी चिंता कुछ कम हुई।
मैत्री पुल तक नेपाल पुलिस लेकर आई, SSB ने संभाला नेपाल में भटक रही सीता देवी को किसी तरह नेपाल पुलिस मैत्री पुल तक लेकर पहुंची। इसके बाद उन्हें भारतीय सीमा पर तैनात सशस्त्र सीमा बल के हवाले किया गया। रक्सौल पहुंचने के बाद उनकी हालत देखकर स्थानीय लोगों ने भी मदद के लिए हाथ बढ़ाया।
महिला के चेहरे पर आपदा का डर और परिवार से मिलने की बेचैनी साफ दिखाई दे रही थी। वह लगातार अपने घर लौटने की कोशिश में थीं। स्वच्छ रक्सौल के सदस्यों ने संभाला, ट्रेन से भेजने की व्यवस्था सीता देवी की स्थिति की जानकारी मिलने पर स्वच्छ रक्सौल के अध्यक्ष रणजीत सिंह और महिला सहयोगी साबरा खातून ने उनकी मदद की।
दोनों ने उनसे बातचीत कर उन्हें भरोसा दिलाया कि अब वह सुरक्षित हैं और जल्द ही अपने घर पहुंच जाएंगी। महिला की हालत को देखते हुए रणजीत सिंह ने उनके लिए ट्रेन का टिकट उपलब्ध कराया। साथ ही पानी और बिस्किट की व्यवस्था की गई। इसके बाद उनके घर लौटने की पूरी व्यवस्था की गई।
दिल्ली के रास्ते उदयपुर रवाना, अब परिवार से मिलने की बारी रक्सौल से सीता देवी अब दिल्ली होते हुए उदयपुर, राजस्थान के लिए रवाना हो गई हैं। कुछ दिन पहले जिन कदमों ने नेपाल की तबाही के बीच अपनों को तलाशा था, अब वही कदम घर की ओर बढ़ रहे हैं।
हालांकि उनके चेहरे पर अभी भी आपदा का खौफ और अपनों से मिलने की बेचैनी दिखाई दे रही थी। तीन दिनों तक अनजान रास्तों पर भटकने का अनुभव शायद वह जिंदगी भर नहीं भूल पाएंगी।
उनके लिए यह सफर सिर्फ नेपाल से भारत लौटने का नहीं, बल्कि अपने परिवार तक दोबारा पहुंचने का सफर है। ‘संकट में जरूरतमंद का साथ देना ही सच्ची मानवता’ रणजीत सिंह ने कहा कि संकट की घड़ी में जरूरतमंद का साथ देना ही सच्ची मानवता है।
नेपाल की त्रासदी के बीच जो लोग अपने परिवार और साथियों से बिछड़ गए हैं, उन्हें सुरक्षित उनके घर तक पहुंचाना सबसे जरूरी है। उन्होंने कहा कि स्वच्छ रक्सौल प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के सहयोग से आगे भी जरूरतमंद लोगों की सहायता करता रहेगा।
नेपाल की त्रासदी ने सीता देवी को मौत के मुंह से तो बचा लिया, लेकिन अपनों से बिछड़ने का ऐसा दर्द दे दिया, जिसे भूलना आसान नहीं होगा। तीन दिनों की भटकन, भूख-प्यास और डर के बाद रक्सौल में मिले मदद के हाथों ने उन्हें एक भरोसा जरूर दिया मुश्किल वक्त में इंसानियत अभी जिंदा है।
📡 स्रोत: NewsData.io