नेपाल-तिब्बत में बाढ़ का कहर, 469 लोगों की मौत; 1468 लापता

अगस्त 28, नई दिल्ली: नेपाल और तिब्बत में अचानक आई भीषण बाढ़ से भारी तबाही मची है। सीमा के दोनों ओर बाढ़ और भूस्खलन से मरने वालों की संख्या बढ़कर 469 हो गई है। इनमें नेपाल में 389 और तिब्बत में तीन लोगों की मौत हुई है। वहीं, 290 भारतीय नागरिकों समेत कुल 1,468 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
बचावकर्मी युद्धस्तर पर लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं।नेपाल के अधिकारियों के मुताबिक, देश में 910 लोग लापता हैं। बचाव दल कीचड़ और मलबे से भरे नदी क्षेत्रों, निचले इलाकों और अलग-थलग पड़ी बस्तियों में हेलीकॉप्टर, ड्रोन और जमीनी दलों की मदद से तलाशी अभियान चला रहे हैं।
वहीं, तिब्बत में 558 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है।बाढ़ प्रभावित इलाकों से अब तक 50 विदेशियों समेत 796 लोगों को हेलीकॉप्टर से, जबकि अन्य 796 लोगों को सड़क मार्ग से सुरक्षित निकाला गया है।
नेपाल के सुरक्षाकर्मी प्रभावित जिलों से 800 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाल चुके हैं।नेपाल पुलिस के प्रवक्ता अबी नारायण काफले ने बताया कि चितवन से अब तक 137 शव बरामद किए गए हैं, जो बाढ़ प्रभावित जिलों में सबसे ज्यादा हैं। इसके अलावा रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, गोरखा, तनहूं और नवलपरासी से भी शव बरामद किए गए हैं।
अधिकारी अभी भी आपदा से हुए नुकसान का व्यापक आकलन कर रहे हैं।इस बीच, अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को रसुवा में फंसे 27 विदेशी पर्यटकों को सुरक्षित बचाया। इनमें 11 भारतीय, चार दक्षिण कोरियाई, दो इतालवी और दो अमेरिकी नागरिक शामिल हैं। नेपाल पर्यटन बोर्ड के मुताबिक, बाकी आठ लोगों की राष्ट्रीयता की पुष्टि नहीं हो सकी है।
नेपाल सेना ने सभी को हेलीकॉप्टर से काठमांडू पहुंचाया।प्रभावित भारतीय पर्यटकों में ज्यादातर लोग तिब्बत में कैलाश मानसरोवर या नेपाल के बागमती प्रांत में गोसाईंकुंड की यात्रा पर गए थे। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। फोटो कैप्शन 1: नेपाल में अचानक आई भीषण बाढ़ के बाद सैनिक घायल लोगों को ले जा रहे हैं।
फोटो कैप्शन 2: नेपाल में अचानक आई भीषण बाढ़ के बाद लोग अपने लापता परिवार के सदस्यों के बारे में खबर का इंतज़ार कर रहे हैं।