नेपाल त्रासदी से कैसे बचा बिहार,गंडक बैराज पर क्या हुआ?:फोन कॉल ने मौका दिया, 22 घंटे में 35 लाख क्यूसेक पानी आया, हर घंटे 1.5 लाख छोड़ा
"अगर पटना से हमें दो घंटे भी लेट जानकारी मिलती तो हालात कंट्रोल नहीं कर पाते। पहले जानकारी मिलने से पानी को समय से बराज से छोड़ने का मौका मिल गया और गंडक के तटबंधों पर अचानक ज्यादा प्रेशर नहीं आया।" बगहा के गंडक बैराज के एग्जक्यूटिव इंजीनियर मो.
इकबाल ने दैनिक भास्कर को नेपाल त्रासदी से बिहार में बने हालात की पूरी कहानी समझाई। नेपाल से आ रहे पानी के बारे कैसे मिली जानकारी? गंडक में पानी का लेवल कैसे और कब बढ़ा? अधिकारियों ने कैसे कंट्रोल किया?
इन सारे सवालों का जवाब यहां पढ़िए... 'नेपाल से कितना पानी आएगा, पता नहीं था' एग्जक्यूटिव इंजीनियर ने बताया, 26 अगस्त को दोपहर 11 बजकर 10 मिनट पर दिल्ली से पटना सचिवालय को नेपाल त्रासदी के बारे में जानकारी दी गई। कहा गया कि आपके यहां नेपाल से सटे उत्तर-पश्चिम इलाके में स्थिति बिगड़ सकती है।
पटना से तुरंत बगहा डीएम को फोन पर सारी जानकारी दी गई। इसके बाद डीएम ने गंडक बराज इंचार्ज से गंडक में पानी की स्थिति जानी। उस वक्त बराज में साढ़े 5 लाख क्यूसेक पानी था, जबकि उसकी क्षमता साढ़े 8 लाख क्यूसेक थी।
अधिकारियों को यह पता नहीं था कि नेपाल से कितना पानी आएगा, लेकिन इतना जरूर जानते थे कि अगर नेपाल से पानी आने से पहले बराज के पानी को खाली कर उसकी क्षमता नहीं बढ़ाई गई तो स्थिति अनकंट्रोल हो सकती है। इसलिए तत्काल डेढ़ लाख क्यूसेक पानी छोड़ने का आदेश दिया गया। 36 फाटक खोले गए।
इसके बाद हर एक घंटे पर करीब डेढ़ लाख क्यूशेक पानी छोड़ा जा रहा था। अगर एक साथ 4-5 लाख क्यूसेक पानी छोड़ दिया जाता तो आसपास के इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति आ सकती थी। गंडक की चौड़ाई ज्यादा नहीं है। इसलिए नियंत्रित तरीके से पानी छोड़ गया। बराज से छोड़ा गया पानी गंडक से होते हुए धीरे-धीरे गंगा में मिलता गया।
इसी बीच गंगा का जलस्तर भी बढ़ रहा था, लिहाजा वैशाली में जहां गंडक गंगा में मिली, वहां बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई। दूसरी तरफ गंडक से लगे सभी जिलों के अधिकारियों को अलर्ट कर दिया गया। करीब पांच जिलों के 70 से ज्यादा प्रखंडों में अधिकारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गईं।
नदी किनारे बसे लोगों को माइक के जरिए बताया गया कि वे जितनी जल्दी हो सके ऊंचे स्थानों पर चले जाएं। बाढ़ के चपेट में कितने जिले? बिहार में गंडक की शुरुआत से लेकर गंगा के बंगाल में प्रवेश करने तक 13 जिलों के नदी किनारे के हिस्से बाढ़ की चपेट में आए हैं। करीब 20 लाख लोग या तो बेघर हो गए हैं या पानी में रहने को मजबूर हैं।
वैशाली और खगड़िया में स्थिति ज्यादा खराब हुई है। वैशाली में गंडक का पानी गंगा में मिलता है, यहां पिछले 16 घंटे में साढ़े 28 लाख क्यूसेक पानी गंगा में आया। यही पानी समस्तीपुर, बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, खगड़िया, भागलपुर और कटिहार होकर बंगाल गया। इन जिलों के दियारा इलाके में बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है।
नेपाल का पानी गंगा तक कैसे पहुंचता है? नेपाल के रसुवा जिले में बुधवार को आई बाढ़ के बाद बिहार के गंडक बैराज से 22 घंटे में करीब 35 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। यह पानी गंगा तक कैसे पहुंचा, इसे समझिए। गंगा से आई बाढ़ की 2 तस्वीरें...
आइए, अब जिला वाइज समझते हैं पूरे हालात पिछले दिनों गंडक में अचानक पानी बढ़ने से वैशाली जिले के करीब 10 से ज्यादा प्रखंडों के 700 घरों में पानी घुस गया। राघोपुर प्रखंड के चकसिंगार, वीरपुर, जुरावनपुर बरारी, जुरावनपुर करारी, फतेहपुर, रामपुर, जफराबाद, जहांगीरपुर, शिवनगर सहित कई इलाकों में बाढ़ का पानी फैल गया है।
निचले इलाकों में पानी बढ़ने से ग्रामीणों की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं। बाढ़ का पानी अब जुरावनपुर थाना परिसर में भी प्रवेश कर गया है। वहीं, जुरावनपुर में मोबाइल टावर का निचला हिस्सा बाढ़ के पानी में डूब गया है। जुरावनपुर बरारी स्थित बिंदा चौक तक भी पानी पहुंच चुका है। वैशाली में बाढ़ की 2 तस्वीरें...
