नेपाल की तरह सूरत में भी आई थी प्रलय, भीषण बाढ़ से डायमंड सिटी के डूबे थे 1800 करोड़

नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने साल 2006 के अगस्त महीने में गुजरात के सूरत में आई भीषण बाढ़ की यादें ताजा कर दी हैं. सूरत शहर को आज पूरी दुनिया 'डायमंड सिटी' के नाम से जानती है.
साल 2006 में ये शहर अपनी पूरी रफ्तार से दौड़ रहा था, लेकिन कुछ ही घंटों में इस चमकते शहर पर ऐसा कहर टूटा, जिसने पूरी दुनिया के हीरा बाजार को हिलाकर रख दिया. 2006 में महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में लगातार मूसलाधार बारिश हो रही थी. पानी तापी नदी पर बने उकाई बांध में भरता चला गया.
बांध को टूटने से बचाने के लिए अचानक करीब 10 से 11 लाख क्यूसेक पानी छोड़ना पड़ा. बदकिस्मती से उसी वक्त समुद्र में हाई टाइड यानी ऊंची लहरें उठ रही थीं. समुद्र ने नदी का पानी लेने से मना कर दिया और पानी पलटकर सीधे सूरत शहर में घुस गया. देखते ही देखते 80 से 90 फीसदी सूरत 10 से 15 फीट गहरे गंदे पानी और कीचड़ में डूब गया.
कीचड़ ने करोड़ों की मशीन को बनाया कबाड़ अब सोचिए उस शहर का क्या हाल हुआ होगा, जहां दुनिया के 90 फीसदी हीरे तराशे जाते हैं. कतारगाम, वराछा और महिधरपुरा जैसे इलाके, जो हीरों की कटिंग और पॉलिशिंग के सबसे बड़े गढ़ थे, पूरी तरह जलमग्न हो गए.
सूरत में हीरों की करीब 6 हजार छोटी-बड़ी यूनिट्स थीं, जिनमें से एक हजार से ज्यादा यूनिट्स पूरी तरह बर्बाद हो गईं. उस दौर में महंगी लेजर कटिंग मशीनें, कंप्यूटर और डायमंड स्कैनर्स नई-नई तकनीक के तौर पर फैक्ट्रियों में आए थे. खारे पानी और कीचड़ ने करोड़ों रुपयों की इन मशीनों को कबाड़ बना दिया.
यह भी पढ़ें- महंगी चीनी से 700 की हुई 500 वाली मिठाई, दिल्ली-NCR में रक्षाबंधन पर बिगड़ा बजट
सबसे बड़ा दर्द ये था कि कई छोटे कारखानों के बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर पर रखे तिजोरियों और लॉकरों में पानी घुस गया. अरबों रुपये के रफ और तराशे हुए हीरे गाद और कीचड़ में दब गए या पानी के तेज बहाव में बह गए. लोग बाढ
📡 स्रोत: ABP Live Vyapar