बगहा में 500 से ज्यादा घरों को कराया गया खाली पश्चिम चंपारण के बगहा में गंडक का पानी कई गांव में भर गया है। बगहा-2 प्रखंड में 500 से ज्यादा घरों को खाली कराया गया। यहां के लोगों को ऊंचे जगहों पर बसाया गया है। कम्यूनिटी कीचन की शुरुआत की गई है।
वहीं, गोपालगंज के 6 प्रखंड और मोतिहारी में 3 प्रखंडों के खेतों में बाढ़ का पानी घुस आया है। यहां भी निचले इलाके के लोगों को निकालकर ऊंचे स्थानों पर बसाया जा रहा है। बगहा के मंगलपुर बाजार के हरिवंश राय ने बताया, “पूरी रात चैन से नहीं सोए। नेपाल के पानी का डर लगा रहता था। न्यूज देखते रहे, बच्चे को गोद में लेकर जागते रहे।
समझिए कि हम लोगों को भगवान ने बचा लिया, वरना भागने की भी जगह नहीं थी।” समस्तीपुर में दो नदियां बहती हैं, एक बूढ़ी गंडक और दूसरी गंगा, जिले का ज्यादातर क्षेत्र दोनों के बीच है। यहां गंगा तीन प्रखंड से गुजरती है, तीनों प्रखंड में बाढ़ जैसी फिलहाल स्थिति नहीं है।
प्रशासन ने किनारे में रहने वाले लोगों को सावधान रहने की अपील की है। बेगुसराय में भी करीब यही हालात हैं। समस्तीपुर और बेगुसराय के दीयारा इलाके के क्षेत्रफल ज्यादा होने के कारण यहां घरों और गांवों तक पानी नहीं पहुंचा है। बाढ़ की स्थिति नहीं बनी है। लखीसराय गंगा दो प्रखंडों से गुजरती है, बरैया, पिपरिया।
इन दोनों प्रखंडों के 10 से ज्यादा गांव में पानी घुस आया है। यहां करीब 25 हजार लोग प्रभावित हुए हैं। किनारे पर रहने वाले लोगों को माइक के जरिए सावधान किया जा रहा है। एनडीआरएफ की दो टीमें लगाई गईं हैं। खगड़िया में सात नदियां बहती हैं।
यहां गंगा से बागमती और बूढ़ी गंडक मिलती है। 4 प्रखंड (परबत्ता, गोगड़ी, खगड़िया सदर 1, और मानसी) गंगा के तटीय इलाके में हैं। खगड़िया सदर में गंगा से बूढ़ी गंडक भी मिलती है। यहां लोगों को सावधान रहने के लिए माइकिंग की जा रही है। कुलहड़िया पंचायत के विपिन यादव ने कहा, “हमारे वार्ड में 20 से ज्यादा घर पानी में है।
एक नाव था, वो भी डूब गया, अब हमलोग पानी में पैर रखकर यहां से वहां जा रहे हैं। प्रशासन की यहां कोई व्यवस्था नहीं है।” 4 प्रखंडों के 25 पंचायतों में 75 हजार से ज्यादा घर पानी में हैं। सिर्फ परबत्ता में 15 हजार से ज्यादा पॉलिथिन बांटने की तैयारी है। सरकार की तरफ से निशुल्क नाव सेवा चलाई जा रही है।
NDRF-SDRF टीम को तैनात किया गया है। इन तीनों प्रखंडों के अंचलाधिकारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई है। मुंगेर में गंगा नदी के उफान के चलते निचले इलाके के तीन प्रखंड में पानी पहुंचा है। बुधवार रात से गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से महज 50 मीटर नीचे आकर स्थिर हो गया था।
आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, गुरुवार सुबह 10 बजे मुंगेर में गंगा का जलस्तर 38.83 मीटर दर्ज किया गया। यह चेतावनी स्तर से लगभग 50 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। सीताचरण जापुर के रहने वाले हरेराम ने बताया कि “हमारे गांव में करीब एक हफ्ते से पानी फैला हुआ है। पानी में हेलकर करीब एक हफ्ते से इधर-उधर समय काट रहे हैं।
कोई मुखिया या अधिकारी देखने तक नहीं आया है। अनाज कल-परसों से सरकार की तरफ से भिजवाया जा रहा है। हमारे इलाके में करीब 150 घर प्रभावित हुए हैं, इनमें 2,000 लोग फंसे हैं।” जिले के सदर मुंगेर, बरियारपुर, जमालपुर, धरहरा, हवेली खड़गपुर और असरगंज प्रखंडों के निचले इलाकों में पानी घुस गया है।
कई स्थानों पर घर पानी से घिर गए हैं और धान की फसलें भी डूब गई हैं।
📡 स्रोत: NewsData.